31 जुलाई 2026
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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट: 34 खनिकों की मौत, सोरेंज में मीथेन गैस से हादसा

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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट: 34 खनिकों की मौत, सोरेंज में मीथेन गैस से हादसा

सारांश

बलूचिस्तान के सोरेंज में कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट ने 34 जिंदगियाँ लील लीं — और यह सिलसिला नया नहीं है। पाकिस्तान की खदानें बार-बार मजदूरों की कब्रगाह बन रही हैं, जबकि सुरक्षा सुधार के वादे कागज़ों पर ही रह जाते हैं।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान के सोरेंज इलाके की कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट से 34 खनिकों की मौत हुई।
हादसे के समय खदान में कुल 41 मजदूर मौजूद थे; बाकी फंसे मजदूरों को निकालने का अभियान जारी है।
चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ के अनुसार विस्फोट 4,000 फीट गहराई पर गैस जमाव से हुआ।
PDMA , खदान विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें राहत-बचाव में लगी हैं।
मई में खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले में भी दो अलग खदान हादसों में 2 मजदूरों की मौत हो चुकी है।
श्रमिक संगठनों ने पाकिस्तान की खदानों में सुरक्षा मानकों की कमी पर सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग की।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सोरेंज इलाके में स्थित एक कोयला खदान में मीथेन गैस के रिसाव से हुए भीषण विस्फोट में मरने वाले खनिकों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। 31 जुलाई को प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि मलबे में दबे शेष मजदूरों को निकालने के लिए बचाव अभियान अनवरत जारी है।

हादसे का घटनाक्रम

यह विस्फोट गुरुवार को हुआ था। अधिकारियों के अनुसार उस समय खदान में कुल 41 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके की चपेट में आने के बाद खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे कई श्रमिक मलबे के नीचे दब गए। अब तक 34 खनिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी फंसे मजदूरों की तलाश जारी है।

विस्फोट की वजह

चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ ने बताया कि शुरुआती जाँच के अनुसार खदान में करीब 4,000 फीट की गहराई पर मीथेन गैस जमा हो जाने के कारण विस्फोट हुआ। धमाके के बाद खदान में आग भड़क उठी और खतरनाक गैसें चारों ओर फैल गईं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बलूचिस्तान की कोयला खदानों में होने वाले अधिकांश विस्फोटों की जड़ में मीथेन गैस की अनियंत्रित मौजूदगी ही होती है।

बचाव अभियान

खदान विभाग, बचाव सेवाओं और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। PDMA के मुताबिक मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने का प्रयास लगातार किया जा रहा है, हालाँकि गहराई और खतरनाक गैसों के कारण अभियान अत्यंत जटिल बना हुआ है।

पाकिस्तान में खदान हादसों का इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है। मई में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में दो अलग-अलग हादसों में दो मजदूरों की जान गई थी और एक अन्य घायल हुआ था। उनमें से एक हादसा अखोरवाल कोयला खदान में हुआ था, जहाँ करीब ढाई घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दो मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला गया था — लेकिन वे बचाए नहीं जा सके। चपरमश्ती इलाके की एक अन्य खदान में भी एक मजदूर की मौत हुई थी।

सुरक्षा पर सवाल

स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा इंतजामों की घोर कमी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मजदूरों की जान बचाने के लिए ठोस और तत्काल कदम उठाने की माँग की है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान देश के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है, फिर भी यहाँ खनन सुरक्षा मानक अत्यंत कमज़ोर बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार जाँच के बाद वही पुराने कारण सामने आते हैं — मीथेन गैस की निगरानी का अभाव, पुरानी तकनीक, और नाममात्र का सुरक्षा निरीक्षण। चीफ इंस्पेक्टर का यह स्वीकारना कि बलूचिस्तान के अधिकांश विस्फोट मीथेन से होते हैं, खुद सरकारी विफलता का स्वीकारोक्ति है। सवाल यह नहीं कि हादसा क्यों हुआ — सवाल यह है कि जानते हुए भी रोका क्यों नहीं गया। श्रमिक संगठनों की माँगें वर्षों से एक जैसी हैं; जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, ये खदानें मौत के कुएँ बनी रहेंगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट में कितने लोगों की मौत हुई?
31 जुलाई तक मिली जानकारी के अनुसार इस हादसे में 34 खनिकों की मौत हो चुकी है। हादसे के समय खदान में कुल 41 मजदूर थे और बाकी फंसे मजदूरों को निकालने का बचाव अभियान जारी है।
सोरेंज कोयला खदान में विस्फोट कैसे हुआ?
चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ के अनुसार खदान में करीब 4,000 फीट की गहराई पर मीथेन गैस जमा हो जाने के कारण विस्फोट हुआ। धमाके के बाद खदान में आग लग गई और खतरनाक गैसें फैल गईं, जिससे बड़ा हिस्सा ढह गया।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
PDMA (प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी), खदान विभाग, बचाव सेवाएँ और जिला प्रशासन मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में लगे हैं। मलबे की गहराई और खतरनाक गैसों के कारण यह अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पाकिस्तान में इससे पहले भी ऐसे खदान हादसे हुए हैं?
हाँ, मई में खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले में दो अलग-अलग कोयला खदान हादसों में दो मजदूरों की जान गई थी और एक घायल हुआ था। बलूचिस्तान में भी मीथेन गैस से होने वाले विस्फोटों का लंबा इतिहास है।
पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी पर बार-बार चिंता जताई है। सरकार से ठोस कदम उठाने की माँग की जा रही है, लेकिन खदान सुरक्षा मानकों का क्रियान्वयन अब भी कमज़ोर बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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