3 अगस्त 2026
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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट में 34 मजदूरों की मौत, शांगला के परिवारों पर टूटा कहर

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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट में 34 मजदूरों की मौत, शांगला के परिवारों पर टूटा कहर

सारांश

बलूचिस्तान के स्पिन करेज में मीथेन गैस विस्फोट ने 34 मजदूरों की जान ले ली — जिनमें से 22 अकेले शांगला के एक गाँव के थे। यह हादसा पाकिस्तान के खनन उद्योग की उस गहरी खाई को उजागर करता है जहाँ गरीबी, पलायन और सुरक्षा के अभाव का घातक संगम होता है।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान के क्वेटा स्थित स्पिन करेज कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट से 34 मजदूरों की मौत हुई।
मृतकों में 22 मजदूर अकेले शांगला जिले के मियां कल्ले पीराबाद गाँव के थे; कई परिवारों में एक से अधिक सदस्यों की जान गई।
शांगला की लगभग 65% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला खनन पर निर्भर है।
अधिकांश मजदूर सरकारी रजिस्ट्री से बाहर हैं और उन्हें EOBI, स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा की सुविधा नहीं मिलती।
ठेकेदार प्रणाली के कारण हादसे में पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना अत्यंत कठिन है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में क्वेटा के स्पिन करेज इलाके की एक कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट और खदान के एक हिस्से के ढहने से 34 मजदूरों की मौत हो गई। गुरुवार सुबह हुए इस हादसे ने पाकिस्तान के खनन उद्योग की खतरनाक कार्यस्थितियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। मृतकों में अधिकांश मजदूर खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले के रहने वाले थे।

हादसे का घटनाक्रम

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मजदूर गुरुवार सुबह जमीन से कई हजार फीट नीचे नियमित खनन कार्य में लगे थे, तभी अचानक मीथेन गैस में जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट की चपेट में आने से खदान का एक हिस्सा भरभराकर ढह गया और दर्जनों मजदूर मलबे में दब गए। बचाव दलों ने घंटों की मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला।

शांगला के एक गाँव पर टूटा सबसे बड़ा दुख

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 34 मृतकों में से 22 अकेले शांगला जिले के मियां कल्ले पीराबाद गाँव के थे, जबकि शेष पीड़ित आसपास के गाँवों से थे। ज्यादातर मृतक आपस में रिश्तेदार या एक ही परिवार और बिरादरी के सदस्य थे। कई घरों में एक से अधिक सदस्यों की जान गई है, जिससे अनेक बच्चे अनाथ और महिलाएं विधवा हो गई हैं।

आर्थिक मजबूरी और पलायन की त्रासदी

हादसे के सभी शिकार अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर शांगला से बलूचिस्तान में काम करने आए थे। शांगला दशकों से पाकिस्तान के आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में शुमार रहा है — यहाँ औद्योगिक विकास नगण्य है, रोजगार के अवसर लगभग नहीं हैं, कृषि उत्पादन सीमित है और बेरोजगारी व्यापक है। इसी विवशता में हजारों युवा बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब की कोयला खदानों का रुख करते हैं।

स्थानीय अनुमानों के मुताबिक शांगला की लगभग 65 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला खनन पर निर्भर है। यह अब महज एक पेशा नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा जीवन-यापन का एकमात्र जरिया बन चुका है।

सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा का अभाव

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, शांगला के मजदूर आज भी बुनियादी कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं। अधिकांश मजदूर सरकारी रजिस्ट्री से बाहर हैं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा, EOBI, स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती। अधिकतर मजदूर ठेकेदारों और पट्टाधारकों के जरिए काम करते हैं, जिसके चलते घातक दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवारों को बहुत कम या कोई मुआवजा नहीं मिल पाता।

बार-बार दोहराती त्रासदी

रिपोर्टों के अनुसार पिछले कई दशकों में बलूचिस्तान की कोयला खदानों में हुई ऐसी दुर्घटनाओं में शांगला के सैकड़ों मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। आफताब हुसैन ने लिखा, 'कई बार एक ही हफ्ते में शांगला में पाँच-छह मजदूरों के शव पहुंचे हैं।' यह हादसा उस लंबी और दर्दनाक कड़ी की ताज़ा कड़ी है, जो पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में सुरक्षा सुधारों की माँग को और तीखा बना देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित विफलता का नतीजा है — जहाँ आर्थिक पिछड़ापन, नियामक शून्यता और ठेकेदार प्रणाली मिलकर मजदूरों को एक ऐसे जाल में धकेलती है जिससे निकलना लगभग असंभव है। शांगला की 65% आबादी का कोयला खनन पर निर्भर होना और फिर भी किसी बीमा या कानूनी सुरक्षा का न होना — यह नीतिगत उदासीनता की पराकाष्ठा है। पाकिस्तान की सरकारें दशकों से इन हादसों के बाद शोक व्यक्त करती हैं, पर खनन सुरक्षा कानूनों का क्रियान्वयन आज भी कागजों तक सीमित है। जब तक श्रमिक पंजीकरण और सुरक्षा अनुपालन को ठेकेदारों की जिम्मेदारी नहीं बनाया जाता, ये मौतें बेनाम आँकड़े बनती रहेंगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान कोयला खदान हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा गुरुवार सुबह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में क्वेटा के स्पिन करेज इलाके की एक कोयला खदान में हुआ। मीथेन गैस विस्फोट के बाद खदान का एक हिस्सा ढह गया, जिसमें 34 मजदूरों की मौत हो गई।
हादसे में मारे गए मजदूर कहाँ के रहने वाले थे?
अधिकांश मृतक खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले के थे, जिनमें से 22 अकेले मियां कल्ले पीराबाद गाँव के थे। बाकी पीड़ित आसपास के गाँवों से थे और अधिकतर आपस में रिश्तेदार या एक ही बिरादरी के सदस्य थे।
शांगला के मजदूर बलूचिस्तान की खदानों में काम करने क्यों जाते हैं?
शांगला पाकिस्तान के आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में से एक है जहाँ रोजगार के अवसर नगण्य हैं, औद्योगिक विकास कम है और बेरोजगारी व्यापक है। स्थानीय अनुमानों के अनुसार शांगला की करीब 65% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला खनन पर निर्भर है।
पाकिस्तान में कोयला मजदूरों को कौन-सी कानूनी सुरक्षा मिलती है?
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार अधिकांश मजदूर सरकारी रजिस्ट्री से बाहर हैं और उन्हें EOBI, स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती। ठेकेदार प्रणाली के कारण हादसे के बाद पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना बेहद कठिन होता है।
क्या बलूचिस्तान में पहले भी ऐसे खदान हादसे हुए हैं?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार पिछले कई दशकों में बलूचिस्तान की कोयला खदानों में हुई दुर्घटनाओं में शांगला के सैकड़ों मजदूरों की जान जा चुकी है और हजारों स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। कथित तौर पर कई बार एक ही हफ्ते में शांगला में पाँच-छह मजदूरों के शव पहुँचे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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