बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट में 34 मजदूरों की मौत, शांगला के परिवारों पर टूटा कहर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में क्वेटा के स्पिन करेज इलाके की एक कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट और खदान के एक हिस्से के ढहने से 34 मजदूरों की मौत हो गई। गुरुवार सुबह हुए इस हादसे ने पाकिस्तान के खनन उद्योग की खतरनाक कार्यस्थितियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। मृतकों में अधिकांश मजदूर खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले के रहने वाले थे।
हादसे का घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मजदूर गुरुवार सुबह जमीन से कई हजार फीट नीचे नियमित खनन कार्य में लगे थे, तभी अचानक मीथेन गैस में जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट की चपेट में आने से खदान का एक हिस्सा भरभराकर ढह गया और दर्जनों मजदूर मलबे में दब गए। बचाव दलों ने घंटों की मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला।
शांगला के एक गाँव पर टूटा सबसे बड़ा दुख
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 34 मृतकों में से 22 अकेले शांगला जिले के मियां कल्ले पीराबाद गाँव के थे, जबकि शेष पीड़ित आसपास के गाँवों से थे। ज्यादातर मृतक आपस में रिश्तेदार या एक ही परिवार और बिरादरी के सदस्य थे। कई घरों में एक से अधिक सदस्यों की जान गई है, जिससे अनेक बच्चे अनाथ और महिलाएं विधवा हो गई हैं।
आर्थिक मजबूरी और पलायन की त्रासदी
हादसे के सभी शिकार अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर शांगला से बलूचिस्तान में काम करने आए थे। शांगला दशकों से पाकिस्तान के आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में शुमार रहा है — यहाँ औद्योगिक विकास नगण्य है, रोजगार के अवसर लगभग नहीं हैं, कृषि उत्पादन सीमित है और बेरोजगारी व्यापक है। इसी विवशता में हजारों युवा बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब की कोयला खदानों का रुख करते हैं।
स्थानीय अनुमानों के मुताबिक शांगला की लगभग 65 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला खनन पर निर्भर है। यह अब महज एक पेशा नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा जीवन-यापन का एकमात्र जरिया बन चुका है।
सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा का अभाव
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, शांगला के मजदूर आज भी बुनियादी कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं। अधिकांश मजदूर सरकारी रजिस्ट्री से बाहर हैं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा, EOBI, स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती। अधिकतर मजदूर ठेकेदारों और पट्टाधारकों के जरिए काम करते हैं, जिसके चलते घातक दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवारों को बहुत कम या कोई मुआवजा नहीं मिल पाता।
बार-बार दोहराती त्रासदी
रिपोर्टों के अनुसार पिछले कई दशकों में बलूचिस्तान की कोयला खदानों में हुई ऐसी दुर्घटनाओं में शांगला के सैकड़ों मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। आफताब हुसैन ने लिखा, 'कई बार एक ही हफ्ते में शांगला में पाँच-छह मजदूरों के शव पहुंचे हैं।' यह हादसा उस लंबी और दर्दनाक कड़ी की ताज़ा कड़ी है, जो पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में सुरक्षा सुधारों की माँग को और तीखा बना देती है।