अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम: 13 रात के हमलों के बाद दोनों देशों ने रोके ऑपरेशन
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान और वाशिंगटन के बीच करीब 13 रातों तक चले लगातार सैन्य हमलों के बाद 26 जुलाई 2026 को दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने ऑपरेशन रोकने की घोषणा की। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि अमेरिका द्वारा हमले थामने के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई बंद कर दी है।
ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया
ईरानी सेना के प्रवक्ता आमिर अक्रामिनिया ने रविवार को कहा, 'अमेरिकियों ने पिछली दो रातों में अपने हमले रोक दिए हैं, क्योंकि हमारी रणनीति पूरी तरह से जवाबी कार्रवाई वाली रही है, इसलिए हमने भी अपने जवाबी ऑपरेशन रोक दिए हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारी आपस में बंटे हुए दिखे और उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी।
अक्रामिनिया ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने हमले दोबारा शुरू किए, तो इससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है। उन्होंने बताया कि लड़ाई पहले ही बाब अल-मंडेब स्ट्रेट तक फैल चुकी है।
अमेरिका में आंतरिक मतभेद
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ईरान के साथ संघर्ष और बढ़ने को लेकर गहरी चिंता जताई। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर विचार-विमर्श किया, जिसके बाद ईरान पर जारी बमबारी अभियान रोक दिया गया।
रक्षा विभाग के एक सूत्र ने शनिवार को बताया कि ऑपरेशन 'होल्ड पर' हैं। सूत्रों के अनुसार, जनरल केन ने बैठक में अमेरिका के हथियारों के भंडार (स्टॉकपाइल) और संघर्ष के अन्य संभावित दुष्परिणामों पर चिंता व्यक्त की। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमले रोकने का मुख्य कारण हथियार भंडार की चिंता थी या संघर्ष-विस्तार की आशंका।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन चेउंग ने एक बयान में कहा, 'प्रेसिडेंट ट्रंप हमेशा से कहते रहे हैं कि वे कूटनीतिक समाधान पसंद करते हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में या सहयोगियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियाँ जारी रखता है, तो उनके पास सभी विकल्प खुले हैं।'
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट जैसे रणनीतिक जलमार्गों को लेकर तनाव चरम पर था। गौरतलब है कि लगातार 13 रातों तक चले अमेरिकी हवाई हमलों ने इस संघर्ष को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया था।
आगे की स्थिति
फिलहाल दोनों पक्षों ने सैन्य ऑपरेशन रोके हुए हैं, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है। व्हाइट हाउस के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दी है, परंतु भविष्य की कार्रवाई ईरान के रवैये पर निर्भर करेगी।