अमेरिकी कांग्रेस में NIL टैक्स सुधार की माँग: कॉलेज एथलीट्स पर ₹2.7 करोड़ तक का बकाया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सांसदों ने 2 जुलाई 2025 को वॉशिंगटन में हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी की सुनवाई के दौरान माँग की कि कॉलेज खिलाड़ियों को नेम, इमेज एंड लाइकेनेस (NIL) समझौतों से होने वाली कमाई पर लगने वाले जटिल कर बोझ से राहत दी जाए। दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने स्वीकार किया कि अधिकांश युवा एथलीट — जिनमें से कई अभी किशोरावस्था में हैं — पर्याप्त वित्तीय मार्गदर्शन के अभाव में भारी टैक्स देनदारियों में फँस रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान पूर्व NFL लाइनबैकर और ESPN विश्लेषक सैम अचो ने एक 18 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी का उदाहरण पेश किया, जिसने NIL समझौतों के ज़रिए 7.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹6.3 करोड़) कमाए। उस खिलाड़ी ने अपनी माँ के लिए घर, एक कार और एक अपार्टमेंट किराए पर लेने में यह रकम खर्च कर दी — और बाद में पाया कि उसके पास केवल 6,000 डॉलर बचे हैं, जबकि 3.2 लाख डॉलर (लगभग ₹2.7 करोड़) का टैक्स बकाया है। आय से पहले कोई कर नहीं काटा गया था, इसलिए यह पूरा बोझ एकमुश्त आ पड़ा।
अचो ने कमिटी को बताया, 'टैक्स कोड किसी ऐसे 17 साल के कॉलेज फुटबॉल खिलाड़ी के लिए नहीं बनाया गया था जिसे अचानक बहुत सारा पैसा मिल जाए।' उन्होंने कांग्रेस से NIL भुगतान पर अनिवार्य कर कटौती (विदहोल्डिंग) लागू करने और स्टूडेंट-एथलीट्स के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
पूर्व इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी थड मैडेन ने समिति को बताया कि NIL कमाई करने वाले कॉलेज एथलीट्स को कर्मचारी नहीं, बल्कि 'सेल्फ-एम्प्लॉयड इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर' माना जाता है। इसके चलते उन्हें फेडरल इनकम टैक्स के साथ-साथ सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर टैक्स भी बिना किसी स्वत: कटौती के स्वयं जमा करना होता है। मैडेन ने कहा, 'हाई स्कूल से निकले 18 साल के युवा के लिए यह बहुत बड़ी बात है।'
मैडेन के अनुसार, कई एथलीट कॉलेज छोड़ने के समय भारी टैक्स देनदारियाँ लेकर निकलते हैं, क्योंकि वे टैक्स के लिए रकम अलग रखने से पहले ही अपनी कमाई खर्च कर देते हैं। उनका तर्क था कि NIL भुगतान पर अनिवार्य कटौती से न केवल नियमों का पालन बेहतर होगा, बल्कि युवा खिलाड़ियों को IRS के कर्ज में फँसने से भी बचाया जा सकेगा।
यूनिवर्सिटी और वित्तीय साक्षरता की भूमिका
गवाहों ने बताया कि अधिकांश विश्वविद्यालय खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट, टैक्स और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के बारे में शिक्षित करने के बजाय मुख्य रूप से एथलेटिक प्रदर्शन पर ध्यान देती हैं। अचो ने सांसदों को सीधे कहा, 'खिलाड़ियों को फैंस की नहीं, बल्कि सलाहकारों की जरूरत है।' दोनों दलों के कई सांसदों ने वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के प्रस्ताव का समर्थन किया।
यह ऐसे समय में आया है जब NCAA के NIL नियम 2021 में बदले और उसके बाद से एंडोर्समेंट डील्स का बाज़ार बहु-अरब डॉलर का हो गया है — लेकिन कर ढाँचा अभी भी उसी पुरानी व्यवस्था पर टिका है।
व्यापक आर्थिक संदर्भ
सुनवाई में स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के व्यापक आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई — जिसमें करदाताओं के पैसे से बने स्टेडियम, टैक्स-फ्री म्युनिसिपल बॉन्ड और प्रोफेशनल स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी पर लागू कर नियम शामिल हैं। अर्थशास्त्रियों ने सवाल उठाया कि क्या स्टेडियम निर्माण के लिए दी जाने वाली अरबों डॉलर की सरकारी छूट से स्थानीय समुदायों को वास्तविक आर्थिक लाभ मिलता है।
गौरतलब है कि F-1 वीज़ा पर अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्र-खिलाड़ियों — जिनमें भारतीय मूल के छात्र भी शामिल हैं — को इमिग्रेशन और कर नियमों की दोहरी पेचीदगियों का सामना करना पड़ता है। जैसे-जैसे अमेरिकी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक प्रतिभाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं, यह समस्या और गहरी होती जा रही है।
आगे क्या होगा
कमिटी ने अभी कोई विधेयक पेश नहीं किया है, लेकिन दोनों दलों के सांसदों के बीच NIL विदहोल्डिंग और वित्तीय साक्षरता पर आम सहमति बनती दिख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अनिवार्य कटौती लागू होती है, तो यह अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्र-खिलाड़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव साबित होगा।