खेल मंत्रालय का एंटी-डोपिंग कानून में बड़ा प्रस्ताव: डोप टेस्ट पॉजिटिव पर खिलाड़ी नहीं होंगे आपराधिक मुकदमे के शिकार

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खेल मंत्रालय का एंटी-डोपिंग कानून में बड़ा प्रस्ताव: डोप टेस्ट पॉजिटिव पर खिलाड़ी नहीं होंगे आपराधिक मुकदमे के शिकार

सारांश

खेल मंत्रालय ने एंटी-डोपिंग कानून में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है — तस्करों और संगठित सिंडिकेट पर आपराधिक शिकंजा कसेगा, लेकिन केवल डोप टेस्ट पॉजिटिव आने पर एथलीट अपराधी नहीं माने जाएँगे। 18 जून तक हितधारकों से सुझाव माँगे गए हैं।

मुख्य बातें

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 21 मई 2025 को एंटी-डोपिंग कानूनी ढाँचे में संशोधनों का प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया।
प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, अनाधिकृत बिक्री, नाबालिगों को आपूर्ति और संगठित डोपिंग गतिविधियाँ अपराध की श्रेणी में आएँगी।
केवल डोप टेस्ट पॉजिटिव आने पर एथलीटों पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा; मौजूदा एंटी-डोपिंग ढाँचा लागू रहेगा।
वैध चिकित्सीय उपयोग छूट (TUE) वाले एथलीटों और आपात स्थिति में दवा देने वाले चिकित्सकों को विशेष सुरक्षा।
प्रस्ताव यूनेस्को सम्मेलन और WADA के दिशानिर्देशों के अनुरूप; हितधारकों से 18 जून तक सुझाव आमंत्रित।

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 21 मई 2025 को भारत के एंटी-डोपिंग कानूनी ढाँचे में व्यापक संशोधनों का प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। इस प्रस्ताव का मूल उद्देश्य दोहरा है — एक ओर संगठित डोपिंग नेटवर्क के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को धार देना, और दूसरी ओर उन एथलीटों को फौजदारी मुकदमों से बचाना जो केवल डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हों। यह प्रस्ताव नई दिल्ली से जारी किया गया है और इस पर हितधारकों से 18 जून तक सुझाव माँगे गए हैं।

प्रस्ताव की मुख्य बातें

प्रस्तावित संशोधनों के तहत डोपिंग से जुड़ी कई गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में लाने की योजना है। इनमें प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और अनाधिकृत बिक्री या वितरण, डोपिंग के उद्देश्य से एथलीटों को ऐसे पदार्थ देना, नाबालिगों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति, संगठित व्यावसायिक डोपिंग गतिविधियाँ, निर्धारित लेबलिंग के बिना प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री, और डोपिंग को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन या सशुल्क प्रचार शामिल हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इस ढाँचे का निशाना वह पूरा इकोसिस्टम है जो खेल में डोपिंग को संभव बनाता है — तस्कर, अवैध आपूर्तिकर्ता, संगठित सिंडिकेट और सहायक कर्मचारी।

एथलीटों को मिलेगी सुरक्षा

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डोप टेस्ट में पॉजिटिव आने या एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने मात्र से किसी एथलीट पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। मंत्रालय ने कहा, 'एथलीटों द्वारा एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघनों से मौजूदा एंटी-डोपिंग ढाँचे के तहत ही निपटा जाता रहेगा।' आपराधिक प्रावधान केवल तभी लागू होंगे जब कोई एथलीट सीधे तस्करी या संगठित डोपिंग अभियानों में संलिप्त पाया जाए।

इसके अलावा, वैध चिकित्सीय उपयोग छूट (Therapeutic Use Exemption) रखने वाले एथलीटों और वास्तविक चिकित्सा आपात स्थितियों में प्रतिबंधित पदार्थ देने वाले लाइसेंसशुदा चिकित्सकों के लिए भी विशेष सुरक्षा उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मानकों से तालमेल

मंत्रालय ने उल्लेख किया कि ये प्रस्तावित उपाय यूनेस्को के 'खेल में डोपिंग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं। साथ ही ये विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) द्वारा समर्थित व्यापक दृष्टिकोण से भी मेल खाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई देश अपने एंटी-डोपिंग कानूनों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

परामर्श प्रक्रिया और आगे का रास्ता

खेल संघों, एथलीटों, कोचों, प्रशासकों और आम नागरिकों सहित सभी हितधारकों को 18 जून तक अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह ढाँचा एथलीटों की सुरक्षा, खेल की अखंडता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रभावी कानून प्रवर्तन के बीच संतुलन साधने के इरादे से तैयार किया गया है। परामर्श के बाद प्रस्ताव को विधायी प्रक्रिया के अगले चरण में ले जाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों एक साथ साधने की कोशिश है। लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी: 'संगठित डोपिंग में सहभागिता' और 'केवल उल्लंघन' के बीच की रेखा कानूनी रूप से कितनी स्पष्ट होगी, यह मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि भारत में डोपिंग के मामले पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं और WADA की रिपोर्टों में भारत का नाम लगातार आता रहा है। परामर्श प्रक्रिया की सफलता इस बात पर टिकी है कि एथलीट संघ और कोच समुदाय कितनी सक्रियता से अपनी बात रख पाते हैं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेल मंत्रालय के एंटी-डोपिंग कानून प्रस्ताव में मुख्य बदलाव क्या हैं?
प्रस्ताव के तहत प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, अनाधिकृत बिक्री, नाबालिगों को आपूर्ति और संगठित डोपिंग गतिविधियों को आपराधिक अपराध बनाया जाएगा। साथ ही, केवल डोप टेस्ट पॉजिटिव आने पर एथलीटों पर फौजदारी मुकदमा नहीं चलेगा।
क्या डोप टेस्ट पॉजिटिव आने पर खिलाड़ी को जेल हो सकती है?
नहीं — प्रस्तावित ढाँचे के अनुसार, केवल डोप टेस्ट पॉजिटिव आने या एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने पर एथलीट को आपराधिक अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा। आपराधिक प्रावधान तभी लागू होंगे जब एथलीट सीधे तस्करी या संगठित डोपिंग नेटवर्क में शामिल पाया जाए।
इस प्रस्ताव पर सुझाव देने की अंतिम तारीख क्या है?
खेल मंत्रालय ने हितधारकों — खेल संघों, एथलीटों, कोचों, प्रशासकों और आम नागरिकों — से 18 जून तक अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव प्रस्तुत करने को कहा है।
क्या चिकित्सीय उपयोग छूट वाले एथलीटों को कोई सुरक्षा मिलेगी?
हाँ, प्रस्तावित संशोधनों में वैध चिकित्सीय उपयोग छूट (TUE) रखने वाले एथलीटों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, वास्तविक चिकित्सा आपात स्थितियों में प्रतिबंधित पदार्थ देने वाले लाइसेंसशुदा चिकित्सकों को भी संरक्षण दिया गया है।
यह प्रस्ताव अंतर्राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग मानकों से कैसे जुड़ता है?
मंत्रालय के अनुसार, ये संशोधन यूनेस्को के 'खेल में डोपिंग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं और विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
राष्ट्र प्रेस
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