28 जुलाई 2026
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नाबालिगों के लिए एडिक्टिव एआई चैटबॉट्स पर रोक: अमेरिकी संसद में 'Addictive Design Act' पेश

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नाबालिगों के लिए एडिक्टिव एआई चैटबॉट्स पर रोक: अमेरिकी संसद में 'Addictive Design Act' पेश

सारांश

अमेरिकी प्रतिनिधि बेका बालिंट का 'Addictive Design Act' सिर्फ एक तकनीकी नियम नहीं — यह उस बढ़ती चिंता का जवाब है जहाँ मानसिक संकट में फँसे किशोर एआई चैटबॉट्स को थेरेपिस्ट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। विधेयक उल्लंघन पर प्रति नाबालिग $5,000 जुर्माने और शोध के लिए $80 लाख के प्रावधान के साथ तकनीकी जवाबदेही की माँग करता है।

मुख्य बातें

वर्मोंट की डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट ने 28 जुलाई 2026 को 'Addictive Design Act' पेश किया।
विधेयक के तहत नाबालिगों के लिए एडिक्टिव एआई चैटबॉट फीचर — जैसे टाइपिंग बबल्स, अवतार, 2 घंटे से अधिक बातचीत — पर प्रतिबंध का प्रस्ताव है।
उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर प्रत्येक प्रभावित नाबालिग के लिए $5,000 तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है।
डेटा साझा न करने वाली कंपनियों पर $1 करोड़ तक का जुर्माना और शोध के लिए $30 लाख , जागरूकता कार्यक्रमों के लिए $50 लाख का प्रावधान।
आयु सत्यापन करने वाली कंपनियों को डेटा 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन ने एआई को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोगी माना, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण की शर्त रखी।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में 28 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया, जो एआई चैटबॉट निर्माता कंपनियों को नाबालिगों के लिए ऐसे फीचर उपलब्ध कराने से प्रतिबंधित करेगा जो भावनात्मक निर्भरता, अत्यधिक उपयोग और लत को बढ़ावा देते हैं। वर्मोंट से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट द्वारा प्रस्तुत इस 'Addictive Design Act' को मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक कार्य और उपभोक्ता अधिकार क्षेत्र की कई संस्थाओं का समर्थन मिला है।

विधेयक की पृष्ठभूमि और ज़रूरत

यह विधेयक ऐसे समय में प्रस्तुत हुआ है जब अमेरिकी किशोर मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए तेज़ी से एआई चैटबॉट्स की ओर रुख कर रहे हैं। बालिंट के कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अधिकांश चैटबॉट्स इस प्रकार नहीं बनाए गए हैं कि वे मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे किसी युवा को सुरक्षित और उचित प्रतिक्रिया दे सकें।

प्रतिनिधि बालिंट ने कहा, 'तकनीकी कंपनियों ने वर्षों तक यह सीखने में बिताया है कि लोगों का ध्यान कैसे खींचा जाए और उन्हें अधिकतम समय तक कैसे जोड़े रखा जाए। उन्हें यही रणनीति उन संवेदनशील बच्चों पर लागू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो मानसिक स्वास्थ्य संकट में किसी एआई चैटबॉट का सहारा ले रहे हों।'

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

विधेयक के अंतर्गत कंपनियों पर ऐसे चैटबॉट्स नाबालिगों को उपलब्ध कराने पर रोक होगी जिनमें लत, अस्वस्थ भावनात्मक लगाव या अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देने वाले फीचर हों। संभावित रूप से एडिक्टिव माने जाने वाले फीचर्स में टाइपिंग बबल्स, अवतार, पिछली बातचीत से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारी का संग्रह और उपयोग, बातचीत जारी रखने के लिए अतिरिक्त जुड़ाव या भुगतान की अनिवार्यता, दो घंटे से अधिक बातचीत की अनुमति देना तथा किसी वास्तविक व्यक्ति का प्रतिरूप प्रस्तुत करना शामिल हैं।

इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर प्रत्येक प्रभावित नाबालिग के लिए $5,000 तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई कंपनी अनुदान प्राप्त शोधकर्ताओं को आवश्यक डेटा देने से इनकार करती है, तो उस पर $1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है।

शोध और जागरूकता के लिए वित्तीय प्रावधान

विधेयक में वैज्ञानिक शोध के लिए $30 लाख और माता-पिता तथा शिक्षकों को चेतावनी संकेतों की पहचान में सहायता करने वाले जागरूकता कार्यक्रमों के लिए $50 लाख की राशि अधिकृत करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, एक अंतर-एजेंसी टास्क फोर्स के गठन का प्रावधान है जो युवाओं में चैटबॉट उपयोग से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के उपायों की सिफारिश करेगी।

आयु सत्यापन प्रणाली का उपयोग करने वाली कंपनियों को एकत्रित जानकारी न्यूनतम रखनी होगी और उसे 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सेंटर फॉर हेल्थ एंड डेमोक्रेसी की कार्यकारी निदेशक रेचल मैडली ने कहा, 'एआई चैटबॉट्स को कभी भी इस तरह डिज़ाइन नहीं किया जाना चाहिए कि वे युवाओं को उनकी मानसिक सेहत की कीमत पर भावनात्मक रूप से निर्भर या लगातार जुड़े रहने के लिए प्रेरित करें।'

अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की सीईओ और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मार्केटा एम. विल्स ने माना कि एआई मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ला सकता है, लेकिन इसका आधार वैज्ञानिक प्रमाण होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, 'एआई चैटबॉट्स कभी भी डॉक्टर और मरीज़ के बीच के संबंध का स्थान नहीं ले सकते, क्योंकि सुरक्षित, साक्ष्य-आधारित और मरीज़-केंद्रित उपचार के लिए यह संबंध अत्यंत आवश्यक है।'

राजनीतिक समर्थन और आगे की राह

विधेयक को प्रतिनिधि क्रिस डेलूज़ियो, टॉम सुवोज़ी और बोनी वॉटसन कोलमैन का भी समर्थन प्राप्त है। गौरतलब है कि यह विधेयक ऐसे व्यापक विधायी प्रयासों की कड़ी में है जो तकनीकी प्लेटफार्मों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग कर रहे हैं। बालिंट ने कहा, 'हम एआई के मामले में वही गलती नहीं दोहरा सकते। इससे पहले कि और परिवार इसके दुष्परिणाम झेलें, हमें स्पष्ट नियम, शोध और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।' अब यह देखना होगा कि अमेरिकी कांग्रेस इस विधेयक को कानूनी रूप देने की दिशा में कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीकी लॉबिंग से आगे निकल पाती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का 'Addictive Design Act' क्या है?
'Addictive Design Act' एक अमेरिकी विधेयक है जिसे 28 जुलाई 2026 को वर्मोंट की डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट ने पेश किया। इसके तहत एआई चैटबॉट कंपनियों को नाबालिगों के लिए ऐसे फीचर उपलब्ध कराने से रोका जाएगा जो भावनात्मक निर्भरता, लत या अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
इस विधेयक के तहत कौन-से एआई फीचर प्रतिबंधित होंगे?
विधेयक में टाइपिंग बबल्स, अवतार, पिछली बातचीत से व्यक्तिगत डेटा का संग्रह, दो घंटे से अधिक बातचीत की अनुमति, जुड़ाव जारी रखने के लिए भुगतान की अनिवार्यता और किसी वास्तविक व्यक्ति का प्रतिरूप प्रस्तुत करना — इन सभी को संभावित एडिक्टिव फीचर के रूप में चिन्हित किया गया है।
नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर क्या जुर्माना होगा?
प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर प्रत्येक प्रभावित नाबालिग के लिए $5,000 तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई कंपनी शोधकर्ताओं को आवश्यक डेटा देने से इनकार करती है, तो उस पर $1 करोड़ तक का अतिरिक्त जुर्माना हो सकता है।
विधेयक में शोध और जागरूकता के लिए क्या प्रावधान हैं?
विधेयक में वैज्ञानिक शोध के लिए $30 लाख और माता-पिता व शिक्षकों को चेतावनी संकेत पहचानने में मदद करने वाले जागरूकता कार्यक्रमों के लिए $50 लाख की राशि अधिकृत करने का प्रस्ताव है। एक अंतर-एजेंसी टास्क फोर्स भी बनाई जाएगी जो युवाओं में चैटबॉट उपयोग के मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों पर सिफारिशें देगी।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस विधेयक पर क्या कहा?
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की सीईओ डॉ. मार्केटा एम. विल्स ने कहा कि एआई मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सहायक हो सकता है, लेकिन इसका आधार वैज्ञानिक प्रमाण होने चाहिए और यह डॉक्टर-मरीज़ संबंध का विकल्प नहीं बन सकता। सेंटर फॉर हेल्थ एंड डेमोक्रेसी ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि चैटबॉट्स को युवाओं की मानसिक सेहत की कीमत पर उन्हें जोड़े रखने के लिए डिज़ाइन नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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