बलूचिस्तान में BLF का विद्रोह तेज़: 2026 में अब तक 233 मौतें, नाल हमले में 33 सुरक्षाकर्मी ढेर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दशकों से सुलग रहा सशस्त्र विद्रोह 2026 में और अधिक भयावह रूप ले चुका है। दक्षिण एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के आंशिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 21 जून तक बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) से जुड़ी 59 घटनाओं में 233 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 21 नागरिक, 203 सुरक्षाकर्मी और 9 उग्रवादी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों पर नागरिकों के जबरन गायब किए जाने और बिना मुकदमे के हत्या जैसे गंभीर आरोप भी स्थिति को और उलझा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम: आंकड़े और तुलना
SATP के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में BLF से जुड़ी 93 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 273 लोगों की जान गई — इनमें 30 नागरिक, 226 सुरक्षाकर्मी और 17 उग्रवादी थे। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 के पहले छह महीनों में ही घटनाओं की संख्या पिछले पूरे वर्ष के आधे से अधिक पहुँच चुकी है, जो विद्रोह की बढ़ती रफ़्तार का संकेत है।
BLF ने 4 जनवरी 2026 को जारी अपनी वार्षिक ऑपरेशनल रिपोर्ट में 2025 को 'राष्ट्रीय प्रतिरोध संघर्ष' के लिए निर्णायक वर्ष बताया। संगठन ने दावा किया कि उसने तटीय क्षेत्रों, शहरी इलाकों, राष्ट्रीय राजमार्गों और दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों तथा सरकारी ढाँचे को निशाना बनाकर 581 सशस्त्र कार्रवाइयाँ कीं, जिनमें 929 लोग हताहत हुए — 647 की मौत और 282 घायल।
नाल हमला: BLF का सबसे बड़ा दावा
8 जून 2026 को खुजदार जिले के नाल शहर में एक बड़े समन्वित हमले में BLF ने दावा किया कि उसने कुछ समय के लिए इलाके पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और पुलिस स्टेशन सहित कई सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि उसने एक ऐसी फैक्ट्री को आग लगाई, जिसे वह बलूचिस्तान के संसाधनों के दोहन में संलिप्त मानता है।
13 जून को जारी बयान में BLF ने दावा किया कि नाल के इस समन्वित गुरिल्ला हमले में 33 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। रिपोर्टों के अनुसार, घायलों में पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, खुफिया एजेंसियों के कर्मी, पुलिसकर्मी, तथाकथित 'डेथ स्क्वॉड' के सदस्य और कोस्ट गार्ड के जवान शामिल थे।
BLF की रणनीति और हथियार
BLF ने अपनी गतिविधियों में घात लगाकर हमले, ग्रेनेड हमले, IED विस्फोट, स्नाइपर हमले और भारी हथियारों के इस्तेमाल का दावा किया है। गौरतलब है कि यह संगठन अब केवल दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहा — शहरी और तटीय क्षेत्रों में उसकी सक्रियता एक नई रणनीतिक दिशा की ओर इशारा करती है।
मानवाधिकार और राजनीतिक संकट
सुरक्षा बलों पर नागरिकों के जबरन गायब किए जाने और बिना मुकदमे के हत्या के आरोप वर्षों से लगते आए हैं। आलोचकों का कहना है कि इन आरोपों ने स्थानीय जनता में सरकार के प्रति अविश्वास को और गहरा किया है, जिससे BLF जैसे संगठनों को समर्थन जुटाने में सहूलियत मिलती है। पाकिस्तानी सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
आगे क्या: क्या बल प्रयोग से मिलेगी शांति?
विश्लेषकों के अनुसार, BLF की बढ़ती गतिविधियाँ, रणनीतिक विस्तार और लगातार हमले यह दर्शाते हैं कि बलूचिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा समस्याएँ अभी भी अनसुलझी हैं। रिपोर्टों में यह भी रेखांकित किया गया है कि केवल सैन्य बल से स्थायी शांति संभव नहीं — राजनीतिक संवाद और विकास-केंद्रित नीतियाँ अपरिहार्य हैं। यह देखना बाकी है कि इस्लामाबाद बढ़ते दबाव के बीच अपनी रणनीति में बदलाव करता है या नहीं।