बलूचिस्तान में 'किल एंड डंप' के 43 मामले: बलूच यकजेहती कमेटी की रिपोर्ट में पाक सेना पर गंभीर आरोप

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बलूचिस्तान में 'किल एंड डंप' के 43 मामले: बलूच यकजेहती कमेटी की रिपोर्ट में पाक सेना पर गंभीर आरोप

सारांश

बलूच यकजेहती कमेटी की ताज़ा रिपोर्ट ने 2026 की शुरुआत में बलूचिस्तान में 'किल एंड डंप' के 43 मामलों का दस्तावेज़ीकरण किया है — और चेतावनी दी है कि असली संख्या कहीं अधिक हो सकती है। दो दशकों से जारी यह कथित सिलसिला अब तेज़ हो रहा है, और न्यायपालिका की चुप्पी इसे और गहरा बना रही है।

मुख्य बातें

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने जनवरी-अप्रैल 2026 के बीच बलूचिस्तान में 43 'किल एंड डंप' पीड़ितों और 21 टारगेट किलिंग के मामले दर्ज किए।
2025 की पहली छमाही में 47 'किल एंड डंप' और 32 टारगेट किलिंग के मामले सामने आए थे, जिनमें नाबालिग भी शामिल थे।
रिपोर्ट में अवारन, ग्वादर, केच, खारान, पंजगुर और क्वेटा जिलों में घटनाओं का पैटर्न उजागर किया गया।
संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की न्यायपालिका के फैसलों में पक्षपात दिखता है और जवाबदेही नगण्य है।
बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान पर दबाव बनाने और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने 6 मई 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट 'किल एंड डंप पॉलिसी इन बलूचिस्तान' में खुलासा किया कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच बलूचिस्तान में कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा 43 बलूच नागरिकों की चुन-चुनकर हत्या कर उनके क्षत-विक्षत शव फेंके गए। संगठन के अनुसार इसी अवधि में 21 टारगेट किलिंग के अलग मामले भी दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट में क्या सामने आया

बीवाईसी की रिपोर्ट के अनुसार, ये आँकड़े वास्तविक स्थिति की केवल आंशिक तस्वीर पेश करते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि इन संख्याओं में उन पीड़ितों को शामिल नहीं किया गया है जिनकी पहचान नहीं हो सकी, जिन्हें चुपचाप दफना दिया गया, या जिनके शव परिवारों को गुपचुप सौंप दिए गए। फर्जी मुठभेड़ों और अज्ञात शवों के मामले भी इन आँकड़ों से बाहर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में ऐसे 47 'किल एंड डंप' के मामले और 32 टारगेट किलिंग के मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें नाबालिग भी शामिल थे।

किन जिलों में सबसे ज़्यादा घटनाएँ

रिपोर्ट में अवारन, ग्वादर, केच, खारान, पंजगुर और क्वेटा जैसे जिलों का विशेष उल्लेख किया गया है, जहाँ बार-बार हत्याएँ हो रही हैं। बीवाईसी का कहना है कि इन घटनाओं का भौगोलिक और समयगत पैटर्न यह संकेत देता है कि ये किसी तय रणनीति के तहत अंजाम दी जा रही हैं। गौरतलब है कि पिछले दो दशकों से ऐसी घटनाएँ रिपोर्ट होती रही हैं, लेकिन 2026 की शुरुआत में इनकी संख्या और तीव्रता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

न्यायपालिका और जवाबदेही पर सवाल

संगठन ने आरोप लगाया कि मनमानी गिरफ्तारियों और 'किल एंड डंप' मामलों पर कोई ठोस न्यायिक कार्रवाई नहीं हो रही है। बीवाईसी के अनुसार, जिन न्यायाधीशों या सरकारी अधिकारियों ने इन कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज़ उठाई, उन्हें दबाव और कार्रवाई का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की न्यायपालिका — ऊपरी अदालतों से लेकर निचली आतंकवाद विरोधी अदालतों तक — के फैसलों में पक्षपात परिलक्षित होता है, जिससे आम नागरिकों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा टूटा है।

बीवाईसी की माँगें

बलूच यकजेहती कमेटी ने जबरन गायब किए जाने को कानूनी अपराध घोषित करने, सुरक्षा एजेंसियों पर न्यायिक निगरानी लागू करने और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों या अंतरराष्ट्रीय जाँचकर्ताओं की सहायता से स्वतंत्र जाँच एजेंसियाँ स्थापित करने की माँग की है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, विशेष दूतों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएँ।

आगे क्या

बीवाईसी की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बलूचिस्तान में नागरिक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता पहले से बढ़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्वतंत्र जाँच की माँग के बीच पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि इस मुद्दे पर वैश्विक मंचों पर किस तरह की कार्रवाई होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उचित संदर्भ में देखना ज़रूरी है — BYC स्वयं एक पक्षधर संगठन है और पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। असली चिंता यह है कि दो दशकों के दस्तावेज़ीकरण के बावजूद न अंतरराष्ट्रीय दबाव ने ज़मीनी स्थिति बदली, न पाकिस्तान की न्यायपालिका ने कोई ठोस जवाबदेही तय की। संयुक्त राष्ट्र से अपील नई नहीं है — सवाल यह है कि इस बार क्या अलग होगा। जब तक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग को वैश्विक मंचों पर राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं मिलती, ये रिपोर्टें दस्तावेज़ बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में 'किल एंड डंप' नीति क्या है?
'किल एंड डंप' उस कथित प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें सुरक्षा बलों पर आरोप है कि वे बलूच नागरिकों को हिरासत में लेकर उनकी हत्या करते हैं और बाद में उनके क्षत-विक्षत शव सार्वजनिक स्थानों पर फेंक देते हैं। बलूच यकजेहती कमेटी के अनुसार यह सिलसिला दो दशकों से जारी है।
2026 में बलूचिस्तान में कितने 'किल एंड डंप' मामले दर्ज हुए?
BYC की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 43 पीड़ितों की पहचान उनके परिवारों ने की और 21 अलग टारगेट किलिंग के मामले दर्ज किए गए। संगठन का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने क्या माँगें रखी हैं?
BYC ने जबरन गायब किए जाने को कानूनी अपराध घोषित करने, सुरक्षा एजेंसियों पर न्यायिक निगरानी और संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की सहायता से स्वतंत्र जाँच एजेंसियाँ बनाने की माँग की है। साथ ही UN मानवाधिकार परिषद से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की अपील की गई है।
किन जिलों में 'किल एंड डंप' की घटनाएँ सबसे अधिक हैं?
रिपोर्ट के अनुसार अवारन, ग्वादर, केच, खारान, पंजगुर और क्वेटा जिलों में ये घटनाएँ बार-बार हो रही हैं। इन जिलों में घटनाओं का पैटर्न संगठन के अनुसार एक तय रणनीति की ओर इशारा करता है।
पाकिस्तान की न्यायपालिका इन मामलों में क्यों निष्क्रिय है?
BYC की रिपोर्ट के अनुसार ऊपरी अदालतों से लेकर निचली आतंकवाद विरोधी अदालतों तक के फैसलों में पक्षपात दिखता है। जिन न्यायाधीशों या अधिकारियों ने इन उल्लंघनों के खिलाफ आवाज़ उठाई, उन्हें कथित तौर पर दबाव और कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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