बांग्लादेश की JF-17 खरीद योजना पर सवाल: चीन-पाकिस्तान धुरी से $720 मिलियन का रणनीतिक दांव
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की वायुसेना के लिए प्रस्तावित JF-17 थंडर ब्लॉक III लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर रणनीतिक और वित्तीय चिंताएँ गहरी होती जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में पाकिस्तान वायुसेना का एक C-130J विमान चुपचाप ढाका पहुँचा, जिसमें पूर्ण आकार का JF-17 थंडर ब्लॉक III सिम्युलेटर था — जिसे 1971 के बाद बांग्लादेश पहुँचा पहला पाकिस्तानी सैन्य विमानन उपकरण बताया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश गंभीर आर्थिक दबाव में है और उसकी विदेश नीति की पारंपरिक 'सभी से दोस्ती' की धुरी पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के अनुसार, यह सिम्युलेटर दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच पहली औपचारिक एयर स्टाफ वार्ता के दौरान सौंपा गया। इसे 16 से 48 JF-17 ब्लॉक III मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद से पहले प्रशिक्षण उपकरण के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत $40 करोड़ से $72 करोड़ (लगभग $720 मिलियन अधिकतम) के बीच बताई गई है।
बांग्लादेश की रक्षा आधुनिकीकरण की ज़रूरत
रक्षा विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं ने ऑपरेशनल तर्क दिया है कि बांग्लादेश वायुसेना का मौजूदा बेड़ा — जिसमें F-7BG और MiG-29 शामिल हैं — अपनी सेवा-आयु के अंत की ओर है। 'फोर्सेज गोल 2030' मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम, जिसे पहली बार 2009 में शुरू किया गया था, थल, नौसेना और वायु सेना को एक आधुनिक त्रि-आयामी रक्षा बल में बदलने का लक्ष्य रखता है। इस ढाँचे के तहत विश्वसनीय वायु शक्ति की आवश्यकता निर्विवाद मानी जाती है।
रणनीतिक और वित्तीय जोखिम
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि ऑपरेशनल तर्क का दायरा सीमित है क्योंकि इसमें इस खरीद से जुड़े गहरे राजनीतिक निहितार्थों को नज़रअंदाज़ किया गया है। रिपोर्ट के शब्दों में, 'एक फाइटर जेट कभी भी सिर्फ एक हथियार का प्लेटफॉर्म नहीं होता — यह एक राजनीतिक टूल है, एक आर्थिक प्रतिबद्धता है और एक अलाइनमेंट का स्टेटमेंट है जो सरकारों से ज़्यादा समय तक चलता है।' रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश 'एक ऐसी रणनीतिक कक्षा में प्रवेश कर सकता है जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल, महंगा और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील होगा।'
चीन की चुप्पी में भूमिका
रिपोर्ट ने इस सौदे की संरचनात्मक प्रकृति पर ज़ोर दिया। JF-17 को पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसलिए रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा 'ढाका और इस्लामाबाद के बीच कोई द्विपक्षीय लेनदेन नहीं है — संरचनात्मक रूप से यह एक त्रिपक्षीय लेनदेन है, जिसमें बीजिंग चुपचाप प्रमुख भागीदार है।' गौरतलब है कि बांग्लादेश की विदेश नीति लंबे समय से 'सभी के साथ दोस्ती, किसी के साथ दुश्मनी नहीं' के सिद्धांत पर आधारित रही है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग
रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह के बड़े फैसले — जो बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति, वित्तीय क्षमता और भू-राजनीतिक संबंधों पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं — के लिए व्यापक संसदीय समीक्षा, स्वतंत्र आर्थिक मूल्यांकन और खुली सार्वजनिक बहस अनिवार्य है। आलोचकों का कहना है कि अभी तक इनमें से कोई भी प्रक्रिया पारदर्शी रूप से नहीं अपनाई गई है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि ढाका इस रणनीतिक दोराहे पर किस दिशा में कदम बढ़ाता है।