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पाकिस्तान बना चीनी हथियारों का 'गेटवे': लीबिया को $4 अरब के JF-17 सौदे पर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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पाकिस्तान बना चीनी हथियारों का 'गेटवे': लीबिया को $4 अरब के JF-17 सौदे पर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

सारांश

अमेरिकी थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की रिपोर्ट में दावा — चीन, पाकिस्तान को अपने हथियारों का 'गेटवे' बना रहा है। लीबिया को $4 अरब से अधिक का JF-17 सौदा, UN प्रतिबंधों को चुनौती और 2021-2024 के बीच पाकिस्तान के 80% हथियार चीन से — यह महज़ व्यापार नहीं, बीजिंग की रणनीतिक चाल है।

मुख्य बातें

मिडिल ईस्ट फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, चीन पाकिस्तान को पश्चिम एशिया में अपने हथियारों के 'गेटवे' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 विमानों सहित $4 अरब से अधिक का कथित रक्षा सौदा, UN हथियार प्रतिबंध को कमज़ोर कर सकता है।
SIPRI के आँकड़ों के अनुसार, 2021-2024 के बीच पाकिस्तान के 80% से अधिक हथियार चीन से आयात हुए।
पाकिस्तान इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया के साथ रक्षा वार्ताओं में सक्रिय है।
सऊदी अरब के साथ जेएफ-17 सौदे की संभावना है, लेकिन गुणवत्ता, तालमेल और वित्तीय कारणों से अब तक कोई समझौता नहीं हुआ।

मिडिल ईस्ट फोरम की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पाकिस्तान को एक माध्यम — या 'गेटवे' — के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, प्रशिक्षण विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों से जुड़ा $4 अरब से अधिक का रक्षा सौदा इसी रणनीति का ठोस उदाहरण है। यह रिपोर्ट 4 जुलाई 2026 को वाशिंगटन से सामने आई है।

रिपोर्ट के मुख्य दावे

अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रस्तावित लीबिया सौदे से संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध कमज़ोर पड़ सकते हैं, लीबिया के आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदल सकता है और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा, सुरक्षा और खुफिया सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आँकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80 प्रतिशत से अधिक हथियार चीन से आयात हुए — जो पाकिस्तान की बढ़ती निर्भरता और उसके रक्षा क्षेत्र में चीन की मज़बूत होती पकड़ को दर्शाता है।

पाकिस्तान की दोहरी भूमिका

रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि पाकिस्तान अब भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फैल्कन विमानों का उपयोग करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी प्राप्त करता है। लेकिन रिपोर्ट यह भी कहती है कि उसकी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा अब चीनी मूल के हथियारों पर आधारित हो चुका है।

रिपोर्ट के शब्दों में, 'पाकिस्तान, चीन के साथ संयुक्त रूप से निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान के साथ-साथ चीनी ड्रोन, एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।'

किन देशों से हो रही हैं रक्षा वार्ताएँ

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों के साथ पाकिस्तान की रक्षा वार्ताओं और संभावित सौदों की संख्या बढ़ी है। चीनी मीडिया में भी यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।

सऊदी अरब के साथ संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान जेएफ-17 विमान उपलब्ध कराने के बदले वित्तीय व्यवस्था कर सकता है, हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार ऐसा कोई सौदा अब तक संपन्न नहीं हुआ है। इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी प्रणालियों के साथ उनका तालमेल और वित्तीय पहलुओं को बाधा बताया गया है।

थिंक टैंक का निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट फोरम का निष्कर्ष है कि चीन, पाकिस्तान के माध्यम से पश्चिम एशिया और व्यापक क्षेत्र के रक्षा बाज़ार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया, 'चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एक गेटवे के तौर पर कर रहा है — और पाकिस्तान द्वारा इन रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा दिए जाने से बीजिंग की व्यापक रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी बल मिल रहा है।'

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और वैश्विक हथियार व्यापार को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें तेज़ हो रही हैं। आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों की इस सौदे पर क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस गेटवे की असली कीमत पाकिस्तान की अपनी रणनीतिक स्वायत्तता है। UN प्रतिबंधों वाले देशों को हथियार पहुँचाने की यह कथित रणनीति यदि सिद्ध होती है, तो यह वैश्विक अप्रसार व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती होगी — और भारत के लिए एक सीधा सुरक्षा संकेत।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिडिल ईस्ट फोरम की रिपोर्ट में पाकिस्तान को चीन का 'गेटवे' क्यों कहा गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान चीन के साथ संयुक्त रूप से निर्मित हथियारों — जैसे जेएफ-17 विमान, ड्रोन और एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली — को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ावा देकर बीजिंग की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है। इससे चीन को प्रत्यक्ष जोखिम उठाए बिना पश्चिम एशिया और अफ्रीका के रक्षा बाज़ार में प्रवेश मिल रहा है।
लीबिया के साथ पाकिस्तान का कथित $4 अरब का रक्षा सौदा क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, प्रशिक्षण विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों से जुड़ा $4 अरब से अधिक का सौदा प्रस्तावित है। यह सौदा लीबिया पर लागू संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन कर सकता है।
SIPRI के आँकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की चीन पर हथियार निर्भरता कितनी है?
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आँकड़ों के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80 प्रतिशत से अधिक हथियार चीन से आयात हुए। यह आँकड़ा पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र में चीन की गहरी होती पकड़ को दर्शाता है।
पाकिस्तान किन देशों के साथ रक्षा सौदों पर बातचीत कर रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में पाकिस्तान ने इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया के साथ रक्षा वार्ताएँ और संभावित सौदों की संख्या बढ़ाई है। इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 विमानों के सौदे अंतिम रूप दिए जाने की बात चीनी मीडिया में भी कही गई है।
सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का जेएफ-17 सौदा क्यों नहीं हो पाया?
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के साथ जेएफ-17 विमानों की संभावित डील अब तक संपन्न नहीं हुई है। इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी प्रणालियों के साथ उनका तालमेल और वित्तीय पहलुओं को प्रमुख बाधा बताया गया है।
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