पाकिस्तान की 'हेजिंग' रणनीति पर अमेरिकी पत्रिका की चेतावनी: इस्लामाबाद बिकता नहीं, 'किराए' पर मिलता है
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी पत्रिका द नेशनल इंटरेस्ट ने एक विश्लेषण रिपोर्ट में कहा है कि वाशिंगटन वर्षों से यह भूल करता आया है कि वह पाकिस्तान को 'खरीद' सकता है — जबकि हकीकत यह है कि इस्लामाबाद बिकने के लिए नहीं, बल्कि 'किराए' पर उपलब्ध है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की भू-राजनीतिक 'हेजिंग' रणनीति का विस्तृत विश्लेषण करते हुए अमेरिका को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया गया है।
पाकिस्तान की 'हेजिंग पावर' की भूमिका
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि वाशिंगटन के लिए एक सीमित लाभ यह है कि वह पाकिस्तान को अपनी इच्छा से 'किराए' पर ले सकता है, जबकि चीन को यह मजबूरी में करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने तेहरान और वाशिंगटन दोनों का विश्वास बनाए रखते हुए युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की, जिससे कुछ समय के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सका।
रिपोर्ट में कहा गया, 'फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे पारंपरिक संधि सहयोगी यह भूमिका नहीं निभा सकते थे। यह काम सिर्फ एक हेजिंग पावर ही कर सकती थी।' यह टिप्पणी पाकिस्तान की उस अनोखी स्थिति को रेखांकित करती है जहाँ वह एक साथ परस्पर विरोधी शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखता है।
जेएफ-17 सौदा: रणनीतिक संतुलन का व्यावसायिक रूप
रिपोर्ट में जून 2025 में अजरबैजान के साथ हुए $4.6 अरब के समझौते का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसके तहत इस्लामाबाद बाकू को 40 जेएफ-17 लड़ाकू विमान सप्लाई करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 'यह विमान चीनी एयरफ्रेम पर बना है, इसमें रूसी इंजन लगा है और इसे अमेरिका के सहयोगी देश ने उस देश को बेचा है जिसे वाशिंगटन साधने में लगा है।'
रिपोर्ट में इस सौदे को पाकिस्तान की उस रणनीति का उदाहरण बताया गया है जिसमें वह चीन के साथ अपने रिश्ते को पश्चिमी बाज़ार में भुनाता है। गौरतलब है कि इस तरह के सौदे पाकिस्तान की 'सभी को साधने' की नीति का व्यावसायिक विस्तार हैं।
आर्थिक मोलभाव: $10 अरब का एक्सचेंज-स्थिरीकरण फंड
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष में मध्यस्थता के बाद इस्लामाबाद ने कथित तौर पर वाशिंगटन से अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए $10 अरब का एक्सचेंज-स्थिरीकरण फंड स्थापित करने का अनुरोध किया। रिपोर्ट में इसे पाकिस्तान की उस क्षमता का प्रमाण बताया गया है जिसमें वह अपनी भू-राजनीतिक प्रासंगिकता को आर्थिक सहायता में परिवर्तित करता है — और यह सब बिना चीन से संबंध तोड़े।
अमेरिकी प्रभाव के शेष क्षेत्र
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं पर निर्भरता वह क्षेत्र है जहाँ अमेरिकी प्रभाव अभी भी निर्णायक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने उच्च ब्याज वाले द्विपक्षीय कर्ज और पाकिस्तानी राज्य को सीधे वित्त न देने की नीति के कारण इस भूमिका में अमेरिका की जगह नहीं ले सकता।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान से चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से बाहर निकलने की माँग करना 'बेमानी' है, क्योंकि संतुलन साधने वाला देश कभी किसी एक पक्ष को चुनने की शर्त नहीं मानेगा।
अमेरिका के लिए रणनीतिक सुझाव
रिपोर्ट का सुझाव है कि वाशिंगटन को पाकिस्तान का आकलन इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह चीन से संबंध तोड़ता है या नहीं, बल्कि इस आधार पर कि क्या वह बीजिंग को इन संबंधों पर एकाधिकार बनाने से रोकता है। रिपोर्ट में कहा गया, 'अगर वाशिंगटन प्रतिष्ठा देने में उदार, शर्तों में व्यावहारिक और सैन्य व आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रहेगा, तो वह पाकिस्तान की हेजिंग रणनीति को अमेरिकी फायदे में बदल सकता है।' यह विश्लेषण ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है और पाकिस्तान अपनी भू-राजनीतिक कीमत लगातार बढ़ाता जा रहा है।