पाकिस्तान की नई आर्थिक योजना: संकट में भी लड़ाकू विमानों का निर्यात
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है।
- सरकार लड़ाकू विमानों के निर्यात पर जोर दे रही है।
- रक्षा निर्यात योजनाएँ कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
- जेएफ-17 विमान चीन के साथ साझेदारी में विकसित किए गए हैं।
- आर्थिक सुधार की उम्मीदें विफल हो सकती हैं।
इस्लामाबाद, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है। एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, गरीबी और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में स्थिति बहुत ही खराब है। लेकिन इसी समय, पाकिस्तान के नेता खुद को लड़ाकू विमानों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान क्षेत्र के विशेषज्ञ नासिर खट्टक ने 'अफगान डायस्पोरा नेटवर्क' में इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है—जैसे ऊर्जा संकट, कमजोर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल बुनियादी ढाँचे की कमी, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे। ऐसे हालात में सरकार का खुद को एक बड़े फाइटर जेट निर्यातक के रूप में स्थापित करने का प्रयास एक स्पष्ट विरोधाभास प्रतीत होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान ने लगभग 10 अरब डॉलर के रक्षा निर्यात समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें चीन के साथ मिलकर विकसित जेएफ-17 थंडर और मश्शाक ट्रेनर विमानों का समावेश है। सरकार इन समझौतों को आर्थिक सुधार और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में पेश कर रही है, लेकिन यह रणनीति उतनी सरल नहीं है जितनी लगती है।
मुख्य समस्या यह है कि जेएफ-17 जैसे लड़ाकू विमान पूरी तरह से स्वदेशी नहीं हैं। इनके कई महत्वपूर्ण भाग चीन, रूस और ब्रिटेन से आयात किए जाते हैं, जिसके लिए विदेशी मुद्रा में भुगतान करना पड़ता है।
इसका मतलब है कि निर्यात से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा बाहरी आपूर्तिकर्ताओं को लौट जाता है, जिससे शुद्ध लाभ सीमित रह जाता है। इसके अतिरिक्त, कुछ रक्षा सौदों में लिबिया जैसे देशों के साथ संबंधों का भी जिक्र है, जो यूएनएससी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स और वैधता पर प्रश्न उठते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान अपनी व्यापक आर्थिक अस्थिरता को दूर करने के लिए सैन्य क्षेत्र पर अधिक निर्भरता दिखा रहा है, जबकि अतीत में यह मॉडल सफल नहीं रहा है।
2025 के बजट में रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जबकि कुल सरकारी खर्च में कटौती की गई है, जो प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। ऐसे में यह धारणा कि जेट निर्यात कर्ज संकट या आईएमएफ बेलआउट से राहत दिला देगा, अत्यधिक अतिशयोक्तिपूर्ण मानी जा रही है।
वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उच्च महंगाई, बढ़ता कर्ज और बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता जैसे कारक पहले ही अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक ढांचा काफी हद तक “एलीट कैप्चर” से प्रभावित है, जहाँ नीतियां सीमित प्रभावशाली वर्ग के हितों के अनुसार निर्धारित होती हैं। इस प्रकार, रक्षा निर्यात को आर्थिक समाधान के रूप में प्रस्तुत करना आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने जैसा भी हो सकता है।
रिपोर्ट का दावा है कि पाकिस्तान लड़ाकू जेट निर्यात के माध्यम से आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह रणनीति कई संरचनात्मक कमजोरियों से घिरी हुई है और इससे व्यापक आर्थिक सुधार की उम्मीद करना फिलहाल यथार्थवादी नहीं लग रहा है।