शेख हसीना का ईद संदेश: बांग्लादेश गहरे संकट में, त्याग की भावना देगी उबरने की शक्ति
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ईद-उल-अजहा 2026 के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पर्व ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश के नागरिक 'गहरे संकट और मुश्किल दौर' से गुज़र रहे हैं। अवामी लीग ने उनका यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। हसीना ने लोगों के दर्द और पीड़ा पर गहरा अफसोस जताते हुए उम्मीद जताई कि ईद का संदेश इस कठिन घड़ी में नई ताकत देगा।
पिछले 21 महीनों का दर्द
हसीना ने अपने संदेश में कहा, 'पिछले 21 महीनों में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार हिंसा, हमलों और झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ा है, जबकि कई लोग अब भी जेल में बंद हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है — आम नागरिक भी भारी मुश्किलों की चपेट में हैं।
बच्चों की मौत और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सैकड़ों बच्चे खसरे की वजह से काल के गाल में समा रहे हैं। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। हसीना के अनुसार, 'बर्बर हिंसा का दौर जारी है और अर्थव्यवस्था ने देश को गर्त में डाल दिया है।'
अवामी लीग के आरोप
अवामी लीग ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि पार्टी से जुड़े लोगों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं और देश के कई हिस्सों में हिंसा का माहौल बना हुआ है। पार्टी का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी वृद्धि हुई है, जिससे आम जनता में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। पार्टी के अनुसार, 'कोई भी निर्दोष व्यक्ति जो हमारी पार्टी से जुड़ा है, वह निशाने पर रहता है।'
शासन व्यवस्था पर सवाल
हिंसा की बढ़ती घटनाओं के पीछे व्यापक संस्थागत विफलता का आरोप लगाते हुए अवामी लीग ने कहा, 'यह अब सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं रह गया — यह शासन व्यवस्था, न्याय प्रणाली और देश के नैतिक चरित्र में गिरावट का संकेत है।' इसी महीने की शुरुआत में पार्टी ने दावा किया था कि 2025 की तरह इस वर्ष भी महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसक वारदातों में वृद्धि हुई है।
ईद का संदेश: त्याग से मिलेगी शक्ति
हसीना ने अपने संदेश का समापन उम्मीद के स्वर में किया। उन्होंने कहा, 'इस प्रतिकूल परिस्थिति में भी यह त्योहार हमें सच्चाई के रास्ते पर चलने और देश हित में जरूरी त्याग के लिए तत्पर रहने की ताकत देता है।' उनके अनुसार ईद-उल-अजहा 'त्याग और समर्पण' का संदेश देती है और यही भावना बांग्लादेश को इस कठिन दौर से उबारने में सहायक होगी। यह संदेश ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और नागरिक असंतोष चरम पर बताया जा रहा है।