ढाका विश्वविद्यालय में फुटबॉल वर्ल्ड कप देखने गई छात्राओं से बदसलूकी के आरोप, शिबिर पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
ढाका विश्वविद्यालय में महिला छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि फुटबॉल वर्ल्ड कप के मैच बड़ी स्क्रीन पर देखने की कोशिश के दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें परेशान किया गया। यह विवाद कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इस्लामी छात्र शिबिर के उन दावों की पोल खोलता है, जिसमें उसने खुद को महिलाओं के प्रति संवेदनशील संगठन बताया था।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
रिपोर्टों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर ने ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (डीयूसीएसयू) चुनाव से पहले खुद को 'महिलाओं के अनुकूल' संगठन के रूप में प्रस्तुत किया था। लेकिन अब उस पर महिलाओं के प्रति भेदभाव और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे उसकी बनाई गई छवि और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई उजागर हुई है।
ताज़ा विवाद तब शुरू हुआ जब संगठन के कुछ नेताओं ने महिलाओं के वर्ल्ड कप मैच देखने का विरोध किया। नॉर्वे-फ्रांस मैच के दौरान शाहिदुल्लाह हॉल मैदान में एक महिला छात्रा के साथ कथित तौर पर बदसलूकी होने के बाद, 28 जून को बड़ी संख्या में छात्राएं अर्जेंटीना-जॉर्डन मैच देखने के लिए एकजुट होकर मैदान में पहुँचीं।
मुख्य घटनाक्रम
2018-19 सत्र के छात्र मुहतसिन बिल्लाह एमोन ने आरोप लगाया कि 26 जून की रात वे और उनके साथी, आधिकारिक रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के बावजूद, कुछ छात्रों द्वारा मैदान छोड़ने के लिए मजबूर किए गए। उनके अनुसार, उनके साथ मौजूद एक महिला छात्रा से पूछा गया कि वह वहाँ क्यों आई है और उसे तुरंत वहाँ से जाने के लिए कहा गया।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों में साजू मिया का नाम सामने आया है, जो हॉल यूनियन के सोशल सर्विसेज सेक्रेटरी हैं और शिबिर समर्थित पैनल से चुने गए थे। कई शिकायतों के बावजूद संगठन ने अपने स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की।
छात्राओं का विरोध और माँगें
विरोध में एकजुट हुई महिला छात्राओं ने 28 जून को शाहिदुल्लाह हॉल मैदान में अर्जेंटीना-जॉर्डन मैच देखा और इसके बाद प्रॉक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें तीन प्रमुख माँगें रखी गईं। यह कदम संगठित प्रतिरोध का प्रतीक बना और परिसर में व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
अन्य छात्र नेताओं की आलोचना
वाम समर्थित प्रतिरोध परिषद से जुड़ी डीयूसीएसयू की कार्यकारी सदस्य हेमा चकमा ने छात्रसंघ की चुप्पी की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में शामिल लोगों के छात्रसंघ के शीर्ष नेतृत्व से करीबी संबंध हैं, जहाँ शिबिर समर्थित उम्मीदवारों के पास सर्वाधिक पद हैं।
बांग्लादेश छात्र फेडरेशन की विश्वविद्यालय इकाई की उपाध्यक्ष सीमा अख्तर ने इस घटना को महिलाओं पर नियंत्रण की राजनीति का हिस्सा बताया। आलोचकों का कहना है कि यह घटना केवल एक अकेला मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करती है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब डीयूसीएसयू चुनाव नज़दीक हैं और शिबिर की छवि दाँव पर लगी है। प्रॉक्टर कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन पर कार्रवाई की प्रतीक्षा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन महिला छात्राओं की सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।