बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ का उभार: सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी हमलों के इनपुट, हाई अलर्ट जारी
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ और उग्रवाद एक बार फिर गंभीर सुरक्षा संकट का रूप लेता दिख रहा है। ढाका ट्रिब्यून में प्रकाशित एक संपादकीय के हवाले से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की सुरक्षा एजेंसियों को संभावित आतंकी हमलों के इनपुट मिले हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट 2024 के जुलाई आंदोलन के बाद कमज़ोर पड़ी सुरक्षा व्यवस्था और अंतरिम सरकार की कथित नीतिगत विफलताओं की उपज है।
हाई अलर्ट की वजह और पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने संसद भवन, सुरक्षा प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों पर संभावित हमलों की आशंका जताई है। यह अलर्ट एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद जारी किया गया, जिसने कथित तौर पर दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों से संपर्क में होने का दावा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश की सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में हैं।
जुलाई आंदोलन के बाद सुरक्षा तंत्र की कमज़ोरी
2024 के जुलाई आंदोलन और उसके बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से देश की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमज़ोर बताई जा रही है। इस दौरान व्यापक हिंसा, लूटपाट और जेलों से बड़े पैमाने पर कैदियों के फरार होने की घटनाएँ सामने आईं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि एक अनुमान के अनुसार इस अवधि में 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से भाग निकले।
कट्टरपंथी तत्वों की रिहाई और बढ़ती सक्रियता
अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कई अपराधियों और उग्रवादी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को जमानत दिए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में है। इनमें सबसे चिंताजनक मामला जशीमुद्दीन रहमानी की रिहाई का बताया गया है, जो 2013 में ब्लॉगर और शाहबाग आंदोलन के कार्यकर्ता राजीब हैदर की हत्या के आरोपी हैं। इसके अलावा, 2009 में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश ने भी पुनः सक्रियता दिखाई और इस्लामिक खिलाफत की माँग करते हुए प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में कुछ युवाओं द्वारा कथित तौर पर आईएसआईएस का झंडा भी लहराया गया।
मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर सवाल
रिपोर्ट में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उनके शासनकाल में कट्टरपंथी तत्वों को खुलकर सक्रिय होने का अवसर मिला। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण काल में उग्रवादी ताकतें मज़बूत हुई हों — इतिहास में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियाँ केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती हैं। यदि स्थिति पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो यह पूरे उपमहाद्वीप की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।