बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ का उभार: सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी हमलों के इनपुट, हाई अलर्ट जारी

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बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ का उभार: सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी हमलों के इनपुट, हाई अलर्ट जारी

सारांश

बांग्लादेश में 2024 के जुलाई आंदोलन के बाद कमज़ोर पड़ी सुरक्षा व्यवस्था अब उग्रवाद के नए उभार से जूझ रही है। 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदियों के फरार होने, प्रतिबंधित संगठनों की पुनः सक्रियता और आतंकी हमलों के इनपुट ने पूरे दक्षिण एशिया को चिंता में डाल दिया है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में सुरक्षा एजेंसियों को संभावित आतंकी हमलों के इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रीय हाई अलर्ट जारी।
2024 के जुलाई आंदोलन के बाद 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से फरार हुए।
एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सदस्य की गिरफ्तारी के बाद अलर्ट जारी; उसने दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों से संपर्क का दावा किया।
जशीमुद्दीन रहमानी — ब्लॉगर राजीब हैदर की 2013 में हत्या के आरोपी — को जमानत पर रिहा किया गया।
2009 में प्रतिबंधित हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश ने पुनः सक्रियता दिखाई; प्रदर्शनों में कथित तौर पर आईएसआईएस का झंडा लहराया गया।
विश्लेषकों के अनुसार यह स्थिति दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ और उग्रवाद एक बार फिर गंभीर सुरक्षा संकट का रूप लेता दिख रहा है। ढाका ट्रिब्यून में प्रकाशित एक संपादकीय के हवाले से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की सुरक्षा एजेंसियों को संभावित आतंकी हमलों के इनपुट मिले हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट 2024 के जुलाई आंदोलन के बाद कमज़ोर पड़ी सुरक्षा व्यवस्था और अंतरिम सरकार की कथित नीतिगत विफलताओं की उपज है।

हाई अलर्ट की वजह और पृष्ठभूमि

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने संसद भवन, सुरक्षा प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों पर संभावित हमलों की आशंका जताई है। यह अलर्ट एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद जारी किया गया, जिसने कथित तौर पर दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों से संपर्क में होने का दावा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश की सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में हैं।

जुलाई आंदोलन के बाद सुरक्षा तंत्र की कमज़ोरी

2024 के जुलाई आंदोलन और उसके बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से देश की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमज़ोर बताई जा रही है। इस दौरान व्यापक हिंसा, लूटपाट और जेलों से बड़े पैमाने पर कैदियों के फरार होने की घटनाएँ सामने आईं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि एक अनुमान के अनुसार इस अवधि में 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से भाग निकले।

कट्टरपंथी तत्वों की रिहाई और बढ़ती सक्रियता

अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कई अपराधियों और उग्रवादी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को जमानत दिए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में है। इनमें सबसे चिंताजनक मामला जशीमुद्दीन रहमानी की रिहाई का बताया गया है, जो 2013 में ब्लॉगर और शाहबाग आंदोलन के कार्यकर्ता राजीब हैदर की हत्या के आरोपी हैं। इसके अलावा, 2009 में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश ने भी पुनः सक्रियता दिखाई और इस्लामिक खिलाफत की माँग करते हुए प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में कुछ युवाओं द्वारा कथित तौर पर आईएसआईएस का झंडा भी लहराया गया।

मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर सवाल

रिपोर्ट में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उनके शासनकाल में कट्टरपंथी तत्वों को खुलकर सक्रिय होने का अवसर मिला। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण काल में उग्रवादी ताकतें मज़बूत हुई हों — इतिहास में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियाँ केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती हैं। यदि स्थिति पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो यह पूरे उपमहाद्वीप की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे महज़ कुछ महीनों की अस्थिरता में फिर से उभर आए। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर लगाए जा रहे आरोप गंभीर हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश की संस्थाएँ इस उभार को रोकने में सक्षम हैं — या यह संकट दक्षिण एशिया की सामूहिक सुरक्षा की परीक्षा बन जाएगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हाई अलर्ट क्यों जारी किया गया है?
सुरक्षा एजेंसियों को संभावित आतंकी हमलों के इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रीय हाई अलर्ट जारी किया गया। यह अलर्ट एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सदस्य की गिरफ्तारी के बाद आया, जिसने दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों से संपर्क का दावा किया था।
बांग्लादेश में कट्टरपंथ के उभार की मुख्य वजह क्या है?
2024 के जुलाई आंदोलन और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद सुरक्षा व्यवस्था कमज़ोर पड़ गई। इस दौरान 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से फरार हुए और अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कई उग्रवादियों को जमानत भी मिली।
हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश क्या है?
हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश एक चरमपंथी संगठन है जिसे 2009 में प्रतिबंधित किया गया था। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस संगठन ने पुनः सक्रियता दिखाई है और इस्लामिक खिलाफत की माँग करते हुए प्रदर्शन किए, जिनमें कथित तौर पर आईएसआईएस का झंडा भी लहराया गया।
जशीमुद्दीन रहमानी कौन हैं और उनकी रिहाई क्यों चिंताजनक है?
जशीमुद्दीन रहमानी 2013 में ब्लॉगर और शाहबाग आंदोलन के कार्यकर्ता राजीब हैदर की हत्या के आरोपी हैं। उनकी जमानत पर रिहाई को रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक घटनाक्रमों में से एक बताया गया है।
क्या बांग्लादेश का यह संकट भारत और दक्षिण एशिया को प्रभावित कर सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार बांग्लादेश में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियाँ केवल देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। यदि स्थिति पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो इसके क्षेत्रीय प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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