ब्राजील चुनाव: पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला को पछाड़ा, 25 अक्टूबर को होगा निर्णायक दौर
सारांश
मुख्य बातें
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो ने मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को पीछे छोड़ दिया। 5 अक्टूबर 2026 को हुई मतगणना में 98.81 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक बोल्सोनारो को 47.24 प्रतिशत वोट मिले, जबकि लूला 44.91 प्रतिशत पर रहे। चूँकि कोई भी उम्मीदवार सीधी जीत के लिए ज़रूरी 50 प्रतिशत की सीमा नहीं लाँघ सका, इसलिए अब दोनों के बीच 25 अक्टूबर 2026 को दूसरे और निर्णायक दौर का मुकाबला होगा।
मुख्य परिणाम और मतगणना
ब्राजील की चुनाव प्रणाली के अनुसार पहले दौर में सीधी जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत से अधिक हासिल करना अनिवार्य है। 98.81 प्रतिशत मतों की गिनती में बोल्सोनारो और लूला — दोनों ही इस आँकड़े से कम रहे, जिससे रन-ऑफ अपरिहार्य हो गया। चुनाव प्रचार के दौरान ओपिनियन पोल में लूला को मामूली बढ़त मिल रही थी, लेकिन बोल्सोनारो का प्रदर्शन अनुमान से काफी बेहतर रहा।
फ्लावियो बोल्सोनारो कौन हैं
फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र हैं। गौरतलब है कि जायर बोल्सोनारो 2022 के चुनाव परिणाम को सैन्य तख्तापलट के ज़रिये पलटने की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद 27 वर्ष की जेल की सज़ा काट रहे हैं। अपने पिता की विरासत और दक्षिणपंथी समर्थक आधार को भुनाते हुए फ्लावियो ने पहले दौर में उम्मीद से कहीं मज़बूत प्रदर्शन किया है।
दूसरे दौर की रणनीति और गठबंधन
पहले दौर के नतीजे फ्लावियो बोल्सोनारो के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकते हैं। दूसरे दौर में जगह नहीं बना पाने वाले कई उम्मीदवार दक्षिणपंथी खेमे से थे। यदि बोल्सोनारो इन उम्मीदवारों के समर्थकों को अपने पक्ष में लाने में सफल रहते हैं, तो 25 अक्टूबर के मुकाबले में यह निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
दूसरी ओर, लूला के सामने दोहरी चुनौती है — अपने मौजूदा समर्थक आधार को बनाए रखना और पहले दौर में बाहर हो चुके वामपंथी व मध्यमार्गी उम्मीदवारों के वोटरों को अपनी ओर खींचना। उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य दक्षिणपंथ को ब्राजील की सत्ता में वापसी से रोकना होगा।
लैटिन अमेरिका पर असर
ब्राजील के इस चुनाव पर पूरे लैटिन अमेरिका की पैनी नज़र है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र के कई देशों में दक्षिणपंथी नेता राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए हैं, जिनमें से कई के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ घनिष्ठ राजनीतिक संबंध हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में वैचारिक ध्रुवीकरण गहरा हो रहा है।
आगे क्या होगा
25 अक्टूबर 2026 को होने वाला दूसरा दौर तय करेगा कि ब्राजील में लूला का वामपंथी नेतृत्व जारी रहेगा या लैटिन अमेरिका में बढ़ते दक्षिणपंथी रुझान के बीच देश की बागडोर फ्लावियो बोल्सोनारो के हाथों में जाएगी। अगले तीन हफ्तों में दोनों शिविर गठबंधन निर्माण और मतदाता संपर्क अभियान को तेज़ करेंगे।