ट्रंप के 'ब्राज़ील नहीं चलाता' बयान के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने छोड़ी चुनाव रद्द कराने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 27 अक्टूबर 2026 को दिए गए उस बयान के कुछ घंटों बाद जिसमें उन्होंने ब्राज़ील के चुनाव में हस्तक्षेप से इनकार किया, दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण का परिणाम रद्द कराने की अपनी माँग वापस ले ली। ब्राज़ील के राष्ट्रपति पद पर लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत को अब बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी (PL) ने भी स्वीकार कर लिया है।
ट्रंप का निर्णायक बयान
एयर फोर्स वन में सवार होने से पूर्व पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे ब्राज़ील के चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर कोई कदम उठाना चाहते हैं। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, 'मैं ब्राज़ील नहीं चला रहा हूँ, मैं अमेरिका चला रहा हूँ।' यह बयान बोल्सोनारो खेमे की उन उम्मीदों पर पानी फेर गया जो अमेरिकी समर्थन से ब्राज़ील के चुनाव नतीजे को चुनौती देने की योजना बना रहे थे।
हालाँकि ट्रंप ने चुनाव प्रक्रिया पर कुछ सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, 'उन्हें लूला पसंद हैं और उनके साथ उनके अच्छे संबंध हैं, लेकिन चुनाव का तरीका और मतगणना का स्वरूप ठीक नहीं लगा। मतदान का समय बढ़ाया जाना असामान्य था।' यह टिप्पणी सीधे हस्तक्षेप से इनकार के साथ जोड़कर देखी जा रही है।
बोल्सोनारो का रुख और लिबरल पार्टी का बयान
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के बयान के कुछ ही मिनट बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार स्वीकार कर ली। सोमवार शाम लिबरल पार्टी (PL) के अध्यक्ष वाल्देमार कोस्टा नेटो ने औपचारिक बयान जारी करते हुए कहा, 'सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) द्वारा घोषित राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को पार्टी स्वीकार करती है। हालाँकि, उठाए गए सवालों को संतुलित और लोकतांत्रिक राजनीतिक बहस के जरिए उचित तरीके से स्पष्ट किया जाना चाहिए।'
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में फ्लावियो बोल्सोनारो ने स्पष्ट रूप से हार स्वीकार नहीं की, परंतु कहा, 'मैं संसद से विपक्ष का नेतृत्व करूंगा।' उन्होंने 'अराजकता का मुकाबला करने के लिए विपक्ष को संगठित' करने का भी संकल्प जताया और चैंबर ऑफ डेप्युटीज तथा सीनेट को अपना मजबूत आधार बनाने की बात कही। उल्लेखनीय है कि चुनाव में दक्षिणपंथी खेमे को संसद में बहुमत मिला है।
मतदान समय विवाद की पृष्ठभूमि
रविवार रात बोल्सोनारो ने सुप्रीम फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन के उस फैसले का हवाला देते हुए चुनाव परिणाम रद्द करने की माँग की थी, जिसके तहत मतदान का समय बढ़ाया गया था। हालाँकि, गौरतलब है कि मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध मूल रूप से लूला की वर्कर्स पार्टी ने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुँचाने के लिए परिवहन की कमी की शिकायत करते हुए किया था। बाद में बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी भी उसी अनुरोध में शामिल हो गई थी — एक तथ्य जो उनकी आपत्ति को कमज़ोर करता है।
चुनाव परिणाम: मतों का अंतर
चुनाव के दूसरे चरण में लूला दा सिल्वा को करीब 6.4 करोड़ वोट (लगभग 51 प्रतिशत) मिले, जबकि बोल्सोनारो को लगभग 5.9 करोड़ वोट (करीब 48 प्रतिशत) प्राप्त हुए। यह ऐसे समय में आया है जब ब्राज़ील की राजनीति गहरे ध्रुवीकरण की गवाह है और दक्षिणपंथी खेमे ने संसद में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है।
बोल्सोनारो ने यह भी कहा कि उनका चुनावी अभियान लूला के चुनावी गठबंधन को आर्थिक शक्ति के दुरुपयोग के आरोप में अयोग्य ठहराने की माँग जारी रखेगा। उन्होंने टिप्पणी की, 'हार मेरी नहीं हुई, लेकिन व्यवस्था जीत गई।'
ट्रंप के अन्य बयान
इस बीच ट्रंप ने इज़रायल के चुनाव में दो बार समर्थन जताने के अपने फैसले का बचाव भी किया। उन्होंने कहा, 'नहीं, मैंने इस बारे में कभी बात नहीं की। मैंने दोनों के समर्थन में बयान दिया था।' उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अच्छा काम किया है।
ट्रंप ने 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले मतदाता धोखाधड़ी की सूचना देने वालों के लिए 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा भी की। यह इनाम ऐसे मामलों में दिया जाएगा जिनके परिणामस्वरूप गिरफ्तारी और दोषसिद्धि हो। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि बोल्सोनारो का विपक्षी गठबंधन ब्राज़ील की संसद में लूला सरकार को किस तरह चुनौती देता है।