CGTN सर्वेक्षण: 39 देशों में 75% लोगों ने अमेरिका को 'अत्याचारी' बताया, राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल
सारांश
मुख्य बातें
चीन की सरकारी मीडिया संस्था CGTN और रेनमिन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन स्टडीज इन द न्यू एरा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वैश्विक सर्वेक्षण में 39 देशों के 12,302 उत्तरदाताओं ने अमेरिका की राष्ट्रीय छवि के बारे में अपनी राय साझा की। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि को लेकर गंभीर नकारात्मक धारणाएँ सामने आई हैं — हालाँकि इस सर्वेक्षण के स्रोत और उसकी स्वतंत्रता को लेकर विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
सर्वेक्षण की पद्धति
यह सर्वेक्षण ऑनलाइन पैनल-आधारित नमूनाकरण पद्धति से किया गया, जिसमें 18 से 65 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को शामिल किया गया। नमूने को आयु और लिंग के आधार पर प्रत्येक देश की जनगणना वितरण के अनुरूप भारित किया गया। इसमें ग्लोबल साउथ के देशों और प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधि मिश्रण शामिल था।
अमेरिका की समग्र छवि पर प्रमुख आँकड़े
सर्वेक्षण के अनुसार, 64.4% उत्तरदाताओं ने अमेरिका को एक भयावह देश बताया। इससे भी अधिक — 75.0% — ने इसे एक अत्याचारी देश की संज्ञा दी। ये आँकड़े, यदि स्वतंत्र रूप से सत्यापित हों, तो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नरम शक्ति (soft power) में उल्लेखनीय गिरावट का संकेत देते हैं।
अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था पर उत्तरदाताओं के विचार
राजनीतिक ढाँचे को लेकर भी सर्वेक्षण के निष्कर्ष उल्लेखनीय हैं। 72.1% उत्तरदाताओं का मानना था कि दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच प्रतिद्वंद्विता ने अमेरिका में सामाजिक विभाजन को और गहरा किया है। 67.5% का मत था कि पक्षपातपूर्ण संघर्ष अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था की एक मूलभूत खामी बन चुका है।
इसके अलावा, 64.4% उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिकी न्यायपालिका पक्षपातपूर्ण राजनीतिक संघर्ष का एक उपकरण बन गई है। वहीं 71.7% ने यह राय जताई कि अमेरिकी चुनावों में धन का प्रभाव अत्यधिक हो गया है, जिससे राजनीतिक व्यवस्था की निष्पक्षता कमज़ोर हो रही है।
सर्वेक्षण की विश्वसनीयता पर संदर्भ
गौरतलब है कि यह सर्वेक्षण CGTN द्वारा आयोजित किया गया है, जो चीन की सरकारी मीडिया का अंतरराष्ट्रीय चैनल है। मीडिया विश्लेषकों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं का कहना है कि सरकार-प्रायोजित सर्वेक्षणों की पद्धति और उनके निष्कर्षों की व्याख्या को स्वतंत्र सत्यापन की कसौटी पर परखना आवश्यक है। यह सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव चरम पर है।
आगे का परिप्रेक्ष्य
वैश्विक जनमत पर इस तरह के सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, चाहे उनके स्रोत कुछ भी हों। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की वैश्विक छवि को लेकर यह बहस आने वाले समय में और तेज़ होने की संभावना है — विशेषकर जब 2026 में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की तैयारी शुरू होगी।