संयुक्त राष्ट्र में चीन का आह्वान: AI, ड्रोन और इंटरनेट के आतंकी दुरुपयोग पर लगे अंकुश
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधिमंडल के अंतरिम चार्ज द'अफेयर सुन लेई ने 5 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद विरोधी सार्वजनिक बैठक में कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों — जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन और इंटरनेट शामिल हैं — के आतंकवादी दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाना अब वैश्विक प्राथमिकता बन चुकी है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि हिंसक आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक अतिवाद — इन 'तीन ताकतों' को नई तकनीकों के माध्यम से फैलने से रोकने के लिए ठोस और समन्वित कदम उठाए जाएँ।
मुख्य घटनाक्रम
सुन लेई ने बैठक में स्पष्ट किया कि आतंकवादी संगठन अब इंटरनेट, AI, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रचार-प्रसार, भर्ती, वित्तपोषण और हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। उनके अनुसार, इससे आतंकवाद विरोधी प्रयासों के सामने नई और जटिल चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं जिनसे पारंपरिक तरीकों से नहीं निपटा जा सकता।
उन्होंने कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के उन प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है जो उभरती प्रौद्योगिकियों के नियमन को सुदृढ़ करने, जोखिमों का बेहतर आकलन करने और प्रभावी नियामक व्यवस्था विकसित करने पर केंद्रित हैं।
चीन की स्थिति और प्रस्ताव
सुन लेई ने रेखांकित किया कि वैश्विक आतंकवाद की स्थिति अब भी जटिल और गंभीर बनी हुई है। उन्होंने सभी देशों से 'साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और टिकाऊ सुरक्षा' की अवधारणा अपनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता बनाए रखने और आतंकवाद विरोधी मुद्दों का राजनीतिकरण या दुरुपयोग करने से बचने का आग्रह किया।
उनका कहना था कि केवल एकजुटता और सहयोग के जरिए ही वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों को वास्तव में प्रभावी बनाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई देश AI-संचालित निगरानी और ड्रोन तकनीक के दोहरे उपयोग को लेकर नीतिगत बहस में उलझे हुए हैं।
विकासशील देशों की क्षमता पर जोर
सुन लेई ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को विकासशील देशों की आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को मजबूत करने में सक्रिय सहयोग देना चाहिए। गौरतलब है कि साइबर और तकनीकी संसाधनों की असमान उपलब्धता के कारण कम विकसित देश आतंकी नेटवर्क के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं।
बहुपक्षीय मंचों पर चीन की भूमिका
चीन के प्रतिनिधि ने बताया कि चीन लगातार वैश्विक सुरक्षा पहल को आगे बढ़ा रहा है और संयुक्त राष्ट्र, शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) तथा ब्रिक्स (BRICS) सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों के अंतर्गत आतंकवाद विरोधी सहयोग में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन अपने अनुभव साझा करता रहेगा और सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक सामूहिक कार्रवाई के लिए तैयार है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, उभरती तकनीकों के आतंकी दुरुपयोग पर वैश्विक सहमति बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि विभिन्न देशों के बीच 'आतंकवाद' की परिभाषा और नियमन के दायरे को लेकर मतभेद हैं। बावजूद इसके, सुरक्षा परिषद में इस विषय पर खुली चर्चा को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में संयुक्त राष्ट्र स्तर पर तकनीक-आतंकवाद नियमन पर नई रूपरेखा तैयार होने की संभावना है।