जापान रक्षा नीति में एआई और ड्रोन तकनीक को प्राथमिकता देगा: PM ताकाइची का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 2 सितंबर 2026 को टोक्यो में सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (एसडीएफ) के शीर्ष सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि जापान अपनी रक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवरहित तकनीक को पहले से कहीं अधिक तेज़ी से शामिल करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन तकनीकों का विकास पारंपरिक सैन्य उपकरणों की तुलना में बिल्कुल अलग और तीव्र गति से हो रहा है, इसलिए रक्षा व्यवस्था में इनका समावेश अब और टाला नहीं जा सकता।
बैठक का महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ
यह बैठक इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि ताकाइची के अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह पहली बार हुई जब उन्होंने एसडीएफ की कमांडर-इन-चीफ के रूप में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से सीधे संवाद किया। यह बैठक मूलतः 1964 में शुरू हुई थी और सामान्यतः हर वर्ष आयोजित होती रही, लेकिन सितंबर 2019 के बाद इसकी नियमितता भंग हो गई थी। 2020 में कोरोना महामारी के दौरान इसे दूरस्थ माध्यम से आयोजित किया गया था। लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद यह बैठक ऐसे समय हुई है जब जापान अपनी रक्षा नीति की अगली दिशा निर्धारित करने की तैयारी में है।
रक्षा दस्तावेजों में संशोधन की तैयारी
ताकाइची ने बताया कि जापान इस वर्ष के अंत तक अपने तीन प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा दस्तावेजों में संशोधन करने की योजना बना रहा है। ये दस्तावेज मूलतः 2022 में तैयार किए गए थे और अगले करीब 10 वर्षों की रक्षा नीति को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। अब ताकाइची सरकार ने इनके संशोधन की समयसीमा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'संशोधित दस्तावेज जापान की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए एक नई दिशा तय करेंगे। इसके पीछे बदलता क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल है, जहाँ कई देश एआई को सैन्य प्रणालियों के साथ जोड़ने और बड़े पैमाने पर मानवरहित विमानों के इस्तेमाल की क्षमता विकसित करने में तेज़ी दिखा रहे हैं।'
पूर्वी एशिया का बदलता सुरक्षा परिदृश्य
इस नीतिगत बदलाव के पीछे पूर्वी एशिया में तेज़ी से बदलते सामरिक समीकरण हैं। जापान विशेष रूप से चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर गहरी चिंता में है। टोक्यो का मानना है कि युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है और केवल पारंपरिक लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों या अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना भविष्य में पर्याप्त नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने सहयोगी देशों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की माँग करता रहा है।
2022 की नीतिगत पारी से आगे का सफर
गौरतलब है कि 2022 में जापान ने अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 'काउंटरस्ट्राइक क्षमता' हासिल करने का निर्णय लिया था — जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अपनाई गई पारंपरिक रक्षात्मक सैन्य नीति से एक महत्वपूर्ण विचलन था। उसी समय जापान ने रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया था। अब एआई और मानवरहित सैन्य तकनीकों पर ज़ोर यह दर्शाता है कि जापान केवल अधिक हथियार खरीदने की नीति से आगे बढ़कर तकनीकी परिवर्तन के साथ अपनी सैन्य क्षमता को भी पुनर्परिभाषित करना चाहता है।
आगे क्या होगा
रक्षा मंत्रालय और एसडीएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ इस बैठक के बाद अब नज़रें इस वर्ष के अंत तक होने वाले उन संशोधनों पर टिकी हैं जो जापान की रक्षा नीति की अगले दशक की रूपरेखा तय करेंगे। एआई-सक्षम प्रणालियाँ, ड्रोन और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म भविष्य की जापानी सैन्य रणनीति की धुरी बन सकते हैं।