2 सितंबर 2026
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जापान रक्षा नीति में एआई और ड्रोन तकनीक को प्राथमिकता देगा: PM ताकाइची का बड़ा ऐलान

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जापान रक्षा नीति में एआई और ड्रोन तकनीक को प्राथमिकता देगा: PM ताकाइची का बड़ा ऐलान

सारांश

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एसडीएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ सात साल बाद हुई अहम बैठक में एआई और ड्रोन तकनीक को रक्षा नीति की धुरी बनाने का संकल्प दोहराया। पूर्वी एशिया के बदलते सामरिक समीकरणों के बीच जापान इस वर्ष के अंत तक अपने तीन प्रमुख रक्षा दस्तावेज़ों में संशोधन करने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 2 सितंबर 2026 को टोक्यो में एसडीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा क्षेत्र में एआई और मानवरहित तकनीक को तेज़ी से अपनाने का आह्वान किया।
जापान 2026 के अंत तक अपने तीन प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा दस्तावेज़ों में संशोधन करने की योजना बना रहा है, जो मूलतः 2022 में तैयार किए गए थे।
यह बैठक 1964 में शुरू हुई परंपरा का हिस्सा है, लेकिन सितंबर 2019 के बाद अनियमित रही थी — लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद पुनः आयोजित हुई।
जापान ने 2022 में 'काउंटरस्ट्राइक क्षमता' अपनाने और रक्षा खर्च को जीडीपी के 2% तक ले जाने का लक्ष्य तय किया था।
चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु-मिसाइल कार्यक्रम को जापान की नई रक्षा प्राथमिकताओं का मुख्य कारण बताया गया है।

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 2 सितंबर 2026 को टोक्यो में सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (एसडीएफ) के शीर्ष सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि जापान अपनी रक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवरहित तकनीक को पहले से कहीं अधिक तेज़ी से शामिल करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन तकनीकों का विकास पारंपरिक सैन्य उपकरणों की तुलना में बिल्कुल अलग और तीव्र गति से हो रहा है, इसलिए रक्षा व्यवस्था में इनका समावेश अब और टाला नहीं जा सकता।

बैठक का महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

यह बैठक इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि ताकाइची के अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह पहली बार हुई जब उन्होंने एसडीएफ की कमांडर-इन-चीफ के रूप में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से सीधे संवाद किया। यह बैठक मूलतः 1964 में शुरू हुई थी और सामान्यतः हर वर्ष आयोजित होती रही, लेकिन सितंबर 2019 के बाद इसकी नियमितता भंग हो गई थी। 2020 में कोरोना महामारी के दौरान इसे दूरस्थ माध्यम से आयोजित किया गया था। लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद यह बैठक ऐसे समय हुई है जब जापान अपनी रक्षा नीति की अगली दिशा निर्धारित करने की तैयारी में है।

रक्षा दस्तावेजों में संशोधन की तैयारी

ताकाइची ने बताया कि जापान इस वर्ष के अंत तक अपने तीन प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा दस्तावेजों में संशोधन करने की योजना बना रहा है। ये दस्तावेज मूलतः 2022 में तैयार किए गए थे और अगले करीब 10 वर्षों की रक्षा नीति को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। अब ताकाइची सरकार ने इनके संशोधन की समयसीमा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'संशोधित दस्तावेज जापान की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए एक नई दिशा तय करेंगे। इसके पीछे बदलता क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल है, जहाँ कई देश एआई को सैन्य प्रणालियों के साथ जोड़ने और बड़े पैमाने पर मानवरहित विमानों के इस्तेमाल की क्षमता विकसित करने में तेज़ी दिखा रहे हैं।'

पूर्वी एशिया का बदलता सुरक्षा परिदृश्य

इस नीतिगत बदलाव के पीछे पूर्वी एशिया में तेज़ी से बदलते सामरिक समीकरण हैं। जापान विशेष रूप से चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर गहरी चिंता में है। टोक्यो का मानना है कि युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है और केवल पारंपरिक लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों या अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना भविष्य में पर्याप्त नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने सहयोगी देशों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की माँग करता रहा है।

2022 की नीतिगत पारी से आगे का सफर

गौरतलब है कि 2022 में जापान ने अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 'काउंटरस्ट्राइक क्षमता' हासिल करने का निर्णय लिया था — जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अपनाई गई पारंपरिक रक्षात्मक सैन्य नीति से एक महत्वपूर्ण विचलन था। उसी समय जापान ने रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया था। अब एआई और मानवरहित सैन्य तकनीकों पर ज़ोर यह दर्शाता है कि जापान केवल अधिक हथियार खरीदने की नीति से आगे बढ़कर तकनीकी परिवर्तन के साथ अपनी सैन्य क्षमता को भी पुनर्परिभाषित करना चाहता है।

आगे क्या होगा

रक्षा मंत्रालय और एसडीएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ इस बैठक के बाद अब नज़रें इस वर्ष के अंत तक होने वाले उन संशोधनों पर टिकी हैं जो जापान की रक्षा नीति की अगले दशक की रूपरेखा तय करेंगे। एआई-सक्षम प्रणालियाँ, ड्रोन और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म भविष्य की जापानी सैन्य रणनीति की धुरी बन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जापान रक्षा क्षेत्र में एआई और मानवरहित तकनीक क्यों अपनाना चाहता है?
जापान पूर्वी एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु-मिसाइल कार्यक्रम से उत्पन्न खतरों के मद्देनज़र एआई और मानवरहित तकनीक को रक्षा नीति में शामिल करना चाहता है। प्रधानमंत्री ताकाइची के अनुसार, इन तकनीकों का विकास पारंपरिक सैन्य उपकरणों की तुलना में कहीं तेज़ गति से हो रहा है और इन्हें अपनाने में देरी रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकती है।
जापान के तीन प्रमुख रक्षा दस्तावेज़ क्या हैं और इनमें संशोधन कब होगा?
ये तीन दस्तावेज़ — राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और दो अन्य प्रमुख रक्षा नीति दस्तावेज़ — 2022 में तैयार किए गए थे और अगले करीब 10 वर्षों की रक्षा दिशा तय करने के लिए बनाए गए थे। ताकाइची सरकार इन्हें 2026 के अंत तक संशोधित करने की योजना बना रही है।
PM ताकाइची के नेतृत्व में एसडीएफ अधिकारियों की यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बैठक अक्टूबर 2025 में ताकाइची के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार हुई, जिसमें उन्होंने कमांडर-इन-चीफ के रूप में शीर्ष सैन्य अधिकारियों को संबोधित किया। यह बैठक 1964 से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, लेकिन सितंबर 2019 के बाद से अनियमित रही थी — लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद इसका आयोजन हुआ।
जापान ने 2022 में अपनी रक्षा नीति में क्या बड़े बदलाव किए थे?
2022 में जापान ने 'काउंटरस्ट्राइक क्षमता' हासिल करने का निर्णय लिया था, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अपनाई गई पारंपरिक रक्षात्मक सैन्य नीति से एक ऐतिहासिक विचलन था। साथ ही रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी तय किया गया था।
अमेरिका का जापान की रक्षा नीति पर क्या दबाव है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने सहयोगी देशों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की माँग करता रहा है, और जापान भी इस दबाव से अछूता नहीं है। यह दबाव जापान के रक्षा खर्च बढ़ाने और तकनीकी क्षमता विकसित करने के निर्णयों को और गति दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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