तियानमेन स्क्वायर की 37वीं बरसी: चीन में इमोजी और संख्याएँ भी सेंसर, डिजिटल निगरानी चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
चीन में तियानमेन स्क्वायर दमन की 37वीं बरसी पर 4 जून 2026 को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप अभूतपूर्व स्तर तक पहुँच गई, जहाँ केवल राजनीतिक सामग्री ही नहीं, बल्कि इमोजी, मोमबत्ती के चित्र और विशेष संख्याएँ तक ब्लॉक कर दी गईं। रिपोर्टों के अनुसार, कई उपयोगकर्ताओं के सोशल मीडिया खाते अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए या उनके फीचर्स बंद कर दिए गए।
क्या-क्या हुआ ब्लॉक
रिपोर्टों के अनुसार, 4 जून की तारीख से जुड़े प्रतीकात्मक संकेत — जिनमें मोमबत्ती इमोजी, विशेष संख्याएँ, और स्मरण से जुड़े चित्र शामिल हैं — सभी को स्वचालित रूप से हटाया गया। ये वही प्रतीक हैं जिन्हें चीनी नागरिक पारंपरिक रूप से ऑनलाइन श्रद्धांजलि और मौन विरोध के लिए इस्तेमाल करते आए हैं।
युगांडा के मीडिया आउटलेट पीएमएल डेली की रिपोर्ट के अनुसार, '4 जून को चीन में ऑनलाइन सेंसरशिप में अचानक तेजी देखी गई। कई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि उनके खातों पर रोक लगाई गई या सोशल मीडिया के कई फीचर्स अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।'
एल्गोरिद्म आधारित निगरानी तंत्र
विशेषज्ञों और पूर्व प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के हवाले से बताया गया है कि चीन का एल्गोरिद्म-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगातार और अधिक परिष्कृत होता जा रहा है। यह प्रणाली संदर्भ की परवाह किए बिना किसी भी संभावित संवेदनशील सामग्री को स्वतः ब्लॉक कर देती है।
गौरतलब है कि यह सेंसरशिप केवल स्पष्ट राजनीतिक सामग्री तक सीमित नहीं रही — सामान्य शब्द, संख्याएँ और प्रतीक भी इसकी जद में आए। आलोचकों का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की सामूहिक स्मृति या प्रतीकात्मक विरोध को पूरी तरह समाप्त करना है।
तियानमेन: एक संवेदनशील इतिहास
1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई थी। तब से यह घटना चीन में सार्वजनिक चर्चा से लगभग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की डिजिटल नीतियों पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
हर वर्ष बरसी के अवसर पर डिजिटल प्रतिबंध कड़े किए जाते हैं, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष की निगरानी पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और स्वचालित थी।
डिजिटल अधिकारों पर असर
मानवाधिकार और डिजिटल स्वतंत्रता से जुड़े विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अब हर समय इस जोखिम के साथ ऑनलाइन रहना पड़ता है कि उनका कंटेंट हटाया जा सकता है या उनका खाता अचानक निलंबित किया जा सकता है।
आगे की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चीन की एआई-आधारित निगरानी तकनीक और परिपक्व होगी, इस तरह की स्वचालित सेंसरशिप और अधिक व्यापक होती जाएगी। अंतरराष्ट्रीय डिजिटल अधिकार संगठन इस पर नज़र बनाए हुए हैं और कथित तौर पर दस्तावेज़ीकरण जारी है।