चीन-यूनेस्को रणनीतिक सहयोग ज्ञापन 2026–2029: शिक्षा, AI और विश्व धरोहर पर साझेदारी
सारांश
मुख्य बातें
चीन और यूनेस्को ने 13 मई 2026 को रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण ज्ञापन संपन्न किया, जो शिक्षा के डिजिटल रूपांतरण से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विश्व धरोहर संरक्षण तक के क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच व्यावहारिक सहयोग की रूपरेखा तय करता है। पाँच खंडों वाला यह ज्ञापन 2026 से 2029 तक की अवधि को कवर करता है और यूनेस्को की वैश्विक प्राथमिकताओं के साथ चीन की बहुपक्षीय पहलों को जोड़ने का प्रयास करता है।
ज्ञापन की मुख्य विषयवस्तु
पाँच खंडों वाले इस ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि दोनों पक्ष राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तुत वैश्विक विकास पहल, वैश्विक सुरक्षा पहल, वैश्विक सभ्यता पहल और वैश्विक शासन पहल के कार्यान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाएँगे। इसके साथ ही, सभ्यताओं के बीच संवाद, पारस्परिक शिक्षा और मानव जाति के साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण को गति देने पर भी जोर दिया गया है।
यूनेस्को की प्राथमिकताओं से तालमेल
ज्ञापन में 2026–2029 की अवधि के लिए यूनेस्को की दो समग्र प्राथमिकताओं — 'अफ्रीका' और 'लैंगिक समानता' — तथा दो प्राथमिकता समूहों — 'युवा' और 'छोटे द्वीपीय विकासशील देश' — में सहयोग के मुख्य क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूनेस्को वैश्विक दक्षिण के देशों में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
दोनों पक्षों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है:
शिक्षा: डिजिटल रूपांतरण, एसटीईएम शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: मौलिक विज्ञान अनुसंधान, खुला विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैश्विक प्रौद्योगिकी संचालन सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख वैज्ञानिक योजनाएँ। संस्कृति एवं विरासत: विश्व धरोहर, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता संरक्षण, विश्व स्मृति कार्यक्रम और मीडिया साक्षरता।
चीनी ट्रस्ट फंड समझौता
ज्ञापन के साथ-साथ दोनों पक्षों ने अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 'विश्व धरोहर संधि' के कार्यान्वयन की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए एक अलग चीनी ट्रस्ट फंड समझौता भी संपन्न किया। गौरतलब है कि यह फंड उन देशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के लिए बनाया गया है जो अपनी विश्व धरोहर स्थलों के प्रबंधन में संसाधनों की कमी का सामना करते हैं।
आगे की राह
इस ज्ञापन के क्रियान्वयन से अगले चार वर्षों में शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में चीन-यूनेस्को सहयोग को नई ऊँचाई मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, AI और डिजिटल शिक्षा जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी वैश्विक मानक-निर्धारण में चीन की भूमिका को और प्रभावशाली बना सकती है।