कोविड-19 की उत्पत्ति: चीन के असहयोग से सच्चाई तक पहुँचना मुश्किल, अमेरिकी रिपोर्ट में बड़े सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर जारी वैश्विक बहस में एक नई रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि चीन के असहयोग के कारण अमेरिका के लिए यह निर्धारित करना अत्यंत कठिन हो गया है कि कोरोना वायरस वुहान की लैब में तैयार किया गया था या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ने महामारी की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय जाँच प्रक्रियाओं में व्यवस्थित रूप से बाधाएँ खड़ी कीं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी कांग्रेस में कोविड-19 की उत्पत्ति की जाँच को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया
नेशनल रिव्यू में जियानली यांग के लेख के अनुसार, अब समय आ गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को 'फिफ्थ अमेंडमेंट का सहारा लेने' की अनुमति देना बंद किया जाए। लेख में तर्क दिया गया है कि अमेरिकी संविधान का फिफ्थ अमेंडमेंट मूलतः नागरिकों को आत्म-अभियोग से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन कथित तौर पर बीजिंग ने इसे अपनी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा बना लिया है।
लेख में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसियों ने संबंधित अनुसंधान को फंड किया या उसमें सहयोग किया — यह तय करना काफी हद तक अमेरिका के अपने अधिकार क्षेत्र में है।
चीन पर लगाए गए आरोप
रिपोर्ट में विस्तार से आरोप लगाए गए हैं कि चीनी सरकार ने महामारी की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सहयोग की भावना और दायित्वों का उल्लंघन किया। आलोचकों का कहना है कि अधिकारियों ने महामारी के बारे में चेतावनी देने वाले डॉक्टरों को दबाया, पत्रकारों की आवाज़ रोकी, वैज्ञानिकों पर सेंसरशिप लगाई, शुरुआती आँकड़ों तक पहुँच सीमित की, महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तक स्वतंत्र पहुँच देने से इनकार किया, ऑनलाइन डेटाबेस हटाए और जाँच की हर प्रक्रिया को नियंत्रित किया।
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी की उत्पत्ति का पता लगाने की हर गंभीर कोशिश को बीजिंग द्वारा खड़ी की गई राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा।
अमेरिकी कांग्रेस में जाँच की माँग
लेख में कहा गया है कि यदि अमेरिकी कांग्रेस वास्तव में कोविड-19 की उत्पत्ति की जाँच को आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID), ईकोहेल्थ एलायंस और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) के बीच संबंधों की व्यापक और विश्वसनीय जाँच करानी चाहिए। लेखक का मानना है कि ऐसी जाँच न केवल अमेरिका की जवाबदेही स्पष्ट करेगी, बल्कि महामारी के वास्तविक स्रोत से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य भी सामने ला सकती है।
यांग ने यह भी सवाल उठाया कि असली रहस्य यह नहीं है कि चीन ने जाँच में बाधा डाली — क्योंकि यह बात स्पष्ट है — बल्कि यह है कि दुनिया के कई देशों ने अंततः इस बाधा को क्यों स्वीकार कर लिया।
फाउची और सीनेट सुनवाई का विवाद
गौरतलब है कि अमेरिका के पूर्व शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने सीनेट समिति के समक्ष आत्म-अभियोग से बचाव के अपने संवैधानिक अधिकार — फिफ्थ अमेंडमेंट — का बार-बार इस्तेमाल किया था। सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसदों ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में अमेरिकी फंडिंग से जुड़े कोरोना वायरस अनुसंधान और कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर तीखे सवाल उठाए।
सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर्स कमेटी की पिछले महीने हुई सुनवाई में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। समिति के अध्यक्ष रैंड पॉल ने फाउची पर वुहान में 'खतरनाक गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च' को फंडिंग देने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया और संकेत दिया कि सवालों के जवाब देने से इनकार पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
आगे की राह
यांग के अनुसार, अमेरिका को एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और वैज्ञानिक अभियान का नेतृत्व करना चाहिए, ताकि चीन पर वास्तविक सहयोग के लिए दबाव बनाया जा सके। उन्होंने लिखा कि 'पिछली एक सदी की सबसे बड़ी महामारी के पीड़ित केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सच्चाई के हकदार हैं।' यह बहस आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों और वैश्विक महामारी-तैयारी नीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।