तुलसी गबार्ड ने बायोलैब्स के वर्गीकृत दस्तावेज किए जारी, फौसी पर खुफिया आकलन प्रभावित करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने 19 जून को अमेरिकी-वित्त पोषित जैविक प्रयोगशालाओं (बायोलैब्स) से जुड़े पहले से वर्गीकृत दस्तावेज सार्वजनिक किए। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय एलर्जी एवं संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक डॉ. एंथनी फौसी ने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति से जुड़े खुफिया आकलन को प्रभावित किया — और बाद में अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के समक्ष शपथ लेकर ऐसे किसी संपर्क से इनकार किया था।
दस्तावेजों में क्या है
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ओडीएनआई) द्वारा जारी इन दस्तावेजों में जुलाई 2021 के खुफिया समुदाय के आंतरिक ईमेल शामिल हैं। इनमें कहा गया है कि अधिकारी फौसी के सुझावों पर आगे बढ़ना चाहते थे, क्योंकि उन्हें 'एक विषय-विशेषज्ञ (SME) के रूप में देखा जाता था, जिनके पास मौजूदा और ऐतिहासिक शोध की व्यापक जानकारी है।' दस्तावेजों के अनुसार, फौसी ने खुफिया एजेंसियों को विशेषज्ञों के नाम सुझाए और ऐसे आकलन तैयार करने में भूमिका निभाई जिन्हें बाद में 'वैज्ञानिक सहमति' के रूप में प्रस्तुत किया गया।
ओडीएनआई के अनुसार, मई 2020 में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी द्वारा तैयार एक आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि वुहान में 'प्रयोगशाला में संशोधित कोरोनावायरस के गलती से फैलने' के लिए परिस्थितियाँ मौजूद थीं। उस आकलन में प्रयोगशाला और प्राकृतिक उत्पत्ति दोनों परिकल्पनाओं को समान महत्व दिया गया था।
गबार्ड के आरोप
गबार्ड ने कहा, 'कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा। सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं।'
उन्होंने आरोप लगाया कि फौसी जैसे 'राजनीतिक स्वार्थी नेताओं' ने खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, संसद से असत्य बोला और निर्वाचित राष्ट्रपति की आवश्यक सूचनाओं तक पहुँच सीमित की। गबार्ड ने स्पष्ट किया कि इनमें से कई शिकायतें आगे की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल के पास भेजी जा चुकी हैं।
विश्लेषकों पर दबाव के आरोप
ओडीएनआई की इस रिलीज में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों की गवाही भी शामिल है। इन अधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक परिकल्पना का समर्थन किया, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी, हाशिये पर धकेल दिया गया या अलग राय रखने से रोका गया। कथित तौर पर वायरस की उत्पत्ति पर आधिकारिक आकलनों पर सवाल उठाने के कारण इन अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई।
फौसी का पक्ष और पूर्व गवाही
उल्लेखनीय है कि 2024 में कोरोनावायरस महामारी पर हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के समक्ष दी गई गवाही में फौसी ने वायरल रिसर्च के विषय में खुफिया एजेंसियों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार किया था। अब जारी दस्तावेजों में उसी दौर के आंतरिक पत्राचार को संदर्भित किया गया है जो कथित तौर पर उनके उस बयान से मेल नहीं खाते।
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत महामारी की उत्पत्ति की पुनः समीक्षा और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों की भूमिका की जाँच की जा रही है। ओडीएनआई ने बताया कि ट्रंप के पारदर्शिता संबंधी निर्देश के तहत एक वर्ष तक चली समीक्षा प्रक्रिया के बाद ये दस्तावेज सार्वजनिक किए गए।
आगे क्या होगा
अमेरिकी खुफिया समुदाय कोविड-19 की उत्पत्ति पर लंबे समय से विभाजित रहा है — कुछ एजेंसियाँ प्राकृतिक प्रसार को अधिक संभावित मानती हैं, जबकि अन्य प्रयोगशाला से जुड़ी घटना को। इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद फौसी और उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंस्पेक्टर जनरल की जाँच के नतीजे इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।