पाकिस्तान बनाएगा 'वापडा सिक्योरिटी फोर्स', सीपीईसी हमलों के बाद चीनी कर्मचारियों की सुरक्षा को नया कानून
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान सरकार ने वापडा सिक्योरिटी फोर्स एक्ट, 2026 के माध्यम से एक नई समर्पित सुरक्षा बल गठित करने की तैयारी कर ली है, जिसका मसौदा पहले ही संसद को भेजा जा चुका है। यह निर्णय दासू हाइड्रोपावर परियोजना पर नवंबर 2021 और मार्च 2024 में हुए दो आतंकवादी हमलों के बाद लिया गया, जिनमें कई चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की जान गई थी। प्रस्तावित कानून में इस बल के अधिकारियों और कर्मचारियों को मुकदमे से विशेष छूट देने का प्रावधान भी शामिल है, जो नागरिक अधिकार समूहों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
वापडा सिक्योरिटी फोर्स: उद्देश्य और संरचना
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, जल एवं विद्युत विकास प्राधिकरण (वापडा) द्वारा प्रबंधित महत्वपूर्ण अवसंरचना — जिसमें बांध, बिजलीघर, मशीनरी, उपकरण, कार्यालय और कर्मचारी आवास शामिल हैं — की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस बल का प्राथमिक उद्देश्य होगा। बल का नेतृत्व एक महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) के हाथों में होगा, जो संभवतः सशस्त्र बलों से नियुक्त किए जाएंगे। सर्वोच्च निगरानी संघीय सरकार के पास रहेगी, जबकि नियंत्रण वापडा के अधीन होगा।
दासू हमले: वह घटनाक्रम जिसने नीति बदल दी
$6 अरब डॉलर से अधिक लागत वाली दासू हाइड्रोपावर परियोजना, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का एक प्रमुख रणनीतिक हिस्सा है। इस परियोजना पर हुए हमलों के बाद चीनी पक्ष ने एक वर्ष से अधिक समय तक काम रोक दिया था। उच्च स्तरीय सरकारी वार्ता और मुआवजे के भुगतान के बाद काम पुनः शुरू हुआ, लेकिन इससे परियोजना की लागत बढ़ गई और समयसीमा प्रभावित हुई। गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान सेना की दो विशेष सुरक्षा डिवीजनें — उत्तर और दक्षिण — बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में सीपीईसी परियोजनाओं को सुरक्षा देती थीं, लेकिन वापडा परियोजनाएं उस दायरे से बाहर थीं।
प्रधानमंत्री शहबाज का निर्देश और विस्तारित सुरक्षा घेरा
चीनी पक्ष के साथ परामर्श के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्देश दिया कि सीपीईसी स्तर की सुरक्षा व्यवस्था सभी परियोजनाओं — विशेष रूप से चीनी नागरिकों से संबंधित और राष्ट्रीय महत्व की जल क्षेत्र परियोजनाओं — को उपलब्ध कराई जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन को बताया कि मौजूदा व्यवस्था में पाकिस्तान सेना बाहरी सुरक्षा घेरा देती थी, जबकि वापडा की आंतरिक सुरक्षा, स्थानीय पुलिस और रेंजर्स या फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी भी इसमें शामिल रहते थे। उन्होंने कहा कि इसलिए एक विशेष और एकीकृत व्यवस्था की आवश्यकता थी।
मुकदमे से छूट: कानूनी प्रावधान और चिंताएं
मसौदा कानून में एक विवादास्पद प्रावधान यह है कि औद्योगिक संबंध अधिनियम, 2012 और औद्योगिक एवं वाणिज्यिक रोजगार (स्थायी आदेश) अध्यादेश, 1968 इस बल के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर लागू नहीं होंगे। इससे भी अधिक उल्लेखनीय यह है कि मसौदे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकार, वापडा, महानिदेशक, बल के किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई मुकदमा, अभियोजन या अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान जवाबदेही के सिद्धांत को कमजोर करता है।
सीपीईसी और बलूचिस्तान: पृष्ठभूमि
बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के तहत बनाई गई सीपीईसी परियोजना चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ती है। यह परियोजना अरबों डॉलर के निवेश के साथ पाकिस्तान की आर्थिक उम्मीदों का केंद्र रही है। हालांकि बलूच समुदाय के एक वर्ग ने इसका कड़ा विरोध किया है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में चीनी और पाकिस्तानी कर्मचारी बार-बार हमलों के निशाने पर रहे हैं। इन हमलों के चलते कई विदेशी निवेशकों ने अपनी भागीदारी सीमित कर ली, जिससे पाकिस्तान की आर्थिक योजनाओं को गहरा झटका लगा।
आगे क्या होगा
वापडा सिक्योरिटी फोर्स की संख्या और तैनाती समय-समय पर सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार तय की जाएगी। सरकारी राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद यह बल अधिसूचित क्षेत्रों को अतिक्रमण और अवैध प्रवेश से सुरक्षित रखेगा, तथा अन्य कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय भी करेगा। संसद में इस विधेयक पर बहस और उसके पारित होने की प्रक्रिया से यह तय होगा कि मुकदमे से छूट जैसे विवादास्पद प्रावधान अंतिम कानून में बने रहते हैं या नहीं।