प्लांट-बेस्ड दूध-दही डेयरी का विकल्प नहीं: लैंसेट अध्ययन में आयोडीन-कैल्शियम की कमी की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, डेयरी उत्पादों की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्पों का सेवन करने से शरीर में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी2) जैसे ज़रूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की गंभीर कमी हो सकती है। यह शोध 5 नवंबर 2026 को सामने आया है और वैश्विक स्तर पर तेज़ी से बढ़ रही वीगन जीवनशैली पर सवाल खड़े करता है।
अध्ययन की पद्धति और दायरा
इस शोध में ब्रिटेन के बाज़ार में उपलब्ध 289 प्लांट-बेस्ड उत्पादों का विश्लेषण किया गया। इनमें 146 प्लांट-बेस्ड दूध, 76 दही और 67 पनीर के विकल्प शामिल थे — जो बादाम, सोया, ओट्स और अन्य वनस्पति आधारित स्रोतों से तैयार किए जाते हैं।
शोधकर्ताओं ने इन उत्पादों में चार प्रमुख पोषक तत्वों — आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और राइबोफ्लेविन — की उपस्थिति और मात्रा का आकलन किया। नतीजे चौंकाने वाले रहे।
पोषक तत्वों की स्थिति: क्या मिला अध्ययन में
अध्ययन के अनुसार, जाँचे गए उत्पादों में केवल 12 प्रतिशत में आयोडीन, 61 प्रतिशत में कैल्शियम, 46 प्रतिशत में विटामिन बी12 और 19 प्रतिशत में राइबोफ्लेविन को अतिरिक्त रूप से मिलाया गया था। यह आँकड़ा दर्शाता है कि अधिकांश प्लांट-बेस्ड विकल्प पोषण के मामले में डेयरी उत्पादों की बराबरी नहीं कर पाते।
गौरतलब है कि डेयरी दूध और दही इन पोषक तत्वों के स्वाभाविक स्रोत हैं, जबकि अधिकांश प्लांट-बेस्ड उत्पादों में इन्हें कृत्रिम रूप से जोड़ना पड़ता है — और वह भी हर उत्पाद में नहीं किया जाता।
किशोरियों और महिलाओं पर सबसे अधिक असर
अध्ययन के मुताबिक, यदि डेयरी उत्पादों की खपत में 20 से 35 प्रतिशत तक की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्प ले लें, तो 14 से 18 वर्ष की लड़कियों में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 54 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो सकता है। 19 से 49 वर्ष की महिलाओं में यही जोखिम 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।
यदि डेयरी उत्पादों को पूरी तरह प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदल दिया जाए, तो किशोरियों में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 80 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है — एक आँकड़ा जिसे शोधकर्ताओं ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बताया है।
कैल्शियम और विटामिन बी2 की कमी का जोखिम
कैल्शियम के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। पूर्ण प्रतिस्थापन की स्थिति में 14 से 18 वर्ष के लड़कों में कैल्शियम की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 30 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत और लड़कियों में 54 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो सकता है।
विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) की स्थिति भी उतनी ही चिंताजनक है। 19 से 49 वर्ष के पुरुषों में अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 14 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत और महिलाओं में 29 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि के सामान्य कामकाज और मस्तिष्क के विकास के लिए अनिवार्य है — विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान। कैल्शियम हड्डियों, दाँतों, मांसपेशियों के संकुचन और हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र और रक्त कोशिकाओं के लिए ज़रूरी है, जबकि राइबोफ्लेविन त्वचा, आँखों और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य में सहायक है।
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खानपान के साथ-साथ लोगों की पोषण संबंधी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने खाद्य उत्पादों में आवश्यक पोषक तत्वों को अनिवार्य रूप से मिलाने की नीति बनाने पर ज़ोर दिया है, ताकि प्लांट-बेस्ड विकल्प पोषण के लिहाज़ से वास्तव में डेयरी के समकक्ष बन सकें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सहित कई देशों में वीगन उत्पादों का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और नीतिगत दिशानिर्देश अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।