विश्व आयोडीन अल्पता दिवस 2026: आयोडीन युक्त नमक क्यों ज़रूरी, थायरॉइड से लेकर बच्चों के विकास तक असर
सारांश
मुख्य बातें
विश्व आयोडीन अल्पता दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है, जो इस बात की याद दिलाता है कि रोज़मर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाले नमक में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना कितना ज़रूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन की कमी थायरॉइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली को बाधित करती है और इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क विकास से लेकर वयस्कों की ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म तक पड़ सकता है।
आयोडीन क्यों है अनिवार्य पोषक तत्व
आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जिसकी शरीर को अपेक्षाकृत कम मात्रा में ज़रूरत होती है, लेकिन इसकी अनुपस्थिति में थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। ये थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया, शरीर का तापमान नियंत्रित करने और सामान्य शारीरिक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
जब शरीर में आयोडीन की कमी होती है, तो हाइपोथायरायडिज्म जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके लक्षणों में लगातार थकान, सुस्ती, अचानक वज़न बढ़ना, अत्यधिक ठंड लगना और एकाग्रता में कमी शामिल हैं।
घेंघा रोग और दीर्घकालिक प्रभाव
आयोडीन की कमी का एक प्रमुख परिणाम घेंघा रोग (गॉइटर) है। इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है और गर्दन के अगले हिस्से में सूजन स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकती है। यह केवल एक बाहरी लक्षण है — लंबे समय तक आयोडीन की कमी बनी रहने पर शरीर की समग्र कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि भारत में दशकों पहले घेंघा रोग बड़े पैमाने पर फैला था, जिसके बाद सरकार ने आयोडीन युक्त नमक की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। बावजूद इसके, ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में अभी भी गैर-आयोडीन युक्त नमक का उपयोग होने की रिपोर्टें आती हैं।
गर्भावस्था और शिशु विकास पर असर
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की ज़रूरत सबसे अधिक होती है, क्योंकि इस समय गर्भस्थ शिशु का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र विकसित हो रहा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में गंभीर आयोडीन की कमी शिशु की मानसिक और शारीरिक विकास क्षमता को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।
कुछ मामलों में गर्भपात, समय से पहले प्रसव और अन्य गंभीर जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों में भी आयोडीन की कमी सीखने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि इन समूहों पर पोषण संबंधी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
आयोडीन युक्त नमक: सरल समाधान, सटीक सावधानी
आयोडीन की कमी से बचाव का सबसे सुलभ उपाय आयोडीन युक्त नमक का नियमित उपयोग है। नमक खरीदते समय पैकेट पर 'आयोडीन युक्त' या 'iodised salt' का उल्लेख अवश्य जाँचें। नमक को नमी और अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए बंद और सूखे डिब्बे में रखें, ताकि उसमें मौजूद आयोडीन की गुणवत्ता बनी रहे।
हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि आयोडीन की ज़रूरत पूरी करने के लिए अत्यधिक नमक खाना हानिकारक हो सकता है। अत्यधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। इसके अलावा, बिना चिकित्सकीय परामर्श के आयोडीन सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है, क्योंकि अत्यधिक आयोडीन भी थायरॉइड को नुकसान पहुँचा सकता है।
आहार से भी मिल सकता है आयोडीन
दूध, दही, अंडे और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों में भी प्राकृतिक रूप से आयोडीन पाया जाता है, हालाँकि इसकी मात्रा खाद्य पदार्थ के प्रकार और उत्पादन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार और आयोडीन युक्त नमक के उचित उपयोग से शरीर की दैनिक आयोडीन आवश्यकता को स्वाभाविक रूप से पूरा किया जा सकता है।
21 अक्टूबर 2026 को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ आग्रह कर रहे हैं कि प्रत्येक परिवार अपनी रसोई में उपयोग होने वाले नमक की जाँच करे और सुनिश्चित करे कि वह वास्तव में आयोडीन युक्त है।