एयर इंडिया हादसों की याद: सेंट-गेरवाइस स्मारक पर भारतीय दूतावास ने दी श्रद्धांजलि, होमी भाभा को नमन
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने 24 अगस्त 2026 को मोंट ब्लांक के निद-डी'एगल में स्थित एयर इंडिया स्मारक पर 1950 और 1966 की दो विमान दुर्घटनाओं के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस स्मारक के डिजिटल उद्घाटन की सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया।
स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पण
उप मिशन प्रमुख (डीसीएम) ईनम गंभीर ने निद-डी'एगल स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाया और दोनों हादसों में जीवन खोने वाले यात्रियों को नमन किया। उन्होंने ले फाये कब्रिस्तान का भी दौरा किया, जहाँ पीड़ितों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी गई। 1966 की दुर्घटना विशेष रूप से भारत के लिए एक गहरी क्षति रही, क्योंकि इसमें भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक और अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा का भी निधन हो गया था।
मेयर से मुलाकात और सहयोग पर चर्चा
अपनी यात्रा के दौरान ईनम गंभीर ने सेंट-गेरवै-ले-बैं के मेयर जीन-मार्क पेइलेक्स से भेंट की। दोनों के बीच इस साझा स्मृति स्थल के दीर्घकालिक संरक्षण और भारत-फ्रांस जन-जन संबंधों को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। गंभीर ने स्मारक की देखभाल के लिए सेंट-गेरवै नगर पालिका का विशेष आभार व्यक्त किया।
दूतावास की एक्स पर पोस्ट
फ्रांस में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'स्मृति समारोह आयोजित करने के लिए मेयर जीन-मार्क पेइलेक्स और सेंट-गेरवै नगर पालिका के आभारी हैं। डीसीएम ने ले फाये कब्रिस्तान का भी दौरा किया और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।'
PM मोदी का 2019 में उद्घाटन और भाषण
इस स्मारक का डिजिटल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त 2019 को अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान किया था। उसी दिन पेरिस में भारतीय समुदाय के स्वागत समारोह में उन्होंने कहा था, 'इन हादसों में कई भारतीय यात्रियों की मृत्यु हुई थी। भारत के सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक डॉ. होमी जहांगीर भाभा उनमें से एक थे। मैं भारत के उस महान सपूत और इस हादसे में जान गंवाने वाले अन्य भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।'
मोदी ने यह भी कहा था, 'इस स्मारक का हर पत्थर एक-दूसरे के प्रति हमारे नागरिकों की संवेदनशीलता का प्रतीक है। हम सेंट-गेरवै के उन गाइडों को सलाम करते हैं जिन्होंने हादसे के बाद विमान के मलबे की खोज में मदद की।' उन्होंने उन गाइडों के परिवारों से संपर्क करने का अवसर मिलने पर आभार भी जताया था।
भारत-फ्रांस संबंधों में इस स्मारक का महत्त्व
यह स्मारक केवल एक दुखद इतिहास का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच साझा संवेदना और मैत्री का जीवंत प्रमाण है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के इस दौर में इस तरह के स्मृति-समारोह जन-जन के भावनात्मक जुड़ाव को मज़बूत करते हैं। आने वाले वर्षों में भी इस स्थल के संरक्षण और वार्षिक श्रद्धांजलि की परंपरा जारी रहने की उम्मीद है।