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कनिष्क विमान त्रासदी की 41वीं बरसी: नई दिल्ली में कनाडा-आयरलैंड ने 329 पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

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कनिष्क विमान त्रासदी की 41वीं बरसी: नई दिल्ली में कनाडा-आयरलैंड ने 329 पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

23 जून 1985 को अटलांटिक महासागर में हुई कनिष्क त्रासदी की 41वीं बरसी पर नई दिल्ली में कनाडा और आयरलैंड के राजनयिकों ने 329 पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। चार दशक बाद भी यह घाव ताज़ा है — और तीन देशों की साझा स्मृति इसे भुलाने नहीं देती।

मुख्य बातें

एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क) की 41वीं बरसी पर 23 जून 2025 को नई दिल्ली में स्मरण समारोह आयोजित हुआ।
कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और आयरलैंड के उप राजदूत रेमंड मुलन ने पीड़ित परिवारों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की।
23 जून 1985 को आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में 9,400 मीटर की ऊँचाई पर बम विस्फोट से विमान अटलांटिक में गिरा, 329 लोगों की मौत हुई।
मृतकों में 268 कनाडाई , 27 ब्रिटिश , 22 भारतीय और 10 अमेरिकी नागरिक शामिल थे।
इस वर्ष मार्च में पीड़ित परिवार के सदस्य महेश चंद्र शर्मा को ऑर्डर ऑफ कनाडा से सम्मानित किया गया।
कनाडा 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस के रूप में मनाता है।

एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क बम विस्फोट) की 41वीं बरसी पर 23 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित कनाडा हाउस में एक गंभीर स्मरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कनाडा और आयरलैंड के राजनयिक मिशनों ने 329 निर्दोष पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस हृदयविदारक अवसर पर पीड़ित परिवारों के साथ-साथ भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक समुदाय के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

स्मरण समारोह का आयोजन

कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और आयरलैंड के उप राजदूत रेमंड मुलन ने कार्यक्रम में पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। उपस्थित लोगों ने 2025 में स्थापित स्मारक वृक्ष के समीप पुष्पांजलि अर्पित की, दो मिनट का मौन रखा और श्रद्धांजलि पुस्तिका में अपने हस्ताक्षर किए।

राजनयिकों के संवेदना संदेश

उच्चायुक्त क्रिस कूटर ने कहा, '41 साल बाद भी यह घटना 329 निर्दोष लोगों की जान जाने की दर्दनाक याद दिलाती है। आतंकवाद किसी भी समाज में स्वीकार्य नहीं है, और कनाडा, भारत, आयरलैंड तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदार मिलकर शांति, सुरक्षा और न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

उप राजदूत रेमंड मुलन ने कहा, 'पीड़ित परिवारों ने चार दशक से अधिक समय तक इस दुख को साहस के साथ सहा है। आतंकवाद गहरे घाव छोड़ता है, लेकिन मानवता की भावना को समाप्त नहीं कर सकता।'

त्रासदी की पृष्ठभूमि

23 जून 1985 को एयर इंडिया फ्लाइट 182 मॉन्ट्रियल-लंदन-नई दिल्ली मार्ग पर उड़ान भर रही थी, जब आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में लगभग 9,400 मीटर की ऊँचाई पर बम विस्फोट के कारण विमान अटलांटिक महासागर में जा गिरा। इस भीषण हादसे में कुल 329 लोगों की मौत हुई, जिनमें 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश, 22 भारतीय, 10 अमेरिकी नागरिक और 2 अन्य — जिनकी राष्ट्रीयता उस समय स्पष्ट नहीं हो सकी थी — शामिल थे। यह अपने समय का सबसे घातक विमानन आतंकी हमला था।

स्मृति और सम्मान की परंपरा

गौरतलब है कि इस त्रासदी के बाद से कनाडा हर वर्ष 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस के रूप में मनाता है। वैंकूवर, टोरंटो, मॉन्ट्रियल और ओटावा सहित कनाडा के कई शहरों में स्थायी स्मारक स्थापित हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष मार्च में महेश चंद्र शर्मा — जिन्होंने इस त्रासदी में अपने परिवार को खो दिया था — को प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ कनाडा से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने परिवार की स्मृति में एक छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की है, जो पीड़ित परिवारों के अदम्य साहस का प्रतीक है।

आगे की राह

चार दशकों से अधिक समय बाद भी यह त्रासदी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी सहयोग और पीड़ित परिवारों के न्याय के संघर्ष की याद दिलाती है। भारत, कनाडा और आयरलैंड के बीच इस स्मरण की साझा परंपरा यह संकेत देती है कि तीनों देश इस दर्द को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी जाँच और न्याय प्रक्रिया दशकों तक विवादों में घिरी रही। चार दशक बाद भी इस समारोह का आयोजन यह दर्शाता है कि पीड़ित परिवारों का दर्द किसी राजनयिक सुविधा का मोहताज नहीं है। यह ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब भारत-कनाडा संबंध हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं — फिर भी इस साझा स्मृति ने दोनों देशों को एक मंच पर खड़ा किया। महेश चंद्र शर्मा जैसे पीड़ित परिवारों की सक्रियता यह याद दिलाती है कि न्याय और स्मृति की माँग राजनीतिक उतार-चढ़ाव से परे होती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनिष्क विमान हादसा क्या था?
23 जून 1985 को एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क) में बम विस्फोट हुआ, जिससे विमान आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में अटलांटिक महासागर में गिर गया और 329 लोगों की मौत हो गई। यह अपने समय का सबसे बड़ा विमानन आतंकी हमला था।
इस हादसे में कितने और किन देशों के नागरिक मारे गए?
329 मृतकों में 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश, 22 भारतीय, 10 अमेरिकी नागरिक और 2 अन्य शामिल थे जिनकी राष्ट्रीयता उस समय स्पष्ट नहीं हो सकी थी।
41वीं बरसी पर नई दिल्ली में क्या हुआ?
23 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित कनाडा हाउस में स्मरण समारोह आयोजित हुआ, जिसमें कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और आयरलैंड के उप राजदूत रेमंड मुलन ने पीड़ित परिवारों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखा।
कनाडा 23 जून को क्यों विशेष रूप से याद करता है?
कनाडा ने इस त्रासदी की याद में 23 जून को राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस घोषित किया है। वैंकूवर, टोरंटो, मॉन्ट्रियल और ओटावा में स्थायी स्मारक भी स्थापित हैं।
महेश चंद्र शर्मा को ऑर्डर ऑफ कनाडा क्यों मिला?
महेश चंद्र शर्मा ने कनिष्क त्रासदी में अपने परिवार को खोया था और इसके बाद से पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और स्मृति की लड़ाई लड़ते रहे। इस वर्ष मार्च में उन्हें उनके साहस और सामाजिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ कनाडा से सम्मानित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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