लेबनान संकट पर यूएनएससी की आपात बैठक, फ्रांस ने इजरायली सैन्य कार्रवाई को बताया अनुचित
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने 2 जून 2026 को लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष पर चर्चा के लिए आपात बैठक बुलाई, जो फ्रांस के औपचारिक अनुरोध पर आयोजित की गई। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य उपस्थिति को 'किसी भी दृष्टि से अनुचित' करार देते हुए तत्काल युद्धविराम की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो ने बीएफएमटीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, 'मैंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। हम इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार करते हैं, जैसा कि हर देश को है, लेकिन लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों की निरंतरता और लेबनानी क्षेत्र पर उसके बढ़ते कब्जे को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।' बारो ने ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली कब्जे पर विशेष चिंता जताई।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
लेबनान इस मध्य पूर्व युद्ध में 2 मार्च को तब शामिल हुआ, जब हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे। यह हमला 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के जवाब में किया गया था। 17 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई, लेकिन यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका — दोनों पक्ष प्रतिदिन एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं।
इजरायल की स्थिति और नई कार्रवाई
सप्ताहांत में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि लेबनान में और गहरी सैन्य कार्रवाई की जाएगी, और रविवार की कार्रवाई को उन्होंने अभियान में 'बड़ा बदलाव' बताया। सोमवार को नेतन्याहू और इजरायल काट्ज ने इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियेह में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया। नेतन्याहू के अनुसार हिज्बुल्लाह बार-बार संघर्षविराम नियमों का उल्लंघन कर इजरायली शहरों पर हमले कर रहा है।
अमेरिकी कूटनीतिक प्रयास
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू दोनों से अलग-अलग बातचीत की। रूबियो ने कूटनीतिक प्रक्रिया जारी रखने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समाधान के लिए पहले हिज्बुल्लाह को अपने हमले बंद करने होंगे।
आगे की राह
यूएनएससी की यह आपात बैठक ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। फ्रांस की पहल यह संकेत देती है कि यूरोपीय शक्तियाँ इस संघर्ष में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बैठक के नतीजों और किसी संभावित प्रस्ताव पर टिकी हैं।