17 जुलाई 2026
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लेबनान संकट पर यूएनएससी की आपात बैठक, फ्रांस ने इजरायली सैन्य कार्रवाई को बताया अनुचित

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लेबनान संकट पर यूएनएससी की आपात बैठक, फ्रांस ने इजरायली सैन्य कार्रवाई को बताया अनुचित

सारांश

फ्रांस ने यूएनएससी की आपात बैठक बुलवाई और इजरायली सैन्य अभियान को अनुचित ठहराया — लेकिन उसी दिन नेतन्याहू ने बेरूत के दहियेह पर हमले के आदेश दे दिए। संघर्षविराम कागज़ पर है, ज़मीन पर नहीं।

मुख्य बातें

यूएनएससी ने फ्रांस के अनुरोध पर लेबनान संकट पर आपात बैठक बुलाई।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों और विदेश मंत्री बारो ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य उपस्थिति को 'अनुचित' बताया।
17 अप्रैल से लागू संघर्षविराम कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका; दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाते हैं।
नेतन्याहू और काट्ज ने आईडीएफ को बेरूत के दहियेह उपनगर में हिज्बुल्लाह ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया।
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने लेबनानी राष्ट्रपति औन और नेतन्याहू से बातचीत की; पहले हिज्बुल्लाह के हमले रोकने की शर्त रखी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने 2 जून 2026 को लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष पर चर्चा के लिए आपात बैठक बुलाई, जो फ्रांस के औपचारिक अनुरोध पर आयोजित की गई। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य उपस्थिति को 'किसी भी दृष्टि से अनुचित' करार देते हुए तत्काल युद्धविराम की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो ने बीएफएमटीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, 'मैंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। हम इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार करते हैं, जैसा कि हर देश को है, लेकिन लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों की निरंतरता और लेबनानी क्षेत्र पर उसके बढ़ते कब्जे को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।' बारो ने ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली कब्जे पर विशेष चिंता जताई।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

लेबनान इस मध्य पूर्व युद्ध में 2 मार्च को तब शामिल हुआ, जब हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे। यह हमला 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के जवाब में किया गया था। 17 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई, लेकिन यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका — दोनों पक्ष प्रतिदिन एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं।

इजरायल की स्थिति और नई कार्रवाई

सप्ताहांत में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि लेबनान में और गहरी सैन्य कार्रवाई की जाएगी, और रविवार की कार्रवाई को उन्होंने अभियान में 'बड़ा बदलाव' बताया। सोमवार को नेतन्याहू और इजरायल काट्ज ने इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियेह में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया। नेतन्याहू के अनुसार हिज्बुल्लाह बार-बार संघर्षविराम नियमों का उल्लंघन कर इजरायली शहरों पर हमले कर रहा है।

अमेरिकी कूटनीतिक प्रयास

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू दोनों से अलग-अलग बातचीत की। रूबियो ने कूटनीतिक प्रक्रिया जारी रखने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समाधान के लिए पहले हिज्बुल्लाह को अपने हमले बंद करने होंगे।

आगे की राह

यूएनएससी की यह आपात बैठक ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। फ्रांस की पहल यह संकेत देती है कि यूरोपीय शक्तियाँ इस संघर्ष में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बैठक के नतीजों और किसी संभावित प्रस्ताव पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परिषद में अमेरिकी वीटो की छाया में इसके व्यावहारिक परिणाम सीमित रह सकते हैं। विरोधाभास यह है कि जिस दिन बैठक बुलाई गई, उसी दिन नेतन्याहू ने दहियेह पर हमले के आदेश दे दिए — जो दर्शाता है कि कूटनीति और सैन्य कार्रवाई समानांतर चल रही हैं। 17 अप्रैल का संघर्षविराम जिस तरह लागू नहीं हो सका, वह बताता है कि बिना किसी सत्यापन तंत्र के किसी भी नए समझौते की विश्वसनीयता संदिग्ध रहेगी। असली सवाल यह है कि क्या अमेरिका हिज्बुल्लाह और इजरायल दोनों पर एक साथ दबाव बनाने की इच्छाशक्ति दिखाएगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएससी की लेबनान पर आपात बैठक क्यों बुलाई गई?
यह बैठक फ्रांस के अनुरोध पर बुलाई गई, क्योंकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों और विदेश मंत्री बारो ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान की निरंतरता और लेबनानी क्षेत्र पर बढ़ते कब्जे को अनुचित बताया। बारो ने ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली कब्जे पर विशेष आपत्ति जताई।
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्षविराम कब हुआ था और वह क्यों विफल रहा?
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच 17 अप्रैल को संघर्षविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हो सका। दोनों पक्ष प्रतिदिन एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाते हैं और अपनी कार्रवाइयों को प्रतिक्रिया बताते हैं।
नेतन्याहू ने दहियेह पर हमले का आदेश क्यों दिया?
नेतन्याहू के अनुसार हिज्बुल्लाह बार-बार संघर्षविराम नियमों का उल्लंघन कर इजरायली शहरों पर हमले कर रहा है। उन्होंने और इजरायल काट्ज ने आईडीएफ को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियेह में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया और रविवार की कार्रवाई को अभियान में 'बड़ा बदलाव' बताया।
लेबनान इस मध्य पूर्व युद्ध में कब और कैसे शामिल हुआ?
लेबनान 2 मार्च को इस युद्ध में शामिल हुआ, जब हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे। यह हमला 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के जवाब में किया गया था।
अमेरिका इस संकट में क्या भूमिका निभा रहा है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू दोनों से बातचीत की। रूबियो ने कूटनीतिक प्रक्रिया जारी रखने की बात करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समाधान के लिए पहले हिज्बुल्लाह को अपने हमले बंद करने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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