गरीबाबादी का अमेरिका पर पलटवार: 'हमें टूटा बताते हैं, खुद सहयोगियों से माँग रहे मदद'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने 20 अगस्त को अमेरिका पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन ईरान को कमज़ोर बताता है, जबकि खुद अपने सहयोगियों के सामने हाथ फैलाने पर मजबूर है। गरीबाबादी के अनुसार, यह अमेरिका की रणनीतिक गलतफहमी का नतीजा है, जो हर बार उसे और बड़ी विफलता की ओर धकेलती है।
एक्स पर गरीबाबादी का बयान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में गरीबाबादी ने लिखा, 'वे कहते हैं कि ईरान टूटने के कगार पर है और किसी तरह टिके रहने की कोशिश कर रहा है, फिर भी वे अपने सभी सहयोगियों से मदद की गुहार लगाते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'समस्या उनके गलत आकलनों में है। हर बार जब वे उन गलतियों को छिपाने की कोशिश करते हैं तो खुद के लिए उससे भी बड़ी नाकामी पैदा कर लेते हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य रास्ते से कोई नतीजा न मिलने के बाद अमेरिका ने अपनी अगली रणनीति का नाम 'आर्थिक युद्ध' रख दिया है — जिसे वे इसी कड़ी की एक और संभावित विफलता मानते हैं।
शांति समझौते पर ईरान का रुख
गरीबाबादी ने इससे पहले भी स्पष्ट किया था कि ईरान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ निभाना बंद कर दिया है, क्योंकि वाशिंगटन ने पहले अपने वादे तोड़े। सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समझौते की सभी प्रतिबद्धताओं को या तो व्यवहार में तोड़ा है या औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है।
उन्होंने कहा, 'अभी हमारे सामने देश का मजबूती से बचाव करने की चुनौती है। इस बार भी अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।'
ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' पर ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के खिलाफ 'इकोनॉमिक डी-डे' प्रतिबंधों का ऐलान किया था। कथित तौर पर इन प्रतिबंधों का असर ईरान के सहयोगियों और साझेदारों पर भी पड़ेगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए एक्स पर लिखा, 'यह कदम वाशिंगटन के बेहिसाब कर्ज और बढ़ते ब्याज खर्च से ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है।' उन्होंने यह भी कहा, 'विफल नीतियों पर अड़े रहने से केवल और हार ही मिलेगी।' अराघची का मानना है कि ये प्रतिबंध अंततः अमेरिका पर ही भारी पड़ेंगे।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव कई मोर्चों पर एक साथ बढ़ रहा है — परमाणु वार्ता ठप है, आर्थिक प्रतिबंध कड़े हो रहे हैं और क्षेत्रीय शक्तियाँ अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत कर रही हैं। गौरतलब है कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह सार्वजनिक और सीधा जवाब देना, कूटनीतिक दबाव को लेकर तेहरान के बदलते रुख का संकेत देता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत की मेज़ पर लौटते हैं या प्रतिबंधों का यह दौर और गहरा होता है।