जर्मनी राज्य चुनाव 2026: बर्लिन और मेक्लेनबर्ग में मतदान, चांसलर मर्ज की साख दाँव पर
सारांश
मुख्य बातें
जर्मनी के दो महत्वपूर्ण राज्यों — बर्लिन और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया — में 20 सितंबर 2026 (रविवार) को राज्य विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जिन पर जर्मनी के साथ-साथ पूरे यूरोप की निगाहें टिकी हुई हैं। इन चुनावों को चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के लिए निर्णायक राजनीतिक कसौटी माना जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य में दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की ऐतिहासिक जीत के बाद मर्ज पर राजनीतिक दबाव और तेज हो गया है।
मतदान का विवरण और मुख्य मुद्दे
करीब 25 लाख मतदाता स्थानीय समयानुसार सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे (सीईएसटी) तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दोनों राज्यों में चुनावी मुद्दे अलग-अलग हैं। बर्लिन में आवास संकट और तेज़ी से बढ़ता किराया सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है — 2014 के बाद से राजधानी में किराए में भारी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नए घरों की ज़रूरत बताई जा रही है।
मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी और केंद्र-वाम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच कड़ी टक्कर बताई जा रही है। राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री मनुएला श्वेसिग की एसपीडी ने चुनाव अभियान में अपनी स्थिति को मज़बूत करने के भरसक प्रयास किए हैं।
एएफडी की बढ़त और सैक्सोनी-आनहाल्ट का सबक
इस महीने की शुरुआत में सैक्सोनी-आनहाल्ट चुनाव में एएफडी को करीब 44 फीसदी वोट मिले, जो किसी भी जर्मन राज्य चुनाव में पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इसके मुकाबले सीडीयू केवल करीब 17 फीसदी वोट पाकर बहुत पीछे रह गई। इस नतीजे के बाद मर्ज ने स्वीकार किया था कि परिणाम ने सीडीयू को उसकी बुनियाद तक हिला दिया है, हालांकि उन्होंने पद छोड़ने से साफ इनकार किया और सरकार की नीतियों पर काम जारी रखने का संकल्प दोहराया।
गौरतलब है कि एएफडी की बढ़त के पीछे केवल प्रवासन का मुद्दा नहीं है — पूर्वी जर्मनी के कई इलाकों में उद्योगों का पलायन, रोज़गार की कमी और जनसंख्या ह्रास ने भी राजनीतिक असंतोष को गहरा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी जर्मनी में एएफडी के बढ़ते जनसमर्थन से प्रवासी समुदायों में भी गहरी चिंता देखी जा रही है।
मर्ज के नेतृत्व पर सवाल और गठबंधन की दरारें
मर्ज को चांसलर बने अभी लगभग 16 महीने ही हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था, महंगाई, सामाजिक कल्याण सुधारों और प्रवासन जैसे मोर्चों पर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के भीतर मर्ज की नेतृत्व क्षमता को लेकर चर्चा पहले से चल रही है और कमज़ोर चुनावी प्रदर्शन इस बहस को और तीखा कर सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब मर्ज की गठबंधन सरकार में शामिल एसपीडी और सीडीयू के बीच आर्थिक और सामाजिक नीतियों — विशेषकर पेंशन, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक कल्याण सुधारों — को लेकर मतभेद भी सतह पर आ चुके हैं। इन सुधारों की राजनीतिक कीमत को लेकर गठबंधन के भीतर भी बेचैनी है।
फायरवॉल रणनीति की परीक्षा
जर्मनी की मुख्यधारा पार्टियाँ वर्षों से एएफडी के साथ किसी भी औपचारिक गठबंधन या सत्ता में साझेदारी से दूरी बनाए रखने की नीति — जिसे राजनीतिक भाषा में 'फायरवॉल' रणनीति कहा जाता है — अपनाती रही हैं। लेकिन हालिया चुनावी नतीजों ने इस रणनीति की व्यावहारिकता और प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज़ कर दी है।
बर्लिन में सीडीयू, वामपंथी डाई लिंके और एएफडी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है, जो इस 'फायरवॉल' के भविष्य पर भी असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा
इन चुनावों के नतीजे यह स्पष्ट करेंगे कि सैक्सोनी-आनहाल्ट में एएफडी की सफलता एक अपवाद थी या पूर्वी जर्मनी में यह लहर और व्यापक होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी में राज्य चुनावों के नतीजों को संघीय सरकार के प्रति जनता के मिजाज़ का पैमाना भी माना जाता है। यदि सीडीयू दोनों राज्यों में कमज़ोर प्रदर्शन करती है, तो मर्ज के लिए पार्टी के भीतर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है — हालांकि राज्य चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर संघीय चांसलर को पद से नहीं हटाते। मर्ज का कहना है कि अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और यूक्रेन पर दृढ़ विदेश नीति ही उनके एजेंडे की धुरी बनी रहेगी।