गोल्डा मेयर: इजरायल की 'दादी' जिन्होंने भारत की मदद की
सारांश
Key Takeaways
- गोल्डा मेयर का जन्म 1898 में हुआ और वे इजरायल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
- उन्होंने 1971 में भारत को गुप्त सैन्य सहायता दी।
- उनका प्रसिद्ध कथन: 'आप मुट्ठी बंद कर हाथ नहीं मिला सकते।'
- उनका कार्यकाल कई चुनौतियों से भरा रहा, विशेषकर योम किप्पुर युद्ध के दौरान।
- गोल्डा मेयर को 'दादी' और 'आयरन लेडी' के नाम से भी जाना जाता है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 'आप मुट्ठी बंद कर हाथ नहीं मिला सकते'—यह प्रसिद्ध कथन इजरायल की पहली और दुनिया की तीसरी महिला प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर का है, जिन्होंने 70 वर्ष की आयु में 17 मार्च 1969 को देश की बागडोर संभालकर एक नया इतिहास रच दिया।
यूक्रेन के कीव में जन्मी गोल्डा मेयर को इजरायल में प्यार से अक्सर ‘दादी’ कहा जाता था। उनकी छवि सख्त नेता से कहीं बढ़कर थी, वह एक बेबाक, स्पष्ट और निर्णय लेने में सक्षम नेता के रूप में जानी जाती थीं। गोल्डा एक चेन-स्मोकर थीं और इजरायल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने उन्हें “मेरे मंत्रिमंडल की अकेली पुरुष” कहा था।
70 के पार होने के बावजूद, वह किसी 20 वर्षीय युवती की तरह सक्रिय रहीं और उनका दिन सुबह चार बजे समाप्त होता था।
गोल्डा मेयर ने अपनी आत्मकथा 'माई लाइफ' में लिखा है, "कभी-कभी मेरे आवास के बाहर तैनात अंगरक्षक यह देख पाते थे कि तड़के चार बजे भी मेरी रसोई की लाइट जल रही थी। उनमें से एक यह देखने के लिए अंदर आता था कि मैं ठीक हूं या नहीं। मैं फिर चाय बनाती थी, और हम साथ में बैठकर बातें करते थे जब तक मुझे सोने का समय नहीं लगता।"
गोल्डा मेयर के विचार हमेशा स्पष्ट और कट्टर थे। उन्होंने एक बार कहा था, “अगर शांति आती है तो हम अरब को माफ कर सकते हैं कि उन्होंने हमारे बेटों की हत्या की, लेकिन हम उन्हें कभी माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने हमें अरब के बेटों की हत्या करने के लिए मजबूर किया।” यह बयान मध्य-पूर्व संघर्ष में उनके दृढ़ विचार और कठोर राजनीतिक दृष्टिकोण को उजागर करता है।
भारत के साथ उनका संबंध भी ऐतिहासिक और दिलचस्प रहा है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, गोल्डा मेयर ने भारत को गुप्त रूप से सैन्य सहायता प्रदान की। उस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। दोनों के बीच व्यक्तिगत सम्मान और संवाद का संबंध काफी मजबूत था, लेकिन भारत उस समय आधिकारिक रूप से इजरायल से दूरी बनाए रखता था। फिर भी, गोल्डा ने जब जरूरत महसूस की, तो उन्होंने भारत की पूरी मदद की।
अमेरिकी पत्रकार गैरी जे. बास ने अपनी पुस्तक ‘द ब्लड टेलीग्राम: निक्सन, किसिंजर, एंड ए फॉरगॉटन जेनोसाइड’ में उल्लेख किया है कि गोल्डा मेयर ने इजरायली हथियार विक्रेता शलोमो जब्लोडिकिज के माध्यम से भारत को हथियार और मोर्टार भेजे थे। इस दौरान कुछ इजरायली प्रशिक्षक भी भारत आए थे। यह कदम उस समय भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था और पूरी तरह से गुप्त रखा गया।
प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा। 1973 में अरब देशों और इजरायल के बीच योम किप्पुर युद्ध उनके नेतृत्व की सबसे कठिन परीक्षा बन गया। युद्ध के प्रारंभिक चरणों में इजरायल को भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन गोल्डा ने स्थिति को संभाला और दृढ़ नेतृत्व का उदाहरण पेश किया। उन्होंने एक बार कहा था, "शांति तभी आएगी जब अरब अपने बच्चों से हमें ज्यादा प्यार करेंगे"; यह भी उनकी स्पष्टता और मजबूत व्यक्तित्व को दर्शाता है।
गोल्डा मेयर ने 1974 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन आज भी उन्हें इजरायल की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है। उनका व्यक्तित्व, साहस, स्पष्टवादिता और भारत के साथ गुप्त सहयोग ने उन्हें वैश्विक राजनीति में एक विशेष स्थान दिलाया। उनके जीवन में कठोरता, मानवता और बेबाक निर्णय लेने की शक्ति का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है, जो उन्हें आज भी ‘दादी’ और ‘आयरन लेडी ऑफ इजरायल’ के रूप में यादगार बनाता है।