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शांगरी-ला डायलॉग में पीट हेगसेथ की चेतावनी: सहयोगी देश GDP का 3.5% रक्षा पर खर्च करें, चीन के विस्तार पर सख्त रुख

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शांगरी-ला डायलॉग में पीट हेगसेथ की चेतावनी: सहयोगी देश GDP का 3.5% रक्षा पर खर्च करें, चीन के विस्तार पर सख्त रुख

सारांश

सिंगापुर के शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हिंद-प्रशांत सहयोगियों को दो-टूक कहा — GDP का 3.5% रक्षा पर लगाओ, जहाज और पनडुब्बियाँ खरीदो। चीन की बढ़ती ताकत पर चिंता, ताइवान नीति अपरिवर्तित, और दक्षिण कोरिया OPCON विवाद पर नया तनाव।

मुख्य बातें

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 31 मई 2026 को सिंगापुर के शांगरी-ला डायलॉग में हिंद-प्रशांत सहयोगियों को रक्षा खर्च बढ़ाने का आह्वान किया।
हेगसेथ ने सुझाव दिया कि सहयोगी देशों को अपनी जीडीपी का लगभग 3.5% रक्षा पर खर्च करना चाहिए।
चीन की सैन्य शक्ति बढ़ने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि अमेरिका-चीन संवाद पहले से बेहतर हुआ है।
ताइवान पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं; सीधा जवाब देने से परहेज़।
दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (OPCON) सौंपने पर संतुलन बनाने की बात, सोल-वाशिंगटन के बीच मतभेद जारी।
जापान की अमेरिका के साथ मिलकर रक्षा क्षमता मज़बूत करने की पहल की सराहना।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 31 मई 2026 को सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सहयोगी देशों को स्पष्ट संदेश दिया — केवल सुरक्षा बैठकों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस सैन्य निवेश और क्षमता विस्तार ज़रूरी है। उन्होंने चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रमुख चुनौती बताते हुए सहयोगी देशों से अपनी जीडीपी का लगभग 3.5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने का आह्वान किया।

मुख्य घोषणाएँ और माँगें

हेगसेथ ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए जहाज, पनडुब्बियाँ और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियाँ जैसे ठोस संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। उनके अनुसार, किसी भी संभावित आक्रामकता को रोकने के लिए मज़बूत गठबंधन और बेहतर अंतर-संचालन क्षमता अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया जब नाटो सदस्य देशों पर भी रक्षा खर्च बढ़ाने का अमेरिकी दबाव लगातार जारी है — और अब वही दबाव एशिया की ओर भी मुड़ता दिख रहा है।

चीन पर अमेरिका का रुख

हेगसेथ ने स्वीकार किया कि चीन की सैन्य शक्ति तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संवाद पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। ताइवान के मुद्दे पर उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज़ किया, हालाँकि स्पष्ट किया कि इस विषय पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। गौरतलब है कि यह शांगरी-ला डायलॉग ऐसे समय हो रहा है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव और ताइवान जलडमरूमध्य में गतिविधियाँ बढ़ी हैं।

जापान और दक्षिण कोरिया पर विशेष ज़ोर

हेगसेथ ने जापान की सराहना करते हुए कहा कि वह अमेरिका के साथ मिलकर अपनी रक्षा क्षमता को मज़बूत कर रहा है। दक्षिण कोरिया के संदर्भ में उन्होंने युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (OPCON) हस्तांतरण पर संतुलित रुख अपनाने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार, हेगसेथ ने कहा, "हमें एक संतुलन बनाना होगा, ताकि हमारी सैन्य योजनाओं और उन जिम्मेदारियों का सम्मान हो, जिन्हें अमेरिकी सैनिक दशकों से निभा रहे हैं। साथ ही हम दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे वे चाहते हैं।"

OPCON विवाद की पृष्ठभूमि

सोल और वाशिंगटन के बीच इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं कि युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल को कब और किस तरीके से दक्षिण कोरिया को सौंपा जाए। यह विवाद दशकों पुराना है — दक्षिण कोरिया लंबे समय से इस नियंत्रण की माँग करता रहा है, जबकि अमेरिका इसे शर्तों के साथ जोड़ता आया है। हेगसेथ का बयान इस जटिल समीकरण में नया आयाम जोड़ता है।

क्षेत्रीय निहितार्थ

विशेषज्ञों के अनुसार, हेगसेथ का 3.5% GDP का सुझाव अधिकांश एशियाई सहयोगियों की मौजूदा रक्षा-व्यय सीमा से काफी अधिक है। यह माँग भारत, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और अन्य हिंद-प्रशांत भागीदारों के लिए नीतिगत दबाव बढ़ा सकती है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन-से देश इस आह्वान पर ठोस प्रतिबद्धता जताते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन के साथ आर्थिक निर्भरता और घरेलू राजनीतिक बाधाएँ इस माँग को पूरा करना जटिल बनाती हैं। ताइवान पर 'नीति अपरिवर्तित' का जवाब अस्पष्टता की रणनीति है, जो सहयोगियों को आश्वस्त करने की बजाय और अनिश्चितता पैदा करती है। दक्षिण कोरिया OPCON विवाद दर्शाता है कि अमेरिका 'बोझ साझा करो' तो कहता है, लेकिन नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं — यह अंतर्विरोध लंबे समय तक गठबंधन की साख को कमज़ोर करता रहेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांगरी-ला डायलॉग में पीट हेगसेथ ने क्या कहा?
हेगसेथ ने हिंद-प्रशांत सहयोगी देशों से अपनी जीडीपी का लगभग 3.5% रक्षा पर खर्च करने और जहाज, पनडुब्बियाँ व रक्षा प्रणालियाँ जैसे ठोस संसाधन जुटाने की माँग की। उन्होंने चीन के सैन्य विस्तार को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रमुख चुनौती बताया।
हेगसेथ ने ताइवान मुद्दे पर क्या रुख अपनाया?
हेगसेथ ने ताइवान पर सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि इस विषय पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। यह अमेरिका की पारंपरिक 'रणनीतिक अस्पष्टता' की नीति के अनुरूप है।
दक्षिण कोरिया OPCON विवाद क्या है?
युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (OPCON) वह अधिकार है जो युद्ध की स्थिति में संयुक्त सैन्य बलों की कमान तय करता है। फिलहाल यह अमेरिका के पास है और दक्षिण कोरिया इसे वापस लेना चाहता है, लेकिन सोल और वाशिंगटन के बीच इसके समय और शर्तों पर मतभेद हैं।
क्या एशियाई देश 3.5% GDP रक्षा पर खर्च करते हैं?
अधिकांश एशियाई सहयोगी देश इस स्तर से काफी नीचे हैं। उदाहरण के लिए, जापान हाल ही में अपना रक्षा बजट 2% GDP तक बढ़ाने की प्रक्रिया में है। हेगसेथ का 3.5% का सुझाव इन देशों पर महत्वपूर्ण नीतिगत दबाव डालता है।
शांगरी-ला डायलॉग क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
शांगरी-ला डायलॉग सिंगापुर में आयोजित होने वाला एशिया का सबसे प्रमुख रक्षा और सुरक्षा शिखर सम्मेलन है, जिसमें दर्जनों देशों के रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं। यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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