होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षा: पीट हेगसेथ बोले — दुनिया को हमसे ज़्यादा इस जलमार्ग की ज़रूरत, सहयोगी देश उठाएँ ज़िम्मेदारी

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होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षा: पीट हेगसेथ बोले — दुनिया को हमसे ज़्यादा इस जलमार्ग की ज़रूरत, सहयोगी देश उठाएँ ज़िम्मेदारी

सारांश

अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत होर्मुज स्ट्रेट में 15,000 सैनिक तैनात कर चुका है, लेकिन वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का संदेश साफ है — यह ज़िम्मेदारी अकेले अमेरिका की नहीं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप को आगे आना होगा, वरना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की इस धमनी पर खतरा बरकरार रहेगा।

मुख्य बातें

वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने 5 मई 2026 को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सहयोगी देशों को भी उठानी होगी।
अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान के तहत 15,000 से अधिक सैनिक , युद्धपोत और हवाई संसाधन तैनात कर चुका है।
जनरल डैन केन ने कहा कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमले और धमकियाँ देकर वैश्विक व्यापार बाधित करने की कोशिश कर रहा है।
अब तक दो अमेरिकी ध्वज वाले जहाज इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं।
हेगसेथ ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
यह मिशन अस्थायी है; दीर्घकालिक सुरक्षा ज़िम्मेदारी साझेदार देशों को सौंपने की योजना है।

अमेरिकी वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने मंगलवार, 5 मई 2026 को स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अमेरिका के सहयोगी देशों को भी उठानी होगी, क्योंकि यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अमेरिका से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका फिलहाल इस क्षेत्र में नए मिशन का नेतृत्व कर रहा है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह ज़िम्मेदारी साझेदार देशों को सौंपी जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

हेगसेथ ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "इस जलमार्ग की ज़रूरत दुनिया को हमसे ज़्यादा है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के साझेदार देशों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है, परंतु उनके आगे आने का इंतज़ार किए बिना अमेरिका अपना काम जारी रखेगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' नामक अभियान चला रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान की ओर से हमलों और रुकावटों की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

ईरान का खतरा और सैन्य तैनाती

जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन एयर फोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि ईरान ने हाल के समय में कई बार व्यापारिक जहाजों को धमकी दी है और उन पर हमले किए हैं, ताकि समुद्री व्यापार को बाधित किया जा सके और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस जलमार्ग पर दबाव बना हुआ है और ईरान की ओर से छोटे स्तर के हमले जारी हैं, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार अभी यह बड़े सशस्त्र संघर्ष की स्थिति तक नहीं पहुँचा है।

अमेरिका ने इस क्षेत्र में 15,000 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही नौसेना के युद्धपोत और हवाई संसाधन भी लगाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक दो अमेरिकी ध्वज वाले व्यापारिक जहाज इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं और शिपिंग कंपनियों का भरोसा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा संभालता है और यह उन सभी देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो गया है जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।

सहयोगी देशों की भूमिका

हेगसेथ ने दोहराया कि यह मिशन अस्थायी प्रकृति का है और अमेरिका का दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश धीरे-धीरे इस जलमार्ग की सुरक्षा की साझा ज़िम्मेदारी लें। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह अपने सहयोगियों पर रक्षा खर्च और ज़िम्मेदारी बढ़ाने का दबाव डाल रहा है।

आगे की राह

आने वाले दिनों में और अधिक व्यापारिक जहाजों के इस मार्ग से गुजरने की उम्मीद है। यदि सहयोगी देश अपेक्षित भूमिका नहीं निभाते, तो अमेरिका पर इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है — जो घरेलू राजनीति और रक्षा बजट दोनों के लिए एक बड़ा सवाल बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संकेत है — अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी वैश्विक समुद्री सुरक्षा की कीमत चुकाएँ। लेकिन विरोधाभास यह है कि जापान और यूरोप, जो इस जलमार्ग पर ऊर्जा आयात के लिए सबसे अधिक निर्भर हैं, अभी तक ठोस प्रतिबद्धता से बचते रहे हैं। ईरान के साथ परमाणु वार्ता की पृष्ठभूमि में यह सैन्य तैनाती कूटनीतिक दबाव का भी एक औज़ार है। यदि सहयोगी देश जल्द आगे नहीं आए, तो अमेरिका को या तो अपनी सैन्य उपस्थिति अनिश्चितकाल तक बनाए रखनी होगी, या फिर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को एक बड़े अनिश्चितता के दौर में छोड़ना होगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा संभालता है और यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह उन सभी देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, जिनमें जापान, भारत और यूरोपीय देश शामिल हैं।
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' क्या है?
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अमेरिका का एक सैन्य अभियान है जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना है। इसके तहत अमेरिका ने 15,000 से अधिक सैनिक, युद्धपोत और हवाई संसाधन इस क्षेत्र में तैनात किए हैं।
ईरान होर्मुज स्ट्रेट में क्यों हमले कर रहा है?
जनरल डैन केन के अनुसार, ईरान व्यापारिक जहाजों को धमकी देकर और उन पर हमले करके समुद्री व्यापार को बाधित करना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाना चाहता है। हालाँकि अभी यह बड़े सशस्त्र संघर्ष की स्थिति तक नहीं पहुँचा है।
अमेरिका किन देशों से होर्मुज सुरक्षा में भागीदारी चाहता है?
वॉर सेक्रेटरी हेगसेथ ने जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इन देशों के आगे आने का इंतज़ार किए बिना अपना मिशन जारी रखेगा।
यह मिशन कब तक चलेगा?
हेगसेथ ने कहा कि यह मिशन अस्थायी प्रकृति का है और अमेरिका का लक्ष्य धीरे-धीरे सुरक्षा की ज़िम्मेदारी साझेदार देशों को सौंपना है। हालाँकि इसकी कोई निश्चित समयसीमा अभी तक नहीं बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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