यमन के ताइज में हूती का कब्जा बढ़ा, अत तुरबाह शहर पर नियंत्रण; सरकार ने बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हूती समूह ने 5 अक्टूबर 2026 को दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत के रणनीतिक रूप से अहम शहर अत तुरबाह पर कब्जा कर लिया, जबकि सरकारी सेना ने बिना किसी सशस्त्र प्रतिरोध के पहाड़ी इलाकों और पड़ोसी लहज प्रांत की ओर पीछे हटने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम के जवाब में, यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) के चेयरमैन और सेना के कमांडर-इन-चीफ राशद अल-अलीमी ने रियाद से एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत का ऐलान किया।
अत तुरबाह पर हूती का कब्जा — क्या हुआ
एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि सरकारी सैनिक दिन में ही अत तुरबाह से पीछे हट गए, जिससे हूती लड़ाकों को शहर में बिना किसी प्रतिरोध के प्रवेश का रास्ता मिल गया। हूती लड़ाके शहर की प्रमुख सड़कों, सरकारी इमारतों और मुख्य प्रवेश-निकास बिंदुओं पर तैनात हो गए।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, हूती के पहुँचने से पहले ही कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। हूती ने मस्जिदों के लाउडस्पीकर के माध्यम से नागरिकों से विरोध न करने की अपील की। कुछ सरकारी सैनिक लड़ाई में नुकसान उठाने के बाद लहज प्रांत की ओर चले गए।
गौरतलब है कि 2014 में यमन में संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब हूती समूह ने अत तुरबाह शहर पर नियंत्रण स्थापित किया है।
हालिया सैन्य बढ़त का विस्तार
अत तुरबाह से पहले, यमनी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि हूती लड़ाकों ने 'अश-शमायातीन' और पड़ोसी 'अल-माफर' जिलों के कई हिस्सों में भी अहम ठिकाने अपने कब्जे में ले लिए, जिससे सरकारी सेना को पीछे हटना पड़ा।
इसके अलावा, हूती समूह ने 10 सितंबर को लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया था, और अगले दिन मय्यून द्वीप — जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है — पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के ऊँचाई वाले इलाकों में तनाव और बढ़ा है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों के लिए निर्णायक है।
सरकार की प्रतिक्रिया और सैन्य अभियान
राशद अल-अलीमी ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद से टेलीविज़न पर दिए संबोधन में कहा कि कई हफ्तों की सैन्य तैयारी के बाद यमन सरकार अब 'तैयारी के दौर से कार्रवाई के दौर' में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का लक्ष्य हूती के कब्जे में मौजूद बाकी इलाकों को वापस लेना है।
यह ऐसे समय में आया है जब सितंबर 2026 की शुरुआत से हूती ने व्यापक सैन्य अभियान छेड़ते हुए ताइज और लहज प्रांत के कई हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कई वर्षों से अधिकांश मोर्चों पर स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई थी।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में सशस्त्र संघर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ, जब हूती समूह ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी हद तक रुक गई थी। हालाँकि, हूती की हालिया सैन्य बढ़त और यमन सरकार के नए अभियान के ऐलान ने देश को पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर सैन्य तनावों में से एक की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
आगे की स्थिति
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूती की बढ़ती पकड़ न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी चिंता का विषय बन रही है। यमन सरकार के सैन्य अभियान की सफलता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया, आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा तय करेगी।