भारतीय वायु सेना का 9वां विमान काठमांडू पहुंचा, नेपाल को 11 टन राहत सामग्री सौंपी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायु सेना (IAF) का 9वां सी-130 विमान शनिवार, 19 सितंबर 2026 को काठमांडू पहुंचा, जिसमें 11 टन राहत सामग्री लदी थी — टेंट, दवाइयाँ, स्लीपिंग बैग और फोरेंसिक उपकरण शामिल। यह सामग्री तत्काल नेपाल सरकार को सौंप दी गई। भारत का यह कदम 26 अगस्त 2026 की विनाशकारी बाढ़ के बाद जारी मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियान की अगली कड़ी है।
राहत सामग्री में क्या-क्या शामिल
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने विमान के रवाना होने से पहले पुष्टि की थी कि इस खेप में टेंट, आवश्यक दवाइयाँ, स्लीपिंग बैग और फोरेंसिक जाँच उपकरण भेजे जा रहे हैं। यह उसी मानक सामग्री का विस्तार है जो पिछली कई खेपों में भेजी जाती रही है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भेजे गए 8वें विमान में टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक सप्लाई का सामान था, जिसे नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपा गया था।
राजदूत ने एक्स पर साझा की जानकारी
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें और वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, 'नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के प्रयासों में भारत का सहयोग जारी है। शनिवार को टेंट, दवाइयां, स्लीपिंग बैग और फोरेंसिक सामान समेत 11 टन सामग्री लेकर भारतीय वायु सेना (IAF) का 9वां विमान काठमांडू पहुंचा और यह सामान नेपाल सरकार को सौंप दिया गया।'
नेपाल के वित्त मंत्री ने जताया आभार
नेपाल के दूतावास ने बताया कि शुक्रवार को नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। वाग्ले ने रसुवा में आई बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों में भारत की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
दूतावास ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि 'दोनों मंत्रियों ने नेपाल-भारत की पुरानी दोस्ती को और गहरा करने और आपसी सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।'
नेपाल में तबाही का पैमाना
नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई थी। आँकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और अभी भी हज़ारों लापता हैं। देश अभी भी पुनर्वास और बचाव की जद्दोजहद में है।
क्या होगा आगे
भारत का यह HADR अभियान लगातार जारी है और आने वाले हफ्तों में और खेपें भेजे जाने की संभावना है। दोनों देशों के मंत्रियों के बीच हुई चर्चा संकेत देती है कि न केवल तात्कालिक राहत, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्निर्माण में भी भारत की भूमिका बनी रहेगी।