आईएमएफ ने बांग्लादेश की $4.7 अरब ऋण किस्तें रोकीं, बैंकिंग सुधार और जलवायु शर्तें पूरी न होने पर अड़ा
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बांग्लादेश को मिलने वाले 4.7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम की अगली किस्तें फ़िलहाल रोक दी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में लंबित सुधार, ईंधन-बिजली सब्सिडी में कटौती की शर्तें और जलवायु जोखिम प्रबंधन क्षमता में अपेक्षित प्रगति न होना — ये तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं। इसके साथ ही ढाका की बजट समर्थन के लिए माँगी गई 2 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
आईएमएफ की एक तकनीकी सहायता टीम 19 से 30 जुलाई तक ढाका में रही और बांग्लादेश की जलवायु नीतियों, वित्तीय ढाँचे तथा जोखिम प्रबंधन क्षमता की विस्तृत समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि कई अहम शर्तें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं, जिसके चलते किस्तें जारी नहीं की जा सकतीं।
बांग्लादेश सरकार मौजूदा ऋण कार्यक्रम को पुनः सक्रिय कराने के साथ-साथ बजट समर्थन के लिए 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त वित्तपोषण भी चाहती है। आईएमएफ ने साफ किया है कि नए वित्तपोषण के लिए व्यापक आर्थिक सुधार और जलवायु जोखिम प्रबंधन की संस्थागत क्षमता अनिवार्य पूर्वशर्त है।
आईएमएफ की प्रमुख शर्तें
आईएमएफ ने जो शर्तें रखी हैं, वे कई संवेदनशील क्षेत्रों को एक साथ छूती हैं। इनमें बैंकिंग क्षेत्र और बैंकिंग कानूनों में सुधार, राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) की क्षमता में वृद्धि, करदाताओं की जानकारी तक सिंगल-क्लिक पहुँच, ईंधन और बिजली पर सब्सिडी समाप्त करना तथा बाज़ार-आधारित विदेशी मुद्रा विनिमय दर लागू करना शामिल हैं।
इन आर्थिक शर्तों के अलावा, जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों के आकलन और उनसे निपटने के लिए संस्थागत ढाँचा विकसित करना भी अनिवार्य बताया गया है। गौरतलब है कि बांग्लादेश एशिया का पहला देश था जिसे आईएमएफ की रिज़िलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फ़ैसिलिटी (आरएसएफ) के तहत वित्तपोषण प्राप्त हुआ था।
आरएसएफ की स्थिति
बांग्लादेश को आरएसएफ के अंतर्गत लगभग 1 अरब एसडीआर यानी करीब 1.4 अरब डॉलर की सुविधा स्वीकृत की गई थी। इसकी लगभग दो-तिहाई राशि पहले ही जारी हो चुकी है, जबकि शेष राशि अभी लंबित है। आईएमएफ के अनुसार, इस सुविधा का उद्देश्य जलवायु जोखिमों के विरुद्ध बांग्लादेश की आर्थिक मज़बूती बढ़ाने के लिए वित्तीय गुंजाइश तैयार करना है।
बांग्लादेश के सामने चुनौती
बांग्लादेश के लिए असली कठिनाई यह है कि उसे एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा — बैंकिंग सुधार, राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी, सब्सिडी में कटौती, विनिमय दर सुधार और जलवायु नीति। ये सभी क्षेत्र राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं और इनमें एक साथ कदम उठाना घरेलू स्तर पर कड़ी परीक्षा है।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव और उच्च मुद्रास्फीति से जूझ रही है। आईएमएफ ने वित्तीय क्षेत्र और जलवायु लचीलेपन से जुड़े सुधारों को देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए अपरिहार्य बताया है।
आगे की राह
सुधारों में और देरी होने पर न केवल मौजूदा 4.7 अरब डॉलर के कार्यक्रम की शेष किस्तें प्रभावित होंगी, बल्कि प्रस्तावित 2 अरब डॉलर के नए वित्तपोषण पर भी अनिश्चितता बनी रहेगी। बांग्लादेश सरकार के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है — सुधारों की गति और दिशा ही यह तय करेगी कि आईएमएफ के साथ संबंध किस रूप में आगे बढ़ते हैं।