युद्ध अपराध और नरसंहार मामलों में जवाबदेही के लिए भारत ने IRMCT को जारी रखने का समर्थन किया
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने 22 अक्टूबर 2026 को इंटरनेशनल रेजिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स (IRMCT) को जारी रखने का स्पष्ट समर्थन किया, यह कहते हुए कि युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों में जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय न्याय की बुनियाद है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक पूर्ण सत्र में यह बात कही।
भारत का रुख और मुख्य वक्तव्य
मनीष तिवारी ने बुधवार को महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत इस बात पर जोर देता है कि IRMCT अपने शेष दायित्वों को पूरा करता रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय अदालतों को सहयोग देना और न्यायाधिकरणों के अभिलेखों को सुरक्षित रखना एवं प्रबंधित करना शामिल है।
तिवारी ने कहा, 'ये सभी काम बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे अस्थायी न्यायाधिकरणों की विरासत सुरक्षित रहती है और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलती है।' उन्होंने आगे कहा कि 'हम दंड से बचने की प्रवृत्ति के खिलाफ लड़ाई में इस तंत्र के योगदान को स्वीकार करते हैं।'
IRMCT क्या है और क्यों बना
IRMCT की स्थापना 2010 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने की थी, ताकि रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों का अधूरा कार्य पूरा किया जा सके। रवांडा न्यायाधिकरण ने गृहयुद्ध के दौरान तुत्सी समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार के जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया, जबकि यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में न्याय सुनिश्चित किया।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अंतरराष्ट्रीय न्याय तंत्रों की प्रासंगिकता और उनके भविष्य को लेकर वैश्विक बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि IRMCT का गठन इन न्यायाधिकरणों के औपचारिक रूप से बंद होने के बाद भी जवाबदेही की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था के रूप में हुआ था।
न्यायाधिकरणों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने 111 मुकदमों की सुनवाई की और 90 लोगों को दोषी ठहराया; इनमें से एक मामले की अपील अभी भी IRMCT के पास लंबित है। रवांडा न्यायाधिकरण ने लगभग 8 लाख तुत्सी लोगों और कुछ उदारवादी हूतू लोगों की हत्या से जुड़े मामलों में 86 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे — यह नरसंहार उन हूतू चरमपंथियों ने अंजाम दिया था जो उस समय रवांडा सरकार पर नियंत्रण रखते थे।
IRMCT ने न्यायाधिकरणों से कुछ मामले अपने हाथ में लेने के बाद अब तक 61 लोगों को दोषी ठहराया है। यह संख्या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जवाबदेही के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।
व्यवस्थित हस्तांतरण पर भारत का जोर
तिवारी ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे IRMCT अपने कार्यकाल के समापन की ओर बढ़ रहा है, भारत चाहता है कि इसकी जिम्मेदारियों का हस्तांतरण व्यवस्थित, प्रभावी और तय समयसीमा के भीतर हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में न्यायिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और शेष दायित्वों को पूरी तरह निभाया जाना चाहिए।
भारत का यह रुख न्याय, निष्पक्षता, समानता और कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है — और यह संदेश देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक जिम्मेदार भागीदार की भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।