22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

युद्ध अपराध और नरसंहार मामलों में जवाबदेही के लिए भारत ने IRMCT को जारी रखने का समर्थन किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
युद्ध अपराध और नरसंहार मामलों में जवाबदेही के लिए भारत ने IRMCT को जारी रखने का समर्थन किया

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने IRMCT को जारी रखने का समर्थन किया — वह तंत्र जो रवांडा और यूगोस्लाविया के आपराधिक न्यायाधिकरणों का अधूरा काम पूरा करता है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता किए बिना जवाबदेही बनाए रखना अनिवार्य है।

मुख्य बातें

भारत ने 22 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में IRMCT को जारी रखने का समर्थन किया।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने महासभा के पूर्ण सत्र में भारत का पक्ष रखा।
IRMCT की स्थापना 2010 में हुई थी; इसने अब तक 61 लोगों को दोषी ठहराया है।
रवांडा न्यायाधिकरण ने ~8 लाख लोगों की हत्या से जुड़े मामलों में 86 आरोपियों पर मुकदमा चलाया; यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने 111 मुकदमे सुने और 90 को दोषी ठहराया।
भारत ने जोर दिया कि IRMCT की जिम्मेदारियों का हस्तांतरण व्यवस्थित और न्यायिक स्वतंत्रता के साथ हो।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने 22 अक्टूबर 2026 को इंटरनेशनल रेजिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स (IRMCT) को जारी रखने का स्पष्ट समर्थन किया, यह कहते हुए कि युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों में जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय न्याय की बुनियाद है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक पूर्ण सत्र में यह बात कही।

भारत का रुख और मुख्य वक्तव्य

मनीष तिवारी ने बुधवार को महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत इस बात पर जोर देता है कि IRMCT अपने शेष दायित्वों को पूरा करता रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय अदालतों को सहयोग देना और न्यायाधिकरणों के अभिलेखों को सुरक्षित रखना एवं प्रबंधित करना शामिल है।

तिवारी ने कहा, 'ये सभी काम बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे अस्थायी न्यायाधिकरणों की विरासत सुरक्षित रहती है और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलती है।' उन्होंने आगे कहा कि 'हम दंड से बचने की प्रवृत्ति के खिलाफ लड़ाई में इस तंत्र के योगदान को स्वीकार करते हैं।'

IRMCT क्या है और क्यों बना

IRMCT की स्थापना 2010 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने की थी, ताकि रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों का अधूरा कार्य पूरा किया जा सके। रवांडा न्यायाधिकरण ने गृहयुद्ध के दौरान तुत्सी समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार के जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया, जबकि यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में न्याय सुनिश्चित किया।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अंतरराष्ट्रीय न्याय तंत्रों की प्रासंगिकता और उनके भविष्य को लेकर वैश्विक बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि IRMCT का गठन इन न्यायाधिकरणों के औपचारिक रूप से बंद होने के बाद भी जवाबदेही की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था के रूप में हुआ था।

न्यायाधिकरणों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने 111 मुकदमों की सुनवाई की और 90 लोगों को दोषी ठहराया; इनमें से एक मामले की अपील अभी भी IRMCT के पास लंबित है। रवांडा न्यायाधिकरण ने लगभग 8 लाख तुत्सी लोगों और कुछ उदारवादी हूतू लोगों की हत्या से जुड़े मामलों में 86 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे — यह नरसंहार उन हूतू चरमपंथियों ने अंजाम दिया था जो उस समय रवांडा सरकार पर नियंत्रण रखते थे।

IRMCT ने न्यायाधिकरणों से कुछ मामले अपने हाथ में लेने के बाद अब तक 61 लोगों को दोषी ठहराया है। यह संख्या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जवाबदेही के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।

व्यवस्थित हस्तांतरण पर भारत का जोर

तिवारी ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे IRMCT अपने कार्यकाल के समापन की ओर बढ़ रहा है, भारत चाहता है कि इसकी जिम्मेदारियों का हस्तांतरण व्यवस्थित, प्रभावी और तय समयसीमा के भीतर हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में न्यायिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और शेष दायित्वों को पूरी तरह निभाया जाना चाहिए।

भारत का यह रुख न्याय, निष्पक्षता, समानता और कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है — और यह संदेश देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक जिम्मेदार भागीदार की भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़ा करता है — क्या भारत केवल मौजूदा तंत्र को सहारा देने तक सीमित है, या वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है? भारत ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की रोम संविधि पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे उसकी जवाबदेही-समर्थक छवि और उसकी व्यावहारिक प्रतिबद्धता के बीच एक स्पष्ट अंतर्विरोध बना हुआ है। IRMCT के समापन की प्रक्रिया जैसे-जैसे तेज होगी, वैसे-वैसे यह सवाल और प्रासंगिक होगा कि भारत वैश्विक न्याय संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका लेगा या केवल समर्थक की।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IRMCT क्या है और इसे क्यों बनाया गया?
IRMCT यानी इंटरनेशनल रेजिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स एक संयुक्त राष्ट्र संस्था है, जिसे 2010 में सुरक्षा परिषद ने रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के आपराधिक न्यायाधिकरणों का अधूरा काम पूरा करने के लिए स्थापित किया था। यह पीड़ितों की सुरक्षा, राष्ट्रीय अदालतों को सहयोग और न्यायाधिकरणों के अभिलेखों के प्रबंधन का कार्य करता है।
भारत ने IRMCT के समर्थन में क्या कहा?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि IRMCT को अपने शेष दायित्व पूरे करने चाहिए और इसकी जिम्मेदारियों का हस्तांतरण न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता किए बिना व्यवस्थित तरीके से होना चाहिए। भारत ने पीड़ितों के हितों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
रवांडा और यूगोस्लाविया न्यायाधिकरणों ने क्या हासिल किया?
रवांडा न्यायाधिकरण ने लगभग 8 लाख तुत्सी लोगों की हत्या से जुड़े मामलों में 86 लोगों पर आरोप तय किए, जबकि यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने 111 मुकदमे सुने और 90 लोगों को दोषी ठहराया। IRMCT ने इन मामलों को अपने हाथ में लेने के बाद अब तक 61 लोगों को दोषी ठहराया है।
IRMCT के समापन के बाद इसकी जिम्मेदारियाँ किसे मिलेंगी?
भारत ने कहा है कि IRMCT की जिम्मेदारियों का हस्तांतरण व्यवस्थित, प्रभावी और तय समयसीमा के भीतर होना चाहिए। हालांकि, किन संस्थाओं या देशों को ये जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएंगी, इसका विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जवाबदेही में भारत की क्या भूमिका है?
भारत संयुक्त राष्ट्र मंचों पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जवाबदेही तंत्रों का समर्थन करता आया है और IRMCT जैसी संस्थाओं को सक्रिय रखने की वकालत करता है। भारत ने न्याय, निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुसार इन तंत्रों के संचालन पर जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले