FATF पर पाक के हमलों को भारत ने किया खारिज, कहा — आलोचनाएं 'जांच के डर' से प्रेरित
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 30 जून 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगरानी रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) पर होने वाले हमले अक्सर 'जांच के डर' से प्रेरित होते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया जब पाकिस्तान FATF पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाता रहा है।
भारत का FATF को खुला समर्थन
पी. हरीश संयुक्त राष्ट्र के काउंटर-टेररिज्म वीक के दौरान फ्रांस के साथ भारत द्वारा सह-आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का विषय था — 'उभरते खतरों और नई तकनीकों के संदर्भ में आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास।' उन्होंने FATF को वैश्विक आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे का एक 'अनिवार्य स्तंभ' बताया।
पी. हरीश ने कहा, 'इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिशें अक्सर वास्तविक प्रक्रिया संबंधी चिंताओं से अधिक, जांच के डर को दर्शाती हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि FATF का काम 'तकनीकी, साक्ष्य-आधारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानकों पर आधारित' है।
पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना
हालांकि पी. हरीश ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत कथित तौर पर स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर माना गया। पाकिस्तान पर पहले FATF की 'ग्रे सूची' में रखे जाने के बाद उसने इस संस्था पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया था। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव में ग्रे सूची से बाहर आने के लिए कठोर शर्तें माननी पड़ी थीं, और वह अब भी FATF तथा उसके सहयोगी एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है।
पी. हरीश ने कहा, 'हमारा इतिहास दिखाता है कि गंभीर आतंकवादी वित्तपोषण जोखिम कभी भी अनाम रूप से सामने नहीं आए हैं — इन्हें कुछ राज्य तत्वों सहित प्रायोजित किया गया है।' गौरतलब है कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है।
अनुपालन पर भारत का कड़ा रुख
पी. हरीश ने उन देशों को स्पष्ट संदेश दिया जो FATF की जांच पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'जिन देशों की रिपोर्टिंग में कमियां पाई जाती हैं, उन्हें उन कमियों को दूर करना चाहिए, घरेलू प्रवर्तन को मजबूत करना चाहिए, वित्तीय पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए और आतंक वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई दिखानी चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा, 'FATF की जांच का जवाब संयुक्त राष्ट्र मंचों पर राजनीतिक सक्रियता नहीं, बल्कि वास्तविक अनुपालन है।' उन्होंने यह भी कहा कि जो देश अपने क्षेत्र, संस्थानों या वित्तीय चैनलों का आतंकवाद के लिए दुरुपयोग होने देते हैं, उन्हें 'अस्थिरता का निर्यात बंद कर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्व निभाने चाहिए।'
डिजिटल खतरों पर भारत की तैयारी
पी. हरीश ने बताया कि नई डिजिटल तकनीकें अब आतंकी संपत्ति के प्रवाह के स्रोतों, तरीकों और माध्यमों को और अधिक जटिल बना रही हैं। इसके जवाब में भारत ने वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे में शामिल किया है और केंद्रीकृत एक्सचेंजों व उपयोगकर्ताओं के लिए सत्यापन मानकों को मजबूत किया है।
40 सदस्यीय FATF वैश्विक स्तर पर आतंकवाद वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई का नेतृत्व करती है तथा देशों की निगरानी करती है ताकि वे अवैध वित्तीय गतिविधियों के सुरक्षित ठिकाने न बनें। भारत का यह रुख वैश्विक आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।