हिंद-प्रशांत में भारत उभरा प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में, चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' को मिल रहा करारा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की समुद्री आक्रामकता के विरुद्ध भारत की समुद्री रणनीति को सबसे विश्वसनीय और प्रभावशाली प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 'नेकलेस ऑफ डायमंड्स' रणनीति, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान के साथ लॉजिस्टिक समझौते, तटीय निगरानी नेटवर्क, सेशेल्स में नौसैनिक अड्डों की व्यवस्था और 2024 से फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री इस दिशा में निर्णायक कदम माने जा रहे हैं।
भारत की विशिष्ट भूगोलिक और रणनीतिक स्थिति
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि क्वाड के अन्य सदस्य देश — अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान — भारत जैसी भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति नहीं रखते, जिससे भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक अद्वितीय भूमिका निभाता है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति मूलतः भारत को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। इसमें पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा, म्यांमार के क्याउकप्यू और बांग्लादेश के चटगांव जैसे बंदरगाह शामिल हैं, जो भारत के समुद्री क्षेत्र को घेरते हैं।
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 2008 के बाद से चीन हिंद महासागर क्षेत्र में 45 से अधिक नौसैनिक मिशन भेज चुका है और अब इस क्षेत्र में कम से कम 13 बंदरगाहों का संचालन कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति भारत के समुद्री प्रभाव को संतुलित करने और क्षेत्रीय उपस्थिति बढ़ाने के लिए तैयार की गई है।
सागर से महासागर: भारत की समुद्री नीति का विकास
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी देशों के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' (FOIP) ढाँचे में अक्सर यह नज़रअंदाज़ किया जाता है कि भारत इस क्षेत्र में केवल एक सहयोगी के रूप में नहीं, बल्कि अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण के साथ शामिल हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में मॉरीशस के पोर्ट लुईस में 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) अवधारणा पेश की थी, जो बाद में भारत की समुद्री नीति का आधार बनी।
इस नीति के तहत भारत ने अदन की खाड़ी में एंटी-पाइरेसी अभियान चलाए। कोविड-19 महामारी के दौरान मॉरीशस, मालदीव, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स को सहायता भेजी गई। इसके अतिरिक्त, श्रीलंका से लेकर बांग्लादेश तक तटीय निगरानी रडार नेटवर्क स्थापित किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 में भारत ने इस पहल को 'महासागर' (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) में रूपांतरित किया — एक ऐसा फ्रेमवर्क जिसे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के समावेशी विकल्प के तौर पर विशेष रूप से तैयार किया गया है।
अफ्रीका और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अप्रैल 2025 में तंजानिया के साथ आयोजित 'AIKEYME' (अफ्रीका-इंडिया की मैरीटाइम एंगेजमेंट) नौसैनिक अभ्यास में दस अफ्रीकी देश एक साथ शामिल हुए। इसके समानांतर, भारत के 'IOS सागर मिशन' ने अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई नौसेनाओं के साथ मिलकर EEZ में गश्त की। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब चीन हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है।
भारत का स्वतंत्र रुख: FOIP की विश्वसनीयता का आधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के साथ औपचारिक सुरक्षा गठबंधन में शामिल होने से भारत का इनकार ही FOIP को ग्लोबल साउथ में पश्चिमी देशों को रोकने वाले प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं देखा जाने देता। विश्लेषकों का कहना है कि 'FOIP को अक्सर चीन का मुकाबला करने के एक फ्रेमवर्क के तौर पर देखा जाता है और पूरे इलाके में इसकी विश्वसनीयता के लिए समावेशिता पर जोर देना ज़रूरी है। भारत का अपनी शर्तों पर हिस्सा लेना, आसियान, अफ्रीका और दक्षिण एशिया के अलग-थलग देशों को यह संकेत देता है कि FOIP कोई दूसरे शीत युद्ध का विकल्प नहीं है।'
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है और भारत की समुद्री कूटनीति वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही है।