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भारत का अनोखा उपहार: यूएन जिनेवा के एरियाना पार्क में पहुंचे पाँच मोर, ४४ साल बाद दोहराई परंपरा

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भारत का अनोखा उपहार: यूएन जिनेवा के एरियाना पार्क में पहुंचे पाँच मोर, ४४ साल बाद दोहराई परंपरा

सारांश

४४ साल बाद भारत ने फिर जिनेवा को मोर भेंट किए — इस बार पाँच, संयुक्त राष्ट्र के नीले-सफेद रंगों में। यह महज उपहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कूटनीति का जीवंत प्रतीक है।

मुख्य बातें

अरिंदम बागची ने 7 अगस्त 2026 को यूएनओजी महानिदेशक तातियाना वालोवाया को पाँच मोर भेंट किए।
इनमें चार नीले और एक सफेद मोर हैं — संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक रंगों का प्रतीक।
यह दूसरी बार है जब भारत ने यूएन जिनेवा को मोर उपहार में दिए हैं; इससे पहले 1981 में एक जोड़ी भेंट की गई थी।
मोर तीन महीने सुरक्षित बाड़ों में रहेंगे, फिर एरियाना पार्क में स्वतंत्र रूप से विचरण करेंगे।
बायो पार्क जिनेवा ने मोरों की व्यवस्था और प्रारंभिक देखभाल में सहयोग दिया।
यूएन जिनेवा ने 9 अगस्त को मोरों की तस्वीरें 'सप्ताह की फोटो' के रूप में साझा कीं।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने 7 अगस्त 2026 को जिनेवा में एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जिनेवा (यूएनओजी) की महानिदेशक तातियाना वालोवाया को भारत के राष्ट्रीय पक्षी — भारतीय मोर (पावो क्रिस्टेटस) — के पाँच मोर भेंट किए। इनमें चार नीले और एक सफेद मोर शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक रंगों — नीले और सफेद — का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करते हैं। 9 अगस्त को यूएन जिनेवा ने इन मोरों के एरियाना पार्क पहुँचने की तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें 'सप्ताह की फोटो' घोषित किया।

समारोह और सौंपने की प्रक्रिया

जिनेवा में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बागची ने वालोवाया को औपचारिक रूप से मोर सौंपे। दोनों अधिकारियों ने बायो पार्क जिनेवा के प्रबंधन का आभार जताया, जिसने मोरों की व्यवस्था करने और उनकी प्रारंभिक देखभाल में सहयोग दिया। वालोवाया ने इस पहल के लिए भारत सरकार की सराहना की।

महानिदेशक वालोवाया ने कहा, "हम पाँच नए मोरों का स्वागत करके बहुत प्रसन्न हैं। इनमें चार नीले और एक सफेद मोर है, जो संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमने उनके लिए एक अस्थायी घर बनाया है। वे अगले तीन महीनों तक यहाँ रहेंगे और उसके बाद उन्हें एरियाना पार्क में खुलकर घूमने की अनुमति होगी।"

एक सदी पुरानी परंपरा और ४४ साल का अंतराल

मोर एक सदी से भी अधिक समय से एरियाना पार्क का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, जो यूएन जिनेवा का मुख्य परिसर है। यह दूसरी बार है जब भारत ने यूएन जिनेवा को मोर उपहार में दिए हैं — इससे पहले 1981 में एक जोड़ी मोर भेंट किए गए थे। यानी ४४ वर्षों के अंतराल के बाद यह परंपरा फिर से जीवंत हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत बहुपक्षीय मंचों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति और सांस्कृतिक कूटनीति को नई ऊँचाई देने में जुटा है।

भारतीय मिशन का संदेश

जिनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यह उपहार "भारत की बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रतीक" है। मिशन ने कहा कि भारतीय मोर — जो सुंदरता, गरिमा और मजबूती का प्रतीक माना जाता है — यूएन जिनेवा की जैव विविधता को समृद्ध बनाता है और जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

मिशन के बयान के अनुसार, यह कदम संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत करता है तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति उसके समर्थन को दोहराता है।

वयस्क होने तक सुरक्षित देखभाल

भारतीय मिशन ने स्पष्ट किया कि वयस्क होने तक इन मोरों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाएगा। तीन महीने की देखभाल अवधि के बाद इन्हें एरियाना पार्क में स्वतंत्र रूप से विचरण करने दिया जाएगा। गौरतलब है कि एरियाना पार्क यूएन जिनेवा परिसर में स्थित है और यहाँ के मोर अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए एक विशेष आकर्षण रहे हैं।

भारत की इस सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर व्यापक सराहना मिल रही है, और आने वाले समय में यह पहल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति की एक सोची-समझी अभिव्यक्ति है — जहाँ प्रतीकात्मकता और रणनीति एक साथ चलती हैं। संयुक्त राष्ट्र के नीले-सफेद रंगों के मोर चुनना महज संयोग नहीं है। हालाँकि, यह भी उतना ही सच है कि ऐसे प्रतीकात्मक कदम तब अधिक प्रभावी होते हैं जब वे ठोस बहुपक्षीय नीतिगत पहलों के साथ हों। भारत की बहुपक्षीय साख को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक कूटनीति जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने यूएन जिनेवा को मोर उपहार में क्यों दिए?
भारत ने यूएन जिनेवा के साथ अपनी साझेदारी और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए पाँच मोर उपहार में दिए। यह कदम भारत की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कूटनीति का हिस्सा है, और एरियाना पार्क में मोरों की एक सदी पुरानी उपस्थिति की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
क्या भारत ने पहले भी यूएन जिनेवा को मोर भेंट किए हैं?
हाँ, यह दूसरी बार है। भारत ने पहली बार 1981 में यूएन जिनेवा को एक जोड़ी मोर उपहार में दिए थे। इस बार 44 साल बाद यह परंपरा दोहराई गई है, इस बार पाँच मोरों के साथ।
एरियाना पार्क में पहुँचे मोर कैसे रखे जाएंगे?
वयस्क होने तक इन मोरों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाएगा। महानिदेशक वालोवाया के अनुसार, अगले तीन महीनों तक उनके लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है, जिसके बाद उन्हें एरियाना पार्क में स्वतंत्र रूप से विचरण करने दिया जाएगा।
इन मोरों में नीले और सफेद रंग का क्या महत्व है?
पाँच मोरों में चार नीले और एक सफेद मोर हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक रंगों — नीले और सफेद — का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह प्रतीकात्मक चयन भारत और यूएन के बीच साझेदारी को दर्शाता है।
इस समारोह में कौन-कौन शामिल थे?
7 अगस्त 2026 को आयोजित समारोह में जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची और यूएनओजी की महानिदेशक तातियाना वालोवाया मुख्य रूप से उपस्थित थे। बायो पार्क जिनेवा के प्रबंधन ने भी मोरों की व्यवस्था में सहयोग दिया।
राष्ट्र प्रेस
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