8 अगस्त 2026
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भारत के 5 मोर पहुंचे जिनेवा के 'पैलेस डेस नेशंस', दशकों पुरानी राजनयिक परंपरा जीवित

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भारत के 5 मोर पहुंचे जिनेवा के 'पैलेस डेस नेशंस', दशकों पुरानी राजनयिक परंपरा जीवित

सारांश

भारत ने जिनेवा के 'पैलेस डेस नेशंस' को पाँच मोर उपहार में दिए — चार नीले, एक दुर्लभ सफेद। 1981 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई परंपरा चार दशक बाद फिर जीवित हुई। तीन महीने के अनुकूलन के बाद ये 'चमकदार राजनयिक' एरियाना पार्क में स्वतंत्र रूप से विचरण करेंगे।

मुख्य बातें

भारत ने 8 अगस्त 2025 को जिनेवा के 'पैलेस डेस नेशंस' को पाँच मोर — चार नीले और एक दुर्लभ सफेद — उपहार में दिए।
इस भेंट से परिसर में मोरों की संख्या पुनर्स्थापित की गई, जो घटकर केवल एक रह गई थी।
यह परंपरा 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी, जब उन्होंने जिनेवा को दो मोर भेजे थे।
मोरों को फिलहाल एरियाना पार्क के पक्षीघर में रखा गया है; तीन महीने बाद स्वतंत्र विचरण की अनुमति मिलेगी।
यूएन जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया और भारतीय राजदूत अरिंदम बागची ने इस पहल का स्वागत किया।

भारत की ओर से उपहार में दिए गए पाँच मोर — चार नीले और एक दुर्लभ सफेद — 8 अगस्त 2025 को जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक परिसर 'पैलेस डेस नेशंस' पहुँचे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस भेंट को दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का 'एक और आयाम' करार दिया। इस पहल से परिसर में मोरों की घटती संख्या — जो केवल एक रह गई थी — को फिर से बढ़ाने का लक्ष्य है।

राजनयिक परंपरा का नया अध्याय

यह भेंट उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जो संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से भी पहले की है। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिनेवा को दो मोर भेजे थे। चार दशक से अधिक समय बाद, भारत ने इस जीवंत राजनयिक परंपरा को पुनर्जीवित किया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कहा, "यह भारतीय मिशन के लिए वास्तव में गौरव की बात है कि हम यूएन जिनेवा को पाँच मोर 'पावो क्रिस्टेटस' उपहार में दे पा रहे हैं। हमने 1981 में भी मोर उपहार में दिए थे और उसे जारी रखते हुए हमें खुशी हो रही है।"

मोरों का स्वागत और नया आशियाना

फिलहाल इन पाँचों मोरों को एरियाना पार्क के विशाल पक्षीघर (एवियरी) में रखा गया है, ताकि वे जिनेवा की जलवायु और नए परिवेश के अभ्यस्त हो सकें। तीन महीने के अनुकूलन काल के बाद उन्हें परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने की अनुमति दी जाएगी।

यूएन जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने इन नए मेहमानों का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा, "हम पाँच नए मोरों का स्वागत करके बहुत खुश हैं। चार नीले और एक सफेद — ये संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों को भी रेखांकित करते हैं। वे अगले तीन महीने यहाँ रहेंगे और उसके बाद उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने और एरियाना पार्क की मेहमाननवाजी का आनंद लेने की अनुमति दी जाएगी।"

भारत के स्थायी मिशन की प्रतिक्रिया

भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर लिखा, "साझेदारी का एक और आयाम शुरू हुआ। यूएन जिनेवा को हमने उपहार स्वरूप मोर भेंट किए। राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण मोरों का हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान है।" यूएन जिनेवा कार्यालय ने इन्हें 'जिनेवा के सबसे नए और सबसे चमकदार राजनयिक' कहकर परिचय कराया।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि भारतीय मोर (पावो क्रिस्टेटस) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और इसे सांस्कृतिक तथा राजनयिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। यह सजीव भेंट भारत-संयुक्त राष्ट्र संबंधों में एक अनूठा और भावनात्मक आयाम जोड़ती है। तीन महीने बाद जब ये मोर 'पैलेस डेस नेशंस' के विशाल परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगेंगे, तब यह परंपरा अपने नए रूप में पूरी तरह जीवंत हो जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति की उस रणनीति का हिस्सा है जो औपचारिक संधियों से परे जाकर सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाती है। 1981 से 2025 के बीच का चार दशक का अंतराल यह भी बताता है कि ऐसी परंपराएँ निरंतरता के बिना अपना असर खो देती हैं — परिसर में मोरों की संख्या एक तक सिमट जाना इसी का प्रमाण है। असली सवाल यह है कि क्या भारत इन 'राजनयिक मोरों' की देखभाल और उत्तराधिकार की दीर्घकालिक जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करेगा, या यह फिर एक बार की सुर्खी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने यूएन जिनेवा को मोर उपहार में क्यों दिए?
भारत ने 'पैलेस डेस नेशंस' परिसर में मोरों की घटती संख्या को फिर से बढ़ाने और 1981 से चली आ रही राजनयिक परंपरा को जारी रखने के लिए पाँच मोर उपहार में दिए। यह भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सांस्कृतिक साझेदारी का प्रतीक भी है।
जिनेवा में मोर रखने की परंपरा कब से है?
यह परंपरा संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से भी पहले की बताई जाती है। भारत ने 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जिनेवा को दो मोर भेजे थे। 2025 में यह परंपरा चार दशक के अंतराल के बाद फिर से जीवित की गई है।
इस बार कितने और किस प्रकार के मोर भेजे गए हैं?
भारत ने कुल पाँच मोर भेजे हैं — चार नीले और एक दुर्लभ सफेद नर मयूर। इनका वैज्ञानिक नाम 'पावो क्रिस्टेटस' है और ये भारत के राष्ट्रीय पक्षी हैं।
ये मोर अभी कहाँ हैं और कब परिसर में घूम सकेंगे?
फिलहाल इन्हें एरियाना पार्क के विशाल पक्षीघर में रखा गया है ताकि वे नए वातावरण के अभ्यस्त हो सकें। लगभग तीन महीने के अनुकूलन काल के बाद इन्हें 'पैलेस डेस नेशंस' परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने की अनुमति दी जाएगी।
यूएन जिनेवा की महानिदेशक ने इस उपहार पर क्या कहा?
यूएन जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने कहा कि वे पाँच नए मोरों का स्वागत करके बहुत खुश हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चार नीले और एक सफेद मोर संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों को भी रेखांकित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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