भारत के 5 मोर पहुंचे जिनेवा के 'पैलेस डेस नेशंस', दशकों पुरानी राजनयिक परंपरा जीवित
सारांश
मुख्य बातें
भारत की ओर से उपहार में दिए गए पाँच मोर — चार नीले और एक दुर्लभ सफेद — 8 अगस्त 2025 को जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक परिसर 'पैलेस डेस नेशंस' पहुँचे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस भेंट को दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का 'एक और आयाम' करार दिया। इस पहल से परिसर में मोरों की घटती संख्या — जो केवल एक रह गई थी — को फिर से बढ़ाने का लक्ष्य है।
राजनयिक परंपरा का नया अध्याय
यह भेंट उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जो संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से भी पहले की है। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिनेवा को दो मोर भेजे थे। चार दशक से अधिक समय बाद, भारत ने इस जीवंत राजनयिक परंपरा को पुनर्जीवित किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने कहा, "यह भारतीय मिशन के लिए वास्तव में गौरव की बात है कि हम यूएन जिनेवा को पाँच मोर 'पावो क्रिस्टेटस' उपहार में दे पा रहे हैं। हमने 1981 में भी मोर उपहार में दिए थे और उसे जारी रखते हुए हमें खुशी हो रही है।"
मोरों का स्वागत और नया आशियाना
फिलहाल इन पाँचों मोरों को एरियाना पार्क के विशाल पक्षीघर (एवियरी) में रखा गया है, ताकि वे जिनेवा की जलवायु और नए परिवेश के अभ्यस्त हो सकें। तीन महीने के अनुकूलन काल के बाद उन्हें परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने की अनुमति दी जाएगी।
यूएन जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वालोवाया ने इन नए मेहमानों का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा, "हम पाँच नए मोरों का स्वागत करके बहुत खुश हैं। चार नीले और एक सफेद — ये संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक नीले और सफेद रंगों को भी रेखांकित करते हैं। वे अगले तीन महीने यहाँ रहेंगे और उसके बाद उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने और एरियाना पार्क की मेहमाननवाजी का आनंद लेने की अनुमति दी जाएगी।"
भारत के स्थायी मिशन की प्रतिक्रिया
भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर लिखा, "साझेदारी का एक और आयाम शुरू हुआ। यूएन जिनेवा को हमने उपहार स्वरूप मोर भेंट किए। राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण मोरों का हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान है।" यूएन जिनेवा कार्यालय ने इन्हें 'जिनेवा के सबसे नए और सबसे चमकदार राजनयिक' कहकर परिचय कराया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि भारतीय मोर (पावो क्रिस्टेटस) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और इसे सांस्कृतिक तथा राजनयिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। यह सजीव भेंट भारत-संयुक्त राष्ट्र संबंधों में एक अनूठा और भावनात्मक आयाम जोड़ती है। तीन महीने बाद जब ये मोर 'पैलेस डेस नेशंस' के विशाल परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगेंगे, तब यह परंपरा अपने नए रूप में पूरी तरह जीवंत हो जाएगी।