जलवायु जोखिम से सुरक्षा के लिए भारत ने तंजानिया को दिए ₹8.4 लाख डॉलर, भारत-यूएन कोष से मिलेगा अनुदान
सारांश
मुख्य बातें
भारत के संयुक्त राष्ट्र स्थायी मिशन ने 1 अगस्त को घोषणा की कि भारत, तंजानिया को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न वित्तीय जोखिमों से निपटने के लिए 8,40,000 डॉलर (लगभग ₹7 करोड़) का अनुदान प्रदान करेगा। यह सहायता राशि भारत-यूएन विकास कोष की कॉमनवेल्थ विंडो के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जो विशेष रूप से राष्ट्रमंडल सदस्य देशों के लिए निर्धारित है।
अनुदान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
भारत-यूएन विकास कोष की स्थापना 2017 में 15 करोड़ डॉलर की प्रारंभिक राशि के साथ की गई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक दक्षिण के देशों को विकास सहायता प्रदान करना है। इस कोष की विशिष्टता यह है कि अनुदान प्राप्त करने वाला देश स्वयं तय करता है कि सहायता राशि का उपयोग किस प्रयोजन के लिए किया जाएगा — जो अधिकांश पारंपरिक विकास सहायता कार्यक्रमों से एक महत्वपूर्ण अंतर है, जहाँ आमतौर पर दाता देश या संस्थाएँ ही उद्देश्य निर्धारित करती हैं।
भारतीय मिशन ने कहा कि भारत तंजानिया सरकार की इस प्रस्तावित परियोजना के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का पूर्ण समर्थन करता है, जो जलवायु संबंधी जोखिमों से लोगों की जान और आजीविका की रक्षा करने में एक प्रभावी माध्यम साबित होगी।
राष्ट्रीय स्वामित्व और परियोजना नेतृत्व
मिशन के अनुसार, इस परियोजना में राष्ट्रीय स्वामित्व सुनिश्चित किया गया है — तंजानिया के प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आपदा प्रबंधन विभाग इस परियोजना का नेतृत्व करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परियोजना देश की प्राथमिकताओं और रणनीतिक योजनाओं के अनुरूप हो।
भारतीय मिशन संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के साथ साझेदारी में काम करेगा। इस साझेदारी का लक्ष्य तंजानिया के नेशनल डिजास्टर रिस्क फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क एंड इम्प्लीमेंटेशन प्लान 2031 (NDRFFIP) को समर्थन देना है।
किसे होगा फायदा
यह पाँच वर्षीय योजना विशेष रूप से महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और कम आय वर्ग के समुदायों सहित कमज़ोर तबकों की वित्तीय तैयारी और जलवायु अनुकूलन क्षमता को मज़बूत करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम को औपचारिक रूप से 'क्लाइमेट इंश्योरेंस एंड रेजिलिएंस प्रोग्राम (CIRP)' के नाम से जाना जाता है।
तंजानिया के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, नेशनल डिजास्टर रिस्क फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क (DRFF) 2025/26–2030/31 के मुख्य सिद्धांतों में समय पर फंडिंग, जोखिम स्तरीकरण, कुशल वितरण, अनुकूली क्षमता निर्माण और बहु-हितधारक सहभागिता शामिल हैं।
आपदा प्रबंधन में बड़ा बदलाव
तंजानिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस ढाँचे को एक ऐतिहासिक बदलाव बताया है — यह प्रतिक्रियाशील आपदा प्रबंधन से सक्रिय वित्तीय तैयारी की ओर संक्रमण को दर्शाता है। इसका उद्देश्य आपदा की तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति के लिए सही, समयबद्ध और टिकाऊ वित्त पोषण सुनिश्चित करना है, ताकि नागरिकों की जान और रोज़ी-रोटी की रक्षा हो सके और देश अपने विकास लक्ष्य हासिल कर सके।
यह सहायता ऐसे समय में आई है जब जलवायु परिवर्तन के कारण अफ्रीकी देशों में बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता लगातार बढ़ रही है। भारत की यह पहल दक्षिण-दक्षिण सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।