भारत-ग्रीनलैंड सहयोग: राजदूत मनीष प्रभात ने नुउक में संसद अध्यक्ष से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
डेनमार्क में भारत के राजदूत मनीष प्रभात ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को नुउक में ग्रीनलैंड की संसद के अध्यक्ष किम मारियस कील्सन से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने माइनिंग में निवेश, कुशल श्रम शक्ति की आपूर्ति और सांस्कृतिक सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-ग्रीनलैंड साझेदारी को मज़बूत करने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक सक्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।
बैठक के प्रमुख एजेंडे
भारतीय दूतावास ने एक्स पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि राजदूत मनीष प्रभात और अध्यक्ष किम मारियस कील्सन के बीच चर्चा मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित रही। पहला — माइनिंग क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं; दूसरा — हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी उद्योगों के लिए भारत से कुशल मानव संसाधन की आपूर्ति; और तीसरा — पर्यटन, फिल्म निर्माण, योग और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में सांस्कृतिक सहयोग। अध्यक्ष कील्सन ने इस दौरान ग्रीनलैंड के नागरिकों के विकास और समृद्धि से जुड़े अपने दीर्घकालिक विज़न को भी साझा किया।
आर्कटिक अनुसंधान पर भी हुई बात
दौरे के पहले दिन, सोमवार को राजदूत प्रभात ने ग्रीनलैंड के पर्यावरण, प्रकृति, ऊर्जा और रिसर्च विभाग की स्थायी सचिव नटुक लुंड मीरे से भी मुलाकात की। इस बैठक में ग्रीनलैंड के अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक समुदाय के साथ मिलकर आर्कटिक रिसर्च में भारत की बढ़ती रुचि पर विस्तार से चर्चा हुई। गौरतलब है कि भारत पहले से ही आर्कटिक नीति-2022 के तहत इस क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में सक्रिय है।
'नमस्ते ग्रीनलैंड' सांस्कृतिक कार्यक्रम
भारतीय दूतावास ने सोमवार को जीयूएक्स नुउक हाई स्कूल में 'नमस्ते ग्रीनलैंड' शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें स्थानीय पुलिस की योग विशेषज्ञ पेट्रीजिया मैडसेन ने एक योग सत्र संचालित किया, जिसमें राजदूत मनीष प्रभात स्वयं भी सम्मिलित हुए। अपने संबोधन में राजदूत ने स्वस्थ जीवनशैली में योग की भूमिका पर प्रकाश डाला और भविष्य में ग्रीनलैंड में और अधिक योग कार्यशालाएं आयोजित करने की योजनाओं की जानकारी दी।
आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पर संवाद
इस सांस्कृतिक प्रेजेंटेशन में एक स्थानीय विशेषज्ञ ने आयुर्वेद पर भी व्याख्यान दिया, जिसमें भारत और ग्रीनलैंड की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच उल्लेखनीय समानताओं को रेखांकित किया गया। यह सॉफ्ट-डिप्लोमेसी का एक सोचा-समझा प्रयास प्रतीत होता है, जो दोनों समाजों के बीच सांस्कृतिक सेतु बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
आगे क्या
यह बहु-आयामी दौरा — जिसमें संसदीय बैठक, वैज्ञानिक संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम तीनों शामिल हैं — भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें आर्कटिक और नॉर्डिक क्षेत्र में अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने का इरादा झलकता है। माइनिंग और श्रम शक्ति से जुड़े ठोस समझौतों की दिशा में आगे की वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।