22 सितंबर 2026
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भारत-ग्रीनलैंड सहयोग: राजदूत मनीष प्रभात ने नुउक में संसद अध्यक्ष से की अहम बैठक

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भारत-ग्रीनलैंड सहयोग: राजदूत मनीष प्रभात ने नुउक में संसद अध्यक्ष से की अहम बैठक

सारांश

भारत के राजदूत मनीष प्रभात का नुउक दौरा महज शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह आर्कटिक में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा की झलक है। माइनिंग निवेश, कुशल मानव संसाधन और आर्कटिक रिसर्च से लेकर 'नमस्ते ग्रीनलैंड' तक — भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर ग्रीनलैंड से रिश्ते मज़बूत करने की कोशिश की।

मुख्य बातें

राजदूत मनीष प्रभात ने 22 सितंबर 2026 को नुउक में ग्रीनलैंड संसद अध्यक्ष किम मारियस कील्सन से मुलाकात की।
चर्चा में माइनिंग में निवेश , हेल्थकेयर व हॉस्पिटैलिटी के लिए कुशल श्रम शक्ति और सांस्कृतिक सहयोग के संभावित क्षेत्र शामिल रहे।
स्थायी सचिव नटुक लुंड मीरे से आर्कटिक रिसर्च में भारतीय भागीदारी पर अलग बैठक हुई।
जीयूएक्स नुउक हाई स्कूल में 'नमस्ते ग्रीनलैंड' कार्यक्रम के तहत योग सत्र एवं आयुर्वेद पर व्याख्यान आयोजित किया गया।
यह दौरा भारत की आर्कटिक नीति-2022 के तहत नॉर्डिक क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।

डेनमार्क में भारत के राजदूत मनीष प्रभात ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को नुउक में ग्रीनलैंड की संसद के अध्यक्ष किम मारियस कील्सन से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने माइनिंग में निवेश, कुशल श्रम शक्ति की आपूर्ति और सांस्कृतिक सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-ग्रीनलैंड साझेदारी को मज़बूत करने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक सक्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।

बैठक के प्रमुख एजेंडे

भारतीय दूतावास ने एक्स पर साझा की गई पोस्ट में बताया कि राजदूत मनीष प्रभात और अध्यक्ष किम मारियस कील्सन के बीच चर्चा मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित रही। पहला — माइनिंग क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं; दूसरा — हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी उद्योगों के लिए भारत से कुशल मानव संसाधन की आपूर्ति; और तीसरा — पर्यटन, फिल्म निर्माण, योग और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों में सांस्कृतिक सहयोग। अध्यक्ष कील्सन ने इस दौरान ग्रीनलैंड के नागरिकों के विकास और समृद्धि से जुड़े अपने दीर्घकालिक विज़न को भी साझा किया।

आर्कटिक अनुसंधान पर भी हुई बात

दौरे के पहले दिन, सोमवार को राजदूत प्रभात ने ग्रीनलैंड के पर्यावरण, प्रकृति, ऊर्जा और रिसर्च विभाग की स्थायी सचिव नटुक लुंड मीरे से भी मुलाकात की। इस बैठक में ग्रीनलैंड के अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक समुदाय के साथ मिलकर आर्कटिक रिसर्च में भारत की बढ़ती रुचि पर विस्तार से चर्चा हुई। गौरतलब है कि भारत पहले से ही आर्कटिक नीति-2022 के तहत इस क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में सक्रिय है।

'नमस्ते ग्रीनलैंड' सांस्कृतिक कार्यक्रम

भारतीय दूतावास ने सोमवार को जीयूएक्स नुउक हाई स्कूल में 'नमस्ते ग्रीनलैंड' शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें स्थानीय पुलिस की योग विशेषज्ञ पेट्रीजिया मैडसेन ने एक योग सत्र संचालित किया, जिसमें राजदूत मनीष प्रभात स्वयं भी सम्मिलित हुए। अपने संबोधन में राजदूत ने स्वस्थ जीवनशैली में योग की भूमिका पर प्रकाश डाला और भविष्य में ग्रीनलैंड में और अधिक योग कार्यशालाएं आयोजित करने की योजनाओं की जानकारी दी।

आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पर संवाद

इस सांस्कृतिक प्रेजेंटेशन में एक स्थानीय विशेषज्ञ ने आयुर्वेद पर भी व्याख्यान दिया, जिसमें भारत और ग्रीनलैंड की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच उल्लेखनीय समानताओं को रेखांकित किया गया। यह सॉफ्ट-डिप्लोमेसी का एक सोचा-समझा प्रयास प्रतीत होता है, जो दोनों समाजों के बीच सांस्कृतिक सेतु बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

आगे क्या

यह बहु-आयामी दौरा — जिसमें संसदीय बैठक, वैज्ञानिक संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम तीनों शामिल हैं — भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें आर्कटिक और नॉर्डिक क्षेत्र में अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने का इरादा झलकता है। माइनिंग और श्रम शक्ति से जुड़े ठोस समझौतों की दिशा में आगे की वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि खनिज संसाधनों और वैज्ञानिक सहयोग का अगला मोर्चा मान रहा है। दिलचस्प यह है कि जिस समय अमेरिका ग्रीनलैंड पर अपने भू-राजनीतिक दावे तेज़ कर रहा है, उसी दौर में भारत वहाँ सॉफ्ट-पावर और आर्थिक सहभागिता के ज़रिए शांत लेकिन सुनियोजित पहुँच बना रहा है। माइनिंग और श्रम-शक्ति जैसे ठोस आर्थिक मुद्दों को योग और आयुर्वेद जैसे सांस्कृतिक तत्वों के साथ जोड़ना भारतीय कूटनीति की परिपक्व रणनीति को दर्शाता है — हालाँकि असली कसौटी तब होगी जब इन चर्चाओं का परिणाम किसी ठोस द्विपक्षीय करार में सामने आएगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत मनीष प्रभात ने ग्रीनलैंड में किन मुद्दों पर चर्चा की?
राजदूत मनीष प्रभात ने नुउक में ग्रीनलैंड संसद अध्यक्ष किम मारियस कील्सन से माइनिंग में निवेश, हेल्थकेयर व हॉस्पिटैलिटी के लिए कुशल श्रम शक्ति की आपूर्ति और पर्यटन, फिल्म निर्माण, योग व आयुर्वेद में सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा की। यह मुलाकात 22 सितंबर 2026 को हुई।
भारत और ग्रीनलैंड के बीच आर्कटिक रिसर्च पर क्या बातचीत हुई?
राजदूत प्रभात ने ग्रीनलैंड के पर्यावरण, प्रकृति, ऊर्जा और रिसर्च विभाग की स्थायी सचिव नटुक लुंड मीरे से मुलाकात कर आर्कटिक अनुसंधान में भारत की रुचि और ग्रीनलैंड के वैज्ञानिक समुदाय के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
'नमस्ते ग्रीनलैंड' कार्यक्रम क्या था?
'नमस्ते ग्रीनलैंड' भारतीय दूतावास द्वारा जीयूएक्स नुउक हाई स्कूल में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, जिसमें स्थानीय पुलिस की योग विशेषज्ञ पेट्रीजिया मैडसेन ने योग सत्र संचालित किया और एक स्थानीय विशेषज्ञ ने आयुर्वेद पर व्याख्यान दिया। इसका उद्देश्य भारत और ग्रीनलैंड की पारंपरिक संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करना था।
यह दौरा भारत की आर्कटिक नीति के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत ने 2022 में अपनी आर्कटिक नीति जारी की थी, जिसमें इस क्षेत्र में वैज्ञानिक, आर्थिक और कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रीनलैंड, जो खनिज संसाधनों से समृद्ध है, इस नीति के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है।
ग्रीनलैंड के संसद अध्यक्ष ने बैठक में क्या कहा?
ग्रीनलैंड के संसद अध्यक्ष किम मारियस कील्सन ने बैठक में अपने देशवासियों के विकास और समृद्धि के लिए ग्रीनलैंड के दीर्घकालिक विज़न को विस्तार से साझा किया, जो भारत के साथ सहयोग की संभावनाओं से जुड़ा था।
राष्ट्र प्रेस
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