यूएन में भारत की परमाणु निरस्त्रीकरण प्रतिबद्धता, सिबी जॉर्ज ने रखा देश का पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक बार फिर परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व और इनके पूर्ण उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आयोजित उच्चस्तरीय पूर्ण सत्र में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया।
परमाणु निरस्त्रीकरण पर भारत का रुख
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि भारत सार्वभौमिक, भेदभावरहित और सत्यापन योग्य परमाणु निरस्त्रीकरण के माध्यम से परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व और उनके पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। यह भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति का केंद्रीय स्तंभ रहा है, जिसे वह प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाता आया है।
नस्लवाद विरोधी बैठक में भी भारत की भागीदारी
इससे एक दिन पूर्व, सोमवार 28 सितंबर 2026 को, सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान डरबन घोषणा और कार्ययोजना (डीडीपीए) को अपनाए जाने की 25वीं वर्षगाँठ पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, विदेशियों के प्रति घृणा (जेनोफोबिया) और इससे जुड़ी असहिष्णुता के खिलाफ भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि डीडीपीए के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संचालित एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। गौरतलब है कि यह दस्तावेज़ नस्लीय समानता और सामाजिक न्याय के लिए वैश्विक सहमति का आधार माना जाता है।
सांस्कृतिक धरोहर वापसी पर भारत का आग्रह
पिछले सप्ताह सिबी जॉर्ज ने यूएनजीए के एक उच्चस्तरीय साइड इवेंट में सांस्कृतिक धरोहरों और संपत्तियों की वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मज़बूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संपत्तियों को उनके मूल देशों और समुदायों को लौटाने तथा उनकी बहाली सुनिश्चित करने हेतु वैश्विक सहयोग को सशक्त बनाया जाना चाहिए।
यह कार्यक्रम घाना, जर्मनी और फ्रांस की सह-मेजबानी में आयोजित किया गया था, जो इस विषय पर बढ़ती वैश्विक सहमति को रेखांकित करता है। भारत के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की अनेक ऐतिहासिक कलाकृतियाँ अभी भी विदेशी संग्रहालयों में हैं।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु तनाव कई मोर्चों पर बढ़ा हुआ है और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की प्रासंगिकता पर अंतरराष्ट्रीय बहस जारी है। भारत, जो NPT का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, बावजूद इसके परमाणु निरस्त्रीकरण के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाता आया है — एक ऐसी स्थिति जिसे कुछ विश्लेषक नैतिक सुसंगति और कुछ आलोचक कूटनीतिक विरोधाभास के रूप में देखते हैं। भारत की यूएनजीए में सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति और प्रभाव को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।