देनियाया अस्पताल को भारत की SLR 600 मिलियन की अनुदान सहायता, आधुनिक मेडिकल उपकरण मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव डॉ. अनिल जासिंघे ने 14 जुलाई 2025 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत देनियाया के बेस अस्पताल को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए SLR 600 मिलियन (लगभग 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपए) की अनुदान सहायता प्रदान करेगा। यह सहायता चक्रवात 'दितवाह' के बाद श्रीलंका के पुनर्वास के लिए भारत के 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के व्यापक सहायता पैकेज का हिस्सा है।
एमओयू में क्या शामिल है
इस समझौते के अंतर्गत देनियाया के बेस अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभागों को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इनमें इमरजेंसी विभाग, ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट और स्पेशल केयर बेबी यूनिट प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही अनुदान राशि का उपयोग अस्पताल को एक सुरक्षित और आपदा-रोधी स्थान पर स्थानांतरित करने में भी किया जाएगा।
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भारत और श्रीलंका के बीच क्लाइमेट-रेज़िलिएंट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझेदारी के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव डॉ. अनिल जासिंघे के साथ एमओयू साइन करके खुशी हुई।'
चक्रवात 'दितवाह' के बाद भारत की भूमिका
यह परियोजना चक्रवात 'दितवाह' के बाद श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत की सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करती है। उच्चायुक्त झा के अनुसार, 'यह पहल एक सुरक्षित और मजबूत पड़ोसी क्षेत्र के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दर्शाती है।' गौरतलब है कि भारत ने पिछले कुछ महीनों में श्रीलंका को कई मोर्चों पर ठोस सहायता प्रदान की है।
हालिया भारत-श्रीलंका सहयोग की श्रृंखला
पिछले महीने भारत ने श्रीलंका की सेना को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मिशन में तैनाती के लिए 55 लाख अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता के अंतर्गत सैन्य उपकरण सौंपे थे। उस अवसर पर संतोष झा ने कहा था, 'भारतीय सेना की ओर से श्रीलंका की सेना को संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए सैन्य उपकरण सौंपकर खुशी हुई। श्रीलंका के अनुरोध पर भारत ने इन उपकरणों की तुरंत व्यवस्था की, जो दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में भरोसे और विश्वास को दर्शाता है।'
इससे पूर्व अप्रैल 2025 में भारत ने श्रीलंका तटरक्षक बल को दो पर्सनल वाटरक्राफ्ट और सुरक्षा उपकरण सौंपे, जिससे तटीय खोज एवं बचाव अभियानों में उनकी क्षमता में वृद्धि हुई। 24 अप्रैल 2025 को भारत ने अपनी 'आरोग्य मैत्री' पहल के तहत श्रीलंका को दो 'भीष्म' क्यूब भी प्रदान किए, जो मानवीय सहायता की निरंतरता को दर्शाता है।
आम जनता पर असर
देनियाया और उसके आसपास के क्षेत्र के निवासियों को इस अनुदान से सीधा लाभ मिलेगा। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होने के बाद बेस अस्पताल की आपातकालीन और विशेष चिकित्सा सेवाएँ बेहतर होंगी, विशेष रूप से नवजात शिशुओं और गंभीर रोगियों की देखभाल में सुधार अपेक्षित है।
आगे की राह
यह एमओयू भारत-श्रीलंका के बीच 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत बढ़ते स्वास्थ्य, रक्षा और मानवीय सहयोग की कड़ी में नवीनतम कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बहुआयामी सहायता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करेगी।