कुवैत एयरपोर्ट हमले में घायल भारतीयों से राजदूत परमिता त्रिपाठी की मुलाकात, 4 अभी भी अस्पताल में
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राजदूत परमिता त्रिपाठी ने 8 जून 2026 को कुवैत सिटी के जाबेर हॉस्पिटल में उन भारतीय नागरिकों से मुलाकात की, जो 3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में घायल हुए थे। कुवैत में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि राजदूत ने घायलों का हालचाल लिया और उन्हें मिशन की पूरी मदद का भरोसा दिलाया।
घायलों की ताज़ा स्थिति
दूतावास के अनुसार, इस हमले में घायल हुए 13 भारतीय नागरिकों में से 9 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 4 का अभी भी विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि वह अस्पताल प्रशासन और घायलों के परिवारों के साथ निरंतर संपर्क और समन्वय बनाए हुए है।
हमले का विवरण
3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पैसेंजर बिल्डिंग (टर्मिनल-1) को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए और कई की हालत गंभीर बताई गई। इसी हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि भी दूतावास ने उसी दिन की थी। दूतावास ने दिवंगत के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
कुवैत का ईरान पर आरोप
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में एक बार फिर कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित नागरिक प्रतिष्ठानों और कूटनीतिक मिशनों को निशाना बनाया गया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हुई, अनेक घायल हुए और ज़रूरी बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा।
दूतावास की भूमिका
भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया कि वह घायलों के परिवारों की मदद के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। राजदूत परमिता त्रिपाठी ने अस्पताल में घायलों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके साथ खड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।
आगे क्या होगा
दूतावास ने कहा कि जब तक शेष 4 घायल भारतीय पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, वह उनके परिवारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखेगा। हमले की पृष्ठभूमि में भारत सरकार की ओर से कुवैत में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइज़री की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।