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अमेरिकी जनगणना प्रस्ताव पर 150+ डेमोक्रेट्स का विरोध, 5 भारतीय-अमेरिकी सांसद सबसे आगे

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अमेरिकी जनगणना प्रस्ताव पर 150+ डेमोक्रेट्स का विरोध, 5 भारतीय-अमेरिकी सांसद सबसे आगे

सारांश

ट्रंप प्रशासन का जनगणना प्रस्ताव अमेरिकी राजनीति में बड़ी दरार का कारण बन गया है — 150 से अधिक डेमोक्रेट्स और पाँच भारतीय-अमेरिकी सांसद इसे संविधान के 14वें संशोधन की खुली अवमानना बता रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन इससे भी आगे जाने की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

150 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के जनगणना प्रस्ताव को वापस लेने की माँग की।
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल , रो खन्ना , राजा कृष्णमूर्ति , सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार विरोध पत्र पर हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल।
प्रस्ताव के तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासी और अस्थायी वीज़ा धारक कांग्रेस सीट-बंटवारे की गणना से बाहर होंगे; ग्रीन कार्ड धारक शामिल रहेंगे।
जनगणना प्रश्नावली से नस्ल, जातीयता और यौन अभिविन्यास के सवाल हटाने का भी प्रस्ताव।
टिप्पणी की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 ; नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स ने 60 दिन का अतिरिक्त समय माँगा।
रिपब्लिकन सांसद मैरी मिलर ने ग्रीन कार्ड धारकों को भी गणना से बाहर करने की माँग करते हुए प्रस्ताव के और कड़े रूप का समर्थन किया।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 150 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से उस प्रस्तावित जनगणना नियम को वापस लेने की माँग की है, जिसके तहत कुछ गैर-अमेरिकी नागरिकों को कांग्रेस में सीट-निर्धारण के लिए उपयोग होने वाले जनसंख्या आँकड़ों से बाहर रखा जाएगा। इस अभियान में पाँच भारतीय-अमेरिकी सांसद — प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार — भी शामिल हैं, जिन्होंने सार्वजनिक टिप्पणी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

विवाद की जड़ क्या है

अमेरिकी जनगणना ब्यूरो ने यह प्रस्ताव 10 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया था। इसके अनुसार बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और ग्रीन कार्ड से कम स्थायी कानूनी दर्जा रखने वाले व्यक्तियों — जिनमें अस्थायी वीजा धारक भी शामिल हैं — को सीट-बंटवारे की गणना से बाहर रखने का प्रस्ताव है। हालाँकि, स्थायी निवासियों यानी ग्रीन कार्ड धारकों को इन आँकड़ों में शामिल रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, जनगणना प्रश्नावली से नस्ल, जातीयता और यौन अभिविन्यास से जुड़े सवाल हटाने का भी प्रस्ताव है।

गौरतलब है कि जनता से टिप्पणियाँ प्राप्त करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर से बढ़ाकर 2 नवंबर 2026 कर दी गई है।

डेमोक्रेट्स का तर्क

इस अभियान का नेतृत्व प्रतिनिधि सभा की निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य रॉबर्ट गार्सिया ने किया। उनके साथ एशियन पैसिफिक अमेरिकन, हिस्पैनिक, ब्लैक और इक्वैलिटी कॉकस के अध्यक्ष भी जुड़े। गार्सिया ने कहा, 'हम कांग्रेस और अदालतों में इस नियम का विरोध करेंगे।'

सांसदों का कहना है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की भावना के विरुद्ध है, जिसके तहत राज्यों में प्रतिनिधित्व कुल आबादी के आधार पर निर्धारित होता है। उनके अनुसार, जनसांख्यिकीय आँकड़ों पर प्रतिबंध से मतदान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा कमज़ोर होगी।

एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की अध्यक्ष ग्रेस मेंग ने चेताया कि प्रस्तावित बदलावों से अल्पसंख्यक समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनके लिए उपलब्ध संसाधन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

रिपब्लिकन का पलटवार

दूसरी ओर, इलिनॉय की रिपब्लिकन सांसद मैरी मिलर ने प्रस्ताव के समर्थन में एक अलग पत्र जारी करते हुए ट्रंप प्रशासन से इससे भी आगे बढ़ने की माँग की। मिलर के अनुसार, कांग्रेस में सीट-निर्धारण की गणना में ग्रीन कार्ड धारकों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों को भी बाहर रखा जाना चाहिए। मिलर के समूह ने अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे में भी जनसांख्यिकीय सवालों पर प्रतिबंध की माँग की, जो वर्तमान प्रस्ताव से परे है।

राज्य विधायिकाओं की चिंता

नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स ने प्रस्ताव पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया और राज्यों के साथ परामर्श के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय माँगा। संगठन का कहना है कि अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे के अनुमान और प्रशासनिक रिकॉर्ड जनगणना की विस्तृत गणना का पर्याप्त विकल्प नहीं हो सकते। संगठन ने आगाह किया कि राज्यों से परामर्श किए बिना आँकड़ा-संग्रह व्यवस्था बदलने से चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण संबंधी कानूनों का पालन जटिल हो सकता है।

आगे क्या होगा

जनगणना ब्यूरो का तर्क है कि कांग्रेस में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए अमेरिका में स्थायी निवास और देश के प्रति निष्ठा को आधार बनाया जाना चाहिए। एजेंसी लोगों की कानूनी स्थिति निर्धारित करने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड के उपयोग पर विचार कर रही है। 2 नवंबर 2026 की टिप्पणी-समय सीमा के बाद अंतिम नियम का रूप स्पष्ट होगा, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह विवाद अदालती चुनौतियों तक भी पहुँच सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में हर 10 साल में होने वाली जनगणना के तहत प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों का 50 राज्यों के बीच जनसंख्या अनुपात में बंटवारा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ सीटें घटने से डेमोक्रेटिक गढ़ कमज़ोर होंगे — और यही वह संदर्भ है जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर छोड़ देती है। 14वें संशोधन की 'कुल आबादी' की भाषा स्पष्ट है, फिर भी प्रशासन 'निष्ठा' और 'स्थायित्व' जैसे नए पैमाने गढ़ रहा है जो संविधान में कहीं नहीं हैं। पाँच भारतीय-अमेरिकी सांसदों का इस मोर्चे पर एकजुट होना भारतवंशी समुदाय की बढ़ती राजनीतिक परिपक्वता का संकेत है, लेकिन असली परीक्षा 2 नवंबर के बाद अदालती दौर में होगी।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का विवादास्पद जनगणना प्रस्ताव क्या है?
यह जनगणना ब्यूरो द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्रकाशित प्रस्ताव है, जिसके तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और अस्थायी वीज़ा धारकों को कांग्रेस में सीट-बंटवारे के लिए उपयोग होने वाले जनसंख्या आँकड़ों से बाहर रखा जाएगा। साथ ही, जनगणना प्रश्नावली से नस्ल, जातीयता और यौन अभिविन्यास के सवाल हटाने का भी प्रस्ताव है।
कौन से भारतीय-अमेरिकी सांसद इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं?
पाँच भारतीय-अमेरिकी सांसदों — प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार — ने विरोध पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इन सांसदों ने 'कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस' के माध्यम से यह जानकारी साझा की।
डेमोक्रेटिक सांसद इस प्रस्ताव को असंवैधानिक क्यों मान रहे हैं?
सांसदों का तर्क है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के विरुद्ध है, जो कुल आबादी के आधार पर राज्यों में प्रतिनिधित्व निर्धारित करता है। उनके अनुसार जनसांख्यिकीय सवालों पर प्रतिबंध से मतदान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा भी कमज़ोर होगी।
क्या इस प्रस्ताव से ग्रीन कार्ड धारक भी प्रभावित होंगे?
वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार ग्रीन कार्ड धारकों को जनसंख्या गणना में शामिल रखा जाएगा। हालाँकि, रिपब्लिकन सांसद मैरी मिलर ने ग्रीन कार्ड धारकों को भी बाहर करने की माँग की है, जो प्रशासन के मौजूदा प्रस्ताव से आगे जाती है।
इस प्रस्ताव पर टिप्पणी की अंतिम तिथि क्या है और अगला कदम क्या होगा?
जनता से टिप्पणियाँ प्राप्त करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स ने राज्यों के साथ परामर्श के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय माँगा है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह विवाद अदालती चुनौतियों तक भी पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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