भारत-विरोधी टिप्पणियों का विरोध करने पर 'कैंपस रिफॉर्म' ने भारतीय-अमेरिकी छात्र पत्रकार वसंत भट्ट को हटाया
सारांश
मुख्य बातें
यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के 21 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी छात्र पत्रकार वसंत भट्ट ने आरोप लगाया है कि भारतीयों के विरुद्ध बढ़ती नफरत का विरोध करते हुए उन्होंने डेमोक्रेट उम्मीदवार को वोट दिया, जिसके बाद कंजर्वेटिव मीडिया प्लेटफॉर्म 'कैंपस रिफॉर्म' ने उनकी सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट की भूमिका समाप्त कर दी। 24 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने बयान में भट्ट ने इसे संवैधानिक अधिकार के इस्तेमाल का परिणाम बताया। यह विवाद अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रति बढ़ती शत्रुता पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
टेक्सास के राजनीति विज्ञान के छात्र वसंत भट्ट ने एक्स पर लिखा, 'मैंने अपने विवेक के अनुसार मतदान करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया, भारतीयों के खिलाफ हो रही नफरत के खिलाफ आवाज उठाई और रिपब्लिकन पार्टी की लाइन पर चलने से इंकार किया। अब कैंपस रिफॉर्म के संवाददाता कार्यक्रम में मेरी भागीदारी समाप्त कर दी गई है।' इस पोस्ट के बाद उनका प्रोफाइल, जिसमें उन्हें 'सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट' के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, वेबसाइट के लेखकों की सूची से हटा दिया गया।
भट्ट ने स्पष्ट किया, 'किसी कार्यक्रम में अपनी जगह खो देने से मैं अपने विचार नहीं बदलूंगा और न ही अपने समुदाय का साथ छोड़ूंगा।' उल्लेखनीय है कि कैंपस रिफॉर्म ने अब तक भट्ट के दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मतदान का कारण और पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में भट्ट ने घोषणा की थी कि उन्होंने टेक्सास की अमेरिकी सीनेट दौड़ में रिपब्लिकन केन पैक्सटन के बजाय डेमोक्रेट जेम्स टालारिको को वोट दिया। उनका तर्क था कि भारतीय-अमेरिकियों की पहचान पर हो रहे हमले और बढ़ती विदेशी-विरोधी सोच उनकी इस चुनावी प्राथमिकता के पीछे की प्रमुख वजह थी।
गौरतलब है कि कैंपस रिफॉर्म पर उपलब्ध उनकी जीवनी के अनुसार, भट्ट ने पहले सीनेटर टेड क्रूज के पुनर्निर्वाचन अभियान में इंटर्नशिप की थी और टेक्सास यूथ समिट के साथ भी काम किया था — जो राज्य के सबसे बड़े युवा रूढ़िवादी सम्मेलनों में से एक माना जाता है। यह पृष्ठभूमि उनकी पार्टी-लाइन से अलग होकर मत डालने के निर्णय को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की प्रतिक्रिया
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने एक्स पर एक व्यक्तिगत पोस्ट में भट्ट के विरुद्ध हो रहे हमलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस घटना को इलिनोइस के ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश से पूर्व बने माहौल से जोड़ा।
भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसदों का कहना है कि भारत-विरोधी बयानबाजी अब केवल ऑनलाइन तक सीमित नहीं रही, बल्कि कथित तौर पर हिंसा की घटनाओं को भी प्रोत्साहन दे रही है। इस दृष्टि से भट्ट का मामला एक व्यापक और चिंताजनक रुझान का प्रतीक बन गया है।
कैंपस रिफॉर्म और व्यापक संदर्भ
कैंपस रिफॉर्म, वर्जीनिया स्थित रूढ़िवादी गैर-लाभकारी संस्था लीडरशिप इंस्टीट्यूट की एक परियोजना है, जो युवा राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का काम करती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय एच-1बी वीजा धारकों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने और भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर हमलों की खबरें आ रही हैं।
उल्लेखनीय है कि टेक्सास में अमेरिका की सबसे बड़ी भारतीय-अमेरिकी आबादियों में से एक निवास करती है — ह्यूस्टन और डैलस-फोर्ट वर्थ क्षेत्र में इनकी उल्लेखनीय उपस्थिति है। यह सामाजिक-राजनीतिक तनाव इस समुदाय के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
आगे क्या
फिलहाल कैंपस रिफॉर्म की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भट्ट ने संकेत दिया है कि वह अपनी पत्रकारिता और सामुदायिक सक्रियता जारी रखेंगे। यह देखना अहम होगा कि आने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले भारतीय-अमेरिकी समुदाय का राजनीतिक झुकाव किस दिशा में जाता है।